MIDCIPS 2026 में देशभर से 400 से अधिक मनोचिकित्सक शामिल, मनोरोग उपचार में दवाओं के सही और सुरक्षित उपयोग पर जोर

MIDCIPS 2026 में देशभर से 400 से अधिक मनोचिकित्सक शामिल, मनोरोग उपचार में दवाओं के सही और सुरक्षित उपयोग पर जोर
चंडीगढ़, 22 अगस्त 2026: इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की मिड-ईयर कॉन्फ्रेंस 2026 (MIDCIPS 2026) का आज हयात रीजेंसी, चंडीगढ़ में उद्घाटन हुआ। सम्मेलन में देशभर से 400 से अधिक मनोचिकित्सक और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। दो दिवसीय यह सम्मेलन 22 और 23 अगस्त 2026 को आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष सम्मेलन का विषय है—“Polypharmacy: Rational, Irrational and Beyond”, यानी एक मरीज को एक से अधिक दवाएं देने का सही और गलत उपयोग।

सम्मेलन का उद्घाटन इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. टी.एस.एस. राव ने किया। उन्होंने कहा कि गंभीर और जटिल मानसिक बीमारियों के इलाज में कई बार एक से अधिक दवाओं की जरूरत होती है। लेकिन बिना जरूरत कई दवाएं देने से साइड इफेक्ट्स, दवाओं के आपसी प्रभाव और मरीज पर इलाज का अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।
सम्मेलन की अध्यक्ष डॉ. सविता मल्होत्रा ने कहा कि सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि कब मरीज को एक से अधिक दवाओं की जरूरत होती है, दवाओं का सुरक्षित और प्रभावी उपयोग कैसे किया जाए और कब कुछ दवाओं को कम करने या बंद करने पर विचार किया जाए।
उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल दवाओं की संख्या कम करना नहीं है। हर दवा का एक स्पष्ट कारण होना चाहिए और उससे मरीज को लाभ मिलना चाहिए। दवाओं की समय-समय पर समीक्षा करने से अनावश्यक दवाओं को कम किया जा सकता है, साइड इफेक्ट्स से बचा जा सकता है और इलाज को बेहतर बनाया जा सकता है।

सम्मेलन के सह-अध्यक्ष डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी (IPS) केंद्र और राज्य सरकारों को एक प्रस्ताव देने की योजना बना रही है। इसमें युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सरकारी नीतियों और शिक्षा व्यवस्था में जरूरी बदलाव करने का सुझाव दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि स्कूल और कॉलेज स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य की जानकारी, जीवन जीने के कौशल और तनाव से निपटने की क्षमता विकसित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इससे युवाओं को तनाव और नकारात्मक सोच से बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलेगी और उनमें सकारात्मक सोच, स्वस्थ व्यवहार, रचनात्मक गतिविधियों और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलेगा।
सम्मेलन में देशभर के विशेषज्ञ मनोरोग उपचार में एक से अधिक दवाओं के फायदे, नुकसान और सही उपयोग पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें दवाओं के सही तरीके से इस्तेमाल, दवाओं की समीक्षा, अनावश्यक दवाओं को कम करने या बंद करने, बच्चों और विशेष मरीजों के उपचार तथा आधुनिक मनोरोग उपचार जैसे विषय शामिल हैं।
सम्मेलन का एक प्रमुख कार्यक्रम “भारत में Rational Polypharmacy के लिए SOPs तैयार करना” है। इसमें IPS के वरिष्ठ पदाधिकारी और विशेषज्ञ मिलकर एक से अधिक दवाओं के सुरक्षित और सही इस्तेमाल के लिए व्यावहारिक दिशा-निर्देश तैयार करने पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन मनोचिकित्सकों को अपने अनुभव साझा करने और इलाज के बेहतर एवं वैज्ञानिक तरीकों पर चर्चा करने का एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है।
सम्मेलन का मुख्य संदेश है: रैशनल पॉलीफार्मेसी का मतलब कम दवाएं देना नहीं है। इसका मतलब है—सही मरीज को, सही दवा, सही कारण से देना और समय-समय पर यह देखना कि दवा की अभी भी जरूरत है या नहीं।
“अधिक दवाओं से बेहतर दवाओं की ओर”
23 अगस्त 2026 को सम्मेलन के दूसरे दिन भी एक से अधिक दवाओं के सही और सुरक्षित उपयोग पर चर्चा जारी रहेगी। विशेषज्ञ इस बात पर विचार करेंगे कि मरीजों के इलाज को और बेहतर बनाने के लिए दवाओं का सही चयन और नियमित समीक्षा कैसे की जाए।
MIDCIPS 2026 का उद्देश्य दवाओं के सही इस्तेमाल और नियमित समीक्षा के माध्यम से मरीजों को सुरक्षित, प्रभावी और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को बढ़ावा देना है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें
डॉ. प्रमोद कुमार
मोबाइल: 9876050700



