स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली-पानी के बढ़े बिलों से जनता परेशान, निजीकरण और स्मार्ट मीटर व्यवस्था की हो उच्चस्तरीय जांच : राजबीर सिंह भारतीय

स्मार्ट मीटर के नाम पर बिजली-पानी के बढ़े बिलों से जनता परेशान, निजीकरण और स्मार्ट मीटर व्यवस्था की हो उच्चस्तरीय जांच : राजबीर सिंह भारतीय

पुराने मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर लगने के बाद कई गुना बढ़े बिलों की शिकायतें गंभीर — परियोजना बंद तो स्मार्ट वाटर मीटर के साथ बिजली के स्मार्ट हटाकर पुराने मीटर लगाने की मांग:
मनीमाजरा, चंडीगढ़। 22.06.2026
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन (सेक्टर-13) चंडीगढ़ के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने चंडीगढ़ में बिजली विभाग के निजीकरण और स्मार्ट मीटर व्यवस्था को लेकर आम जनता में बढ़ती नाराजगी पर प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि चंडीगढ़ में बिजली विभाग के निजीकरण से पहले बिजली वितरण व्यवस्था प्रशासन के अधीन थी और उस समय आम उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत बहुत कम बिजली बिल आते थे। विभाग भी आर्थिक रूप से बेहतर स्थिति में था और जनता को सीधा लाभ मिल रहा था। लेकिन निजीकरण के बाद स्मार्ट मीटर लगाए जाने के पश्चात अनेकों अनेक उपभोक्ताओं की बिजली के बिल कई गुना बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं। ऐसा क्यों?

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि निजीकरण का उद्देश्य व्यवस्था को बेहतर बनाना और जनता को राहत देना था, तो आम उपभोक्ता को इसका वास्तविक लाभ क्या मिला? निजीकरण के बाद यदि जनता का आर्थिक बोझ बढ़ रहा है तो सरकार को इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।
इसी प्रकार, 24×7 पानी के पायलट प्रोजेक्ट के बाद पानी तो कभी 24 घंटे पानी तो आया ही नहीं और ना ही साफ पानी आता है परन्तु उसके बाद लगाए गए स्मार्ट वाटर मीटरों के बाद पानी के बिलों में भी भारी वृद्धि की शिकायतें सामने आई हैं। एसोसिएशन का कहना है कि यदि कोई परियोजना बंद हो चुकी है तो उसके नाम पर लगाए गए स्मार्ट मीटरों को जारी रखना उचित नहीं है।
अभिजीत सैनी : जनता को बिलों की मार से राहत मिलनी चाहिए:
एसोसिएशन के सचिव अभिजीत सैनी ने कहा कि बिजली और पानी आम आदमी की मूलभूत जरूरतें हैं। इन दोनों के बिलों में अचानक वृद्धि से मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों का घरेलू बजट बिगड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मीटर और बिलिंग व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसे आम उपभोक्ता आसानी से समझ सके और जिसकी रीडिंग पर उसे भरोसा हो।
उन्होंने मांग की कि जिन उपभोक्ताओं के बिजली और पानी के बिल असामान्य रूप से बढ़े हैं, उनके मीटरों की जांच कराकर बिलों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए और गलत बिलिंग होने पर उपभोक्ताओं को तत्काल राहत दी जाए।
एडवोकेट अरुण वशिष्ठ : पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी:
एसोसिएशन के लीगल एडवाइजर एडवोकेट अरुण कुमार वशिष्ठ ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक उपयोगिता से जुड़ी व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हित सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरों के कारण यदि उपभोक्ताओं के बिलों में असामान्य वृद्धि की शिकायतें लगातार आ रही हैं तो प्रशासन को केवल बिल जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि मीटर की सटीकता, रीडिंग प्रणाली, बिलिंग प्रक्रिया और उपभोक्ता शिकायतों के निवारण की पूरी व्यवस्था की स्वतंत्र जांच करवानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता को यह स्पष्ट होना चाहिए कि निजीकरण के बाद बिजली व्यवस्था से उपभोक्ताओं को क्या वास्तविक लाभ मिला और यदि कोई आर्थिक लाभ हुआ है तो उसका कितना हिस्सा जनता तक पहुंचा।
रमेश चंद सिरसवाल : परियोजना बंद तो स्मार्ट मीटर भी हटें:
एसोसिएशन के सलाहकार मंडल के सदस्य रमेश चंद सिरसवाल ने कहा कि 24×7 पानी का पायलट प्रोजेक्ट यदि बंद हो चुका है तो उससे जुड़े स्मार्ट वाटर मीटरों को भी हटाकर पुराने मीटर लगाए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता ने स्मार्ट सिटी और 24×7 पानी परियोजना के नाम पर बेहतर सुविधा की उम्मीद की थी, लेकिन यदि इसके बाद लोगों को कई गुना अधिक बिलों का सामना करना पड़ रहा है तो प्रशासन को इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “जनता को स्मार्ट मीटर नहीं, सही मीटर और सही बिल चाहिए। यदि पुरानी मीटर व्यवस्था में उपभोक्ताओं को कम और पारदर्शी बिल मिलते थे, तो जनहित में पुराने मीटर दोबारा लगाने में क्या आपत्ति है?”
एसोसिएशन ने रखी प्रमुख मांगें:
एसोसिएशन के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय, चेयरमैन सुभाष धीमान, वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरमीत सिंह राणा, उपाध्यक्ष शमीम अहमद एवं रॉबर्ट विलियम, सचिव अभिजीत सैनी एवं पूजा, सह सचिव मंदीप, सैंकी, सतनाम सिंह बैंस एवं आरिफ हुसैन, लीगल एडवाइजर एडवोकेट अरुण कुमार वशिष्ठ तथा सलाहकार मंडल के सरदार मुनजीत सिंह, जोगेंद्र ठाकुर एवं रमेश चंद सिरसवाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने मांग का समर्थन करते हुए कहा कि:
बिजली और पानी के स्मार्ट मीटरों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।

