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कॉलेज व यूनिवर्सिटीज की चौखट से दूर हो रहे हैं विद्यार्थी, अगर ऐसा रहा तो नए सत्र 2026-27 के दाखिलों से लगता है हर दूसरी सीट रहेगी खाली: राजबीर सिंह भारतीय

 

कॉलेज व यूनिवर्सिटीज की चौखट से दूर हो रहे हैं विद्यार्थी, अगर ऐसा रहा तो नए सत्र 2026-27 के दाखिलों से लगता है हर दूसरी सीट रहेगी खाली: राजबीर सिंह भारतीय

हरियाणा के कॉलेजों में कम दाखिले के कारणों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए:

 

क्या शिक्षकों की कमी, कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, कॉलेज भवनों का अभाव और गलत शिक्षा नीतियां हैं दाखिले घटने का कारण?

 

चंडीगढ़/हरियाणा।

हरियाणा के कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में घटते दाखिले गंभीर चिंता का विषय हैं। अगर हालात यही रहे तो नए सत्र 2026-27 में दाखिलों की स्थिति से लगता है कि बड़ी संख्या में सीटें खाली रह सकती हैं और कई कॉलेजों में हर दूसरी सीट खाली रहने जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सरकार और उच्च शिक्षा विभाग को निष्पक्ष जांच करनी चाहिए कि आखिर विद्यार्थी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से दूर क्यों हो रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कॉलेजों में स्थायी प्राचार्यों, प्रोफेसरों और शिक्षकों की कमी है? क्या कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर, कॉलेज भवनों का अभाव और आवश्यक सुविधाओं की कमी दाखिले घटने का कारण है?

उन्होंने कहा कि यह भी जांच होनी चाहिए कि कहीं कुछ कॉलेजों को केवल औपचारिकता के लिए स्कूल भवनों के कुछ कमरों, शेड, धर्मशाला, सामुदायिक केंद्र, पंचायत घर या अन्य सार्वजनिक भवनों में तो नहीं चलाया जा रहा। ऐसे स्थानों पर कॉलेज जैसा वातावरण, पर्याप्त लाइब्रेरी, आधुनिक लैब, खेल मैदान, स्वच्छ पेयजल और वॉशरूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना मुश्किल हो सकता है।

 

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि बेहतर शिक्षा और सुविधाओं की तलाश में विद्यार्थी दूसरे राज्यों के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की ओर भी जा सकते हैं। यदि ऐसा है तो यह हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी है।

 

उन्होंने कहा कि सरकार को राजनीतिक लाभ लेने के लिए केवल नए संस्थानों की घोषणा करने के बजाय उनमें स्थायी भवन, पर्याप्त शिक्षक, आधुनिक सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। शिक्षा बजट बढ़ाकर सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

 

उन्होंने कहा कि स्कूलों में भी कई स्थानों पर विद्यार्थियों की संख्या कम होने की बात सामने आ रही है। पिछले दिनों स्कूल बंद करने की बात सामने पर सरकार ने यह कह कर टाल दिया कि स्कूल बंद नहीं बल्कि मर्ज किए हैं। जबकि बात वही है जो लोग कह रहे हैं कि स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है। अस्थायी व्यवस्था और नौकरी की असुरक्षा में कार्यरत शिक्षकों से भी शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। सरकार को सरकारी शिक्षा संस्थानों को कमजोर होने से बचाने के लिए ठोस नीति बनानी चाहिए।

 

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “यदि समय रहते शिक्षा व्यवस्था नहीं सुधारी गई तो आने वाले 5-7 वर्षों में सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों का ढांचा और कमजोर हो सकता है। विद्यार्थी ही नहीं होंगे तो शिक्षा व्यवस्था और उससे जुड़े संस्थानों, मंत्रालय व निदेशालय को भी गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा।”

 

“हर दूसरी सीट खाली रहने के हालात केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी हैं।”

 

 

राजबीर सिंह भारतीय

रिटायर्ड सुपरिंटेंडेंट

ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल, हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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