जब सफाई व्यवस्था स्थायी है, तो सफाई कर्मचारी अस्थायी क्यों? :राजबीर सिंह भारतीय

जब सफाई व्यवस्था स्थायी है, तो सफाई कर्मचारी अस्थायी क्यों? :राजबीर सिंह भारतीय

आजादी के दशकों बाद भी सफाई कर्मियों का शोषण—सरकार, प्रशासन और समाज के लिए आत्ममंथन का समय : राजबीर सिंह भारतीय
“जिस समाज, गाँव बस्ती शहर और प्रदेश को अपनी सफाई चाहिए, उसे सबसे पहले अपने सफाई कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करना होगा।”

चंडीगढ़/हरियाणा।
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों का मुद्दा केवल रोजगार का नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा और हमारी व्यवस्था की संवेदनशीलता का गंभीर प्रश्न है। जब सफाई व्यवस्था सदियों से समाज का अभिन्न और अनिवार्य हिस्सा रही है और हर गांव, शहर, कस्बे, कार्यालय, अस्पताल, स्कूल तथा सार्वजनिक स्थान को प्रतिदिन सफाई की आवश्यकता है, तो इस व्यवस्था को चलाने वाले कर्मचारी आज भी कच्चे, ठेका और अस्थायी क्यों हैं?
राजबीर सिंह भारतीय, रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट, ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ ने कहा कि यह विषय केवल सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, सामाजिक संगठनों और पूरे समाज के लिए गंभीर आत्ममंथन का है।

उन्होंने कहा कि सफाई कोई छह महीने या एक साल का प्रोजेक्ट नहीं है। जब तक मानव जीवन, गांव, शहर और समाज हैं, तब तक सफाई व्यवस्था की आवश्यकता बनी रहेगी। बढ़ती आबादी के साथ इसकी जरूरत और बढ़ेगी।
राजबीर सिंह भारतीय ने सवाल उठाया कि जब कोई कर्मचारी 10, 15, 20 या 25 वर्षों से लगातार स्थायी प्रकृति का कार्य कर रहा है, तो उसे आज भी ठेका या कच्चा कर्मचारी कहना क्या न्यायसंगत है? कर्मचारी की मेहनत स्थायी, जिम्मेदारी स्थायी, काम स्थायी और समाज की जरूरत स्थायी—फिर उसका रोजगार अस्थायी क्यों?
एक ही काम, लेकिन बराबर वेतन नहीं—क्यों?
उन्होंने कहा कि जब कर्मचारी समान जिम्मेदारी और श्रम के साथ एक ही व्यवस्था को चला रहा है, तो वेतन और सेवा शर्तों में भारी अंतर क्यों? सर्वोच्च न्यायालय ने विभिन्न मामलों में “समान कार्य के लिए समान वेतन” तथा लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण सिद्धांत दिए हैं। सरकार और प्रशासन को न्यायिक सिद्धांतों, लागू नियमों और सक्षम प्राधिकारियों के निर्देशों की भावना का ईमानदारी से पालन करना चाहिए।
संविधान के दायरे में आवाज उठाएं तो लाठी क्यों?
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि जब कर्मचारी अपनी रोजी-रोटी, नौकरी की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाते हैं, तो जवाब संवाद और समाधान की बजाय पुलिस कार्रवाई, हिरासत और लाठी के रूप में क्यों मिलता है? लोकतंत्र में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांग उठाना अपराध नहीं है। सरकार की पहली जिम्मेदारी संवाद और न्यायपूर्ण समाधान होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी केवल व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि हमारे स्वच्छ और सुरक्षित जीवन की व्यवस्था के महत्वपूर्ण आधार हैं। हम स्वच्छ सड़कें, साफ बाजार और समय पर कचरा उठाने की अपेक्षा करते हैं, लेकिन हमें यह भी सोचना होगा कि यह सब संभव बनाने वाले कर्मचारियों का जीवन कितना सुरक्षित और सम्मानजनक है।
सरकार और समाज से सीधा सवाल
जब काम स्थायी है—तो कर्मचारी कच्चा क्यों?
जब जिम्मेदारी समान है—तो वेतन समान क्यों नहीं?
जब वर्षों से सेवा ली जा रही है—तो रोजगार की सुरक्षा क्यों नहीं?
और जब कर्मचारी संविधान के दायरे में अपनी आवाज उठाता है—तो बातचीत की जगह लाठी क्यों?
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सफाई कर्मचारियों का प्रश्न केवल वेतन या नौकरी का नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और सामाजिक न्याय की असली परीक्षा है। हरियाणा सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान निकालना चाहिए।
“जिस समाज, गाँव, शहर, बस्ती और प्रदेश को अपनी सफाई चाहिए, उसे सबसे पहले अपने सफाई कर्मियों के भविष्य को सुरक्षित करना होगा।”
— राजबीर सिंह भारतीय
रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट
ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़



