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डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, सेक्टर-8सी में शिक्षकों के लिए ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं एआई रेडीनेस’कार्यशाला आयोजित

डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, सेक्टर-8सी में शिक्षकों के लिए ‘कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं एआई रेडीनेस’कार्यशाला आयोजित

चंडीगढ़। 20 जुलाई 2026 शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के नवीनतम तकनीकी ज्ञान एवं व्यावहारिक कौशल से सुसज्जित करने के उद्देश्य से डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, सेक्टर-8सी, चंडीगढ़ में “कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं एआई रेडीनेस” विषय पर एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का संचालन राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT), रोपड़ के विशेषज्ञों द्वारा किया गया।

 

कार्यशाला के प्रथम सत्र में संयुक्त निदेशक डॉ. सरवन सिंह ने कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं एआई रेडीनेस की मूलभूत अवधारणाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, डीप लर्निंग तथा जनरेटिव एआई की कार्यप्रणाली से परिचित कराया। साथ ही यह भी बताया कि एआई प्रणालियां किस प्रकार सीखती हैं, निर्णय लेती हैं और विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर शिक्षा, में किस प्रकार बदलाव ला रही हैं।

डॉ. सिंह ने शिक्षण कार्य में उपयोगी एआई टूल्स, एडैप्टिव असेसमेंट (Adaptive Assessment), इंटेलिजेंट ट्यूटरिंग सिस्टम्स (Intelligent Tutoring Systems) तथा एआई के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने डेटा गोपनीयता, पारदर्शिता, जवाबदेही और एआई में पक्षपात (Bias) जैसी चुनौतियों पर विशेष प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त शिक्षकों को प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग की अवधारणा से भी अवगत कराया गया, जिससे वे एआई टूल्स का अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुखी उपयोग कर सकें।

 

कार्यशाला के द्वितीय सत्र का संचालन एनआईईएलआईटी, रोपड़ के प्रोजेक्ट मैनेजर लवनीश वर्मा ने किया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में एआई के व्यावहारिक उपयोगों का प्रदर्शन करते हुए शिक्षकों को आकर्षक पावरपॉइंट प्रस्तुतियां, वेबसाइट एवं डिजिटल पोर्टफोलियो तैयार करने की प्रक्रिया समझाई। विभिन्न एआई प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से पाठ्य सामग्री तैयार करने, शैक्षणिक चित्र एवं संसाधन विकसित करने तथा शिक्षण को अधिक प्रभावी, रचनात्मक और विद्यार्थियों की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के व्यावहारिक उपाय भी साझा किए गए।

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशालाएं शिक्षकों को आधुनिक तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने और शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। कार्यशाला में शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए विशेषज्ञों से संवाद किया तथा एआई आधारित शिक्षण तकनीकों को अपने कक्षागत शिक्षण में अपनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

Ravinder Popli

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