शीर्षक: “जनता पूछे सरकार से सवाल, कब तक सहेगी महंगाई की मार?” – राजबीर सिंह भारतीय

दिनांक: 3 जून, 2026
स्थान: चंडीगढ़
शीर्षक: “महंगाई की चौतरफा मार: ईंधन के बढ़ते दामों से बेपटरी हुआ घर का बजट, आम गरीब आदमी और मध्यम वर्ग में त्राहि-त्राहि”

शीर्षक: “जनता पूछे सरकार से सवाल, कब तक सहेगी महंगाई की मार?” – राजबीर सिंह भारतीय
चंडीगढ़ (मनीमाजरा)।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हो रही बेतहाशा वृद्धि और उससे पैदा होने वाले महंगाई के संकट को लेकर स्थानीय समाजसेवियों और रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन ने बढती हुई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट चंडीगढ़ में एडवोकेट जनरल कार्यालय के सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडेंट एवं जाने-माने समाजसेवी श्री राजबीर सिंह भारतीय की अगुवाई में स्थानीय प्रतिनिधियों ने बढ़ती कीमतों पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और सरकार से पूछा है कि आखिर जनता कब तक इस महंगाई की मुसीबत को सहेगी?

रसोई का बजट बिगड़ा, गृहणियों का जीना मुहाल:
प्रेस नोट जारिए समाजसेवी कमलेश देवी और पूजा राय ने कहा कि ईंधन के दाम बढ़ने का सीधा और सबसे घातक असर घर की रसोई पर पड़ रहा है। जो गृहणियां पूरा घर और रसोई चलाने की जिम्मेदारी संभालती हैं, उनके लिए अब घर का मासिक बजट संभालना नामुमकिन होता जा रहा है। दूध, सब्जियां, आटा, दालें और तेल नमक जैसी रोजमर्रा की बेहद जरूरी चीजें तेजी से महंगी हो रही हैं। नमक पर बढे टैक्स पर तो हमने अंग्रेजी हुक्मरान के खिलाफ जन आंदोलन किया तथा अंग्रेजी हुक्मरान को झुकना पड़ गया था। आज तो हमारी अपनी स्वतंत्र भारत की सरकार है।
उन्होंने सरकार से पुरजोर मांग करते हुए कहा:
“सरकार को तुरंत बढ़ती हुई आवश्यक वस्तुओं और खाद्य पदार्थों पर से टैक्स कम कर देना चाहिए। अगर टैक्स में कटौती नहीं की गई, तो एक मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार की गृहणी के लिए अपने घर को ठीक ढंग से चलाना पूरी तरह दूभर हो जाएगा।”
परिवहन लागत बढ़ने से आम आदमी बेहाल: सुभाष धीमान
मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन श्री सुभाष धीमान और राजबीर सिहँ भारतीय सयुंक्त रुप से बयान में आर्थिक आंकड़ों को सामने रखते हुए कहा कि देश में 70 फीसदी से ज्यादा माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। ट्रांसपोर्टेशन की कुल लागत का 42 फीसदी हिस्सा सिर्फ ईंधन पर निर्भर करता है। 15 मई के बाद से तेल की कीमतों में जो भारी उछाल आया है, उसने ट्रांसपोर्ट सेक्टर की कमर तोड़ दी है।
श्री सुभाष धीमान और राजबीर सिहँ भारतीय ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा:
“तेल का रेट बढ़ने से माल ढुलाई (ट्रांसपोर्टेशन) का खर्चा बेतहाशा बढ़ रहा है। इसके कारण हर छोटी से छोटी चीज महंगी हो रही है। आज स्थिति यह है कि देश का आम आदमी और मध्यम वर्ग इस बढ़ती महंगाई के आगे त्राहि-त्राहि कर रहा है, लेकिन सरकार मूकदर्शक बनी हुई है।”
जनता पूछे सरकार से सवाल कब तक सहेगी ये मार? – राजबीर सिंह भारतीय
इस पूरे मुद्दे पर समाज के हर वर्ग की आवाज बुलंद करते हुए श्री राजबीर सिंह भारतीय ने रेटिंग एजेंसी ‘क्रिसिल’ (CRISIL) की रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि ईंधन में 7.5 रुपये से 10 रुपये तक की यह बढ़ोतरी खुदरा महंगाई को करीब 0.48 फीसदी तक बढ़ा देगी। इसके कारण दूध, फल, चाय, कॉफी और मसाले जैसी चीजें आम जनता की पहुंच से दूर होती जा रही हैं।
उन्होंने सरकार के सामने जनता के ये मुख्य सवाल रखे:
1. राहत का रोडमैप क्या है? क्या सरकार के पास इस चौतरफा आर्थिक संकट और महंगाई जनित दबाव से आम नागरिकों को बचाने की कोई ठोस योजना है?
2. टैक्स कम क्यों नहीं हो रहे? जब जनता त्रस्त है, तो केंद्र और राज्य सरकारें ईंधन और खाद्य सामग्री पर टैक्स घटाकर तुरंत राहत क्यों नहीं दे रहीं?
3. रोजमर्रा की चीजों पर नियंत्रण कैसे होगा? ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने की वजह से जमाखोरी और कालाबाजारी बढ़ने का खतरा है, इसे रोकने के लिए प्रशासन क्या कदम उठा रहा है?
4. कब तक सहेगी जनता महंगाई की मार? सरकार के पास आम नागरिकों को इस चौतरफा आर्थिक संकट से बचाने की क्या योजना है?
5. राहत कब मिलेगी? क्या सरकार टैक्स कम करके या अन्य उपायों से ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने का प्रयास करेगी, ताकि आम आदमी को तुरंत राहत मिल सके?
श्री राजबीर सिंह भारतीय, सुभाष धीमान, कमलेश देवी और पूजा राय ने संयुक्त रूप से कहा कि सरकार ने तुरंत बढ़ती कीमतों पर लगाम लगानी चाहिए और टैक्स कम करके आम आदमी को राहत देनी चाहिए, वर्ना तो देश की 80-90% जनता का जीना मुहाल और मुश्किल हो जाएगा।
जारी कर्ता ,
राजबीर सिंह भारतीय
समाजसेवी एवं रि. सुपरिंटेंडेंट, ऑफिस ऑफ एडवोकेट जनरल (हरियाणा), चंडीगढ़।
सुभाष धीमान
चेयरमैन, मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन, चंडीगढ़।



