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पीडूज़ पीपल ने तीन घोड़ा-गाड़ी मालिकों को स्वेच्छा से ई-रिक्शा आधारित आजीविका अपनाने में सहायता प्रदान की

पीडूज़ पीपल ने तीन घोड़ा-गाड़ी मालिकों को स्वेच्छा से ई-रिक्शा आधारित आजीविका अपनाने में सहायता प्रदान की

घोड़ों को अभयारण्य में भेजा

 

चण्डीगढ़ : संस्था पीडूज़ पीपल ने तीन घोड़ा-गाड़ी मालिकों को स्वेच्छा से ई-रिक्शा आधारित आजीविका अपनाने में सहायता प्रदान की। यह पहल घोड़ों से गाड़ी खिंचवाने की प्रथा को समाप्त करने और परिवारों के लिए बेहतर आय के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संस्था के पदाधिकारी साहिल ने बताया कि इस पहल के तहत भाग लेने वाले घोड़ा-गाड़ी मालिकों ने अपनी घोड़ा-गाड़ियां ई-रिक्शा से बदल लीं और भविष्य में दोबारा घोड़ा-गाड़ी संचालन न करने का संकल्प लिया। इन घोड़ों को अभयारण्य (सैंक्चुअरी) में भेज दिया गया है, जहां उनकी आजीवन देखभाल की जाएगी और उनसे कभी कोई कार्य नहीं कराया जाएगा।

 

यह परियोजना संदीप पास्से और उनके परिवार के उदार सहयोग से संभव हो सकी। इससे पहले भी उन्होंने इस कार्यक्रम के अंतर्गत पांच ई-रिक्शाओं का वित्तपोषण किया था और अब तीन अतिरिक्त ई-रिक्शाओं का प्रायोजन किया है। उनके निरंतर सहयोग से अधिक घोड़ा-गाड़ी मालिक आधुनिक, विश्वसनीय और मानवीय आजीविका के साधन को अपनाने में सक्षम हुए हैं। इस पहल का उद्देश्य घोड़ा-गाड़ी परिवहन से जुड़ी क्रूरता के चक्र को समाप्त करना है। इसके लिए मालिकों को एक टिकाऊ और सम्मानजनक विकल्प प्रदान किया जा रहा है, साथ ही सेवानिवृत्त घोड़ों को सुरक्षित और आरामदायक जीवन सुनिश्चित किया जा रहा है। पीडूज़ पीपल के प्रतिनिधियों ने कहा कि पशु कल्याण में स्थायी सुधार तभी संभव है जब कामकाजी पशुओं पर निर्भर समुदायों को व्यवहारिक और प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।

 

Ravinder Popli

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