असामान्य रूप से बढ़े बिजली-पानी के बिलों का ऑडिट और पुनः जांच करवाई जाए।
गलत बिलिंग पाए जाने पर उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत और बिलों में उचित समायोजन दिया जाए।
24×7 पानी पायलट प्रोजेक्ट बंद होने के बाद लगाए गए स्मार्ट वाटर मीटर हटाकर पुराने मीटर लगाए जाएं।
बिजली के स्मार्ट मीटरों को लेकर भी जनता की शिकायतों की जांच कर जनहित में उचित निर्णय लिया जाए।
बिजली विभाग के निजीकरण के बाद उपभोक्ताओं को हुए लाभ और निजी कंपनी को हुए लाभ का पारदर्शी तुलनात्मक ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि “सरकार का काम जनता को राहत देना है, आर्थिक बोझ बढ़ाना नहीं। चंडीगढ़ की जनता पहले ही महंगाई की मार झेल रही है। ऐसे में बिजली और पानी के बढ़े हुए बिल आम परिवारों पर दोहरी मार हैं। सरकार को जनहित में तत्काल निर्णय लेकर जनता को राहत देनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर तभी सार्थक हैं जब वे उपभोक्ता के लिए सुविधा, पारदर्शिता और बचत लेकर आएं। यदि स्मार्ट मीटर ही जनता के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ का कारण बन रहे हैं, तो ऐसी व्यवस्था की समीक्षा करना और जरूरत पड़ने पर पुराने मीटर दोबारा लगाना ही वास्तविक जनहित होगा।
जारी कर्ता
राजबीर सिंह भारतीय, अध्यक्ष ऑल मनीमाजरा रेजिडेंस एंड वेलफेयर एसोसिएशन सैक्टर 13 चंडीगढ़।



