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भारत में पिताओं के योगदान, संघर्षों और अधिकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है : रोहित डोगरा

एसआईएफ-चण्डीगढ़ ने स्नेहालय फॉर बॉयज़ में मनाया फादर्स डे

 

भारत में पिताओं के योगदान, संघर्षों और अधिकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है : रोहित डोगरा

चण्डीगढ़ : फादर्स डे पर सेव इंडियन फैमिली ( एसआईएफ), चण्डीगढ़ चैप्टर के स्वयंसेवकों ने स्नेहालय फॉर बॉयज़, मलोया में रह रहे केयर एवं प्रोटेक्शन की आवश्यकता वाले बच्चों के साथ एक यादगार और भावनात्मक दोपहर बिताई। संस्था के स्थानीय अध्यक्ष रोहित डोगरा ने बताया कि फादर्स डे पूरे विश्व में पिताओं के प्रेम, त्याग, समर्पण और अपने बच्चों के प्रति उनके आजीवन योगदान को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है। भारत में जहां मातृत्व और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा होती है, वहीं पिताओं के योगदान, संघर्षों और अधिकारों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। रोहित डोगरा ने परिवार और बच्चों के जीवन में पिता की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए परिवार कानूनों में आवश्यक सुधार तथा साझा अभिभावकत्व कानून लागू करने की मांग की। रोहित डोगरा ने कहा कि पिता केवल भरण-पोषण या आर्थिक सहायता का साधन नहीं हैं। पिता एक संरक्षक, मार्गदर्शक, शिक्षक, प्रेरक और बच्चे के जीवन का भावनात्मक आधार होते हैं। दुर्भाग्यवश आज के सामाजिक और कानूनी माहौल में अनेक पिताओं को केवल आर्थिक जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित कर दिया गया है, जबकि उन्हें अपने ही बच्चों के जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने से वंचित किया जाता है। उन्होंने कहा कि आज अनेक वैवाहिक विवादों में पिताओं से बच्चों के पालन-पोषण का पूरा खर्च वहन करने की अपेक्षा की जाती है, लेकिन उन्हें अपने बच्चों से नियमित मिलने, बातचीत करने और उनके जीवन में सार्थक भागीदारी का अवसर नहीं दिया जाता। रोहित डोगरा ने कहा कि आजकल अनेक वैवाहिक विवादों में बच्चों को अनजाने में संघर्ष का माध्यम बना दिया जाता है। दुर्भाग्यवश कई मामलों में बच्चों का उपयोग भरण-पोषण, गुजारा भत्ता तथा अभिरक्षा से जुड़े विवादों में दबाव बनाने के साधन के रूप में किया जाता है। ऐसे मामलों में सबसे अधिक नुकसान बच्चे का होता है, जो दोनों अभिभावकों के स्नेह और संतुलित पालन-पोषण से वंचित हो जाता है। रोहित डोगरा ने आगे कहा कि पिताओं को बच्चों से दूर करने की बढ़ती प्रवृत्ति तथा पैरेंटल एलियनेशन एक गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है, जिस पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा की आवश्यकता है। उनके मुताबिक जो समाज मातृत्व का सम्मान करता है लेकिन पितृत्व की उपेक्षा करता है, वह परिवार व्यवस्था में असंतुलन पैदा करता है। एक बच्चे को मां और पिता दोनों की आवश्यकता होती है। माता और पिता प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि बच्चे के जीवन के दो समान स्तंभ हैं।

 

उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाना, उन्हें अपनापन महसूस करवाना तथा उनके भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना था। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर बच्चों और स्वयंसेवकों ने योग एवं प्राणायाम सत्र में भी भाग लिया। इसके बाद बच्चों के साथ लूडो, शतरंज तथा अन्य मनोरंजक खेल खेले गए। स्वयंसेवकों ने बच्चों के साथ समय बिताया, उनकी बातों को सुना, गीत, संगीत, डांस, उनके सपनों और आकांक्षाओं को जाना तथा उन्हें शिक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने तथा टीम भावना को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से स्वयंसेवकों द्वारा बच्चों को बैडमिंटन रैकेट, बास्केटबॉल, रग्बी बॉल, कॉस्को क्रिकेट बॉल, सॉफ्ट लेदर क्रिकेट बॉल तथा अन्य खेल सामग्री उपहार स्वरूप भेंट की गई। उपहार प्राप्त कर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। कार्यक्रम में विशेष फादर्स डे केक कटिंग समारोह, जलपान तथा दोपहर के भोजन का भी आयोजन किया गया। इस पूरे आयोजन का उद्देश्य बच्चों को यह एहसास कराना था कि वे समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं, उनकी खुशियां मायने रखती हैं और उन्हें भी प्रेम, स्नेह, मार्गदर्शन तथा उज्ज्वल भविष्य के समान अवसर मिलने चाहिए। इस कार्यक्रम में महेश कुमार, एम के गुप्ता, अंकुर शर्मा, रविंदर सिंह, जसदीप सिंह, जसमीत सिंह, नवीन कुमार, जसजोत सिंह, संदीप कुमार, हरदीप कुमार, गुरप्रीत सिंह, संजय भंबरी, अमनदीप सिंह, रंजित गुप्ता, साहिल लखनपाल तथा अन्य स्वयंसेवकों ने भाग लिया।

Ravinder Popli

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