डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10 में 95% सरकारी अनुदान के बावजूद नियमों की अनदेखी, नियुक्ति पर विवाद
डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10 में 95% सरकारी अनुदान के बावजूद नियमों की अनदेखी, नियुक्ति पर विवाद
चण्डीगढ़ : नगर प्रशासन की 95% सरकारी अनुदान योजना के अंतर्गत की गई एक नियुक्ति के सामने आने के बाद पद के दुरुपयोग तथा सरकारी राजकोष को हुए भारी वित्तीय नुकसