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डॉ. मातवर की रचनाओं में सामाजिक सरोकार : सुभाष

डॉ. मातवर की रचनाओं में सामाजिक सरोकार : सुभाष

डॉ. मातवर मीत के तीसरे काव्य संग्रह का हुआ लोकार्पण

 

चण्डीगढ़ : चण्डीगढ़ प्रेस क्लब में डॉ. मातवर सिंह मीत की काव्य पुस्तक “ख़ामोशिया तोड़ दो” का लोकार्पण किया गया, जिसमें चंडीगढ़ साहित्य अकादमी के महासचिव सुभाष भास्कर ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। कार्यक्रम में डॉ. बलविंदर सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में डॉ. मीत की रचनाधर्मिता और काव्य लेखन पर विस्तार से चर्चा हुई। इस चर्चा में डॉ. राजेंद्र धवन, जोगेंद्र वत्स, रेखा मित्तल, डॉ. नमीता सिंह, डॉ. मीनाक्षी वर्मा, शशिधर पुरोहित आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। इस काव्य संग्रह के विषय में डॉ. मीत ने बताया कि यह मेरा तीसरा कविता संग्रह है। इसके साथ ही दो संयुक्त कविता संग्रह में भी रचनाओं को सम्मिलित किया गया।

“ख़ामोशियां तोड़ दो” में आम जनजीवन से जुड़ी 79 रचनाओं को समाहित किया गया है। इन रचनाओं में गांव से लेकर शहर और शहर से महानगर तक का संघर्ष, अनुभव भी देखने को मिलेगा। इन रचनाओं में गांव के किसानों ,दिहाड़ी मजदूर, महानगर में नौकरी कर रहे लोगों के संघर्षमय जीवन को चरितार्थ करने का प्रयास किया गया है।

 

बीज वक्ता के तौर पर डॉ. बलवेन्दर सिंह ने कहा कि इस संग्रह में महानगरीय समस्याओं, आम आदमी की पीड़ा और संघर्षमय जीवन की छवियों को उकेरा गया है। इस कविता संग्रह में केबल टीवी के साथ पारिवारिकता, प्लेटफार्म की जिंदगी, पोस्टकार्ड और अंतर्देशीय की बातचीत, गांव को भूलते हुए लोग, बचपन के लुप्त होते खेल ,मोबाइल की दुनिया,दांत, रंग बिरंगे बैलून, मुंबई की लोकल ट्रेन, साक्षरता अभियान, अचल पहाड़ भटकता सुख भी है।

 

अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए सुभाष भास्कर ने अपनी शुभकामनाएं देते हुए संग्रह की रचनाओं की सराहना की और आगे भी डॉ. मीत को निरंतर अपनी काव्य साधना में लीन रहने को कहा। उन्होंने कहा कि डॉ.मीत की रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं का पुट और सामाजिक सरोकार है।

Ravinder Popli

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