चण्डीगढ़ में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को दी जा रही ₹1000 मासिक पेंशन को लेकर असंतोष जताया

चण्डीगढ़ में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को दी जा रही ₹1000 मासिक पेंशन को लेकर असंतोष जताया
चण्डीगढ़ : शहर में बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों को दी जा रही ₹1000 मासिक पेंशन को लेकर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे संवेदनहीनता और अन्यायपूर्ण व्यवस्था करार दिया है। राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि एक ओर चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर समाज के सबसे कमजोर वर्ग बुजुर्ग, विधवाएं और दिव्यांग, आज भी मात्र ₹1000 मासिक पेंशन पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा महंगाई में यह राशि न केवल अपर्याप्त है, बल्कि अपमानजनक भी प्रतीत होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रसोई गैस की कीमत ₹1000 के आसपास है और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, तो प्रशासन ने वर्षों से पेंशन राशि में कोई बढ़ोतरी क्यों नहीं की? भारतीय ने पेंशन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ₹1000 प्रति माह का मतलब महज ₹33 प्रतिदिन होता है। उन्होंने सवाल किया किया क्या कोई सरकारी अधिकारी ₹33 में एक दिन का भोजन और आवश्यक दवाइयां जुटा सकता है? यदि नहीं, तो बुजुर्गों से ऐसी अपेक्षा क्यों की जा रही है?”
संसद में उठा मुद्दा, फिर भी चुप्पी
इस मुद्दे को मनीष तिवारी द्वारा संसद में उठाए जाने का हवाला देते हुए भारतीय ने कहा कि इसके बावजूद स्थानीय प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया या नीति बदलाव देखने को नहीं मिला है, जो चिंता का विषय है।
पड़ोसी राज्यों से तुलना में पिछड़ा चंडीगढ़
एसोसिएशन ने अन्य राज्यों के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि पेंशन के मामले में चंडीगढ़ काफी पीछे है जैसे कि हरियाणा में ₹3200 प्रति माह, पंजाब में ₹1500 प्रति माह व राजस्थान में ₹1250 प्रति माह (वृद्धि प्रस्तावित) है, वहीँ चंडीगढ़ में ये लंबे समय से बिना बदलाव के ₹1000 ही है। भारतीय के अनुसार यह अंतर दर्शाता है कि चंडीगढ़ प्रशासन ने सामाजिक सुरक्षा के इस महत्वपूर्ण पहलू को प्राथमिकता नहीं दी है।
एसोसिएशन की प्रमुख मांगें
एसोसिएशन के चेयरमैन सुभाष धीमान और वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने संयुक्त रूप से प्रशासन के सामने पेंशन राशि को बढ़ाकर कम से कम ₹5000 प्रतिमाह किए जाने, बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों के लिए अतिरिक्त चिकित्सा भत्ता दिए जाने व पेंशन प्रक्रिया को सरल बनाकर घर बैठे सत्यापन की सुविधा उपलब्ध कराए जाने की मांगे उठाई हैं।
“अब याचना नहीं, आंदोलन होगा”
एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पेंशन वृद्धि को लेकर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो वे शहर की विभिन्न आरडब्ल्यूए, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को न्यायालय तक ले जाया जाएगा और जनहित याचिका दायर की जाएगी।
राजबीर सिंह भारतीय ने प्रशासन से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि बुजुर्गों ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा शहर के निर्माण और समाज की सेवा में लगाया है और आज जब उन्हें सहारे की आवश्यकता है, तो उन्हें नजरअंदाज करना एक कल्याणकारी राज्य की भावना के विपरीत है। बुजुर्ग बोझ नहीं, बल्कि हमारे समाज की धरोहर हैं।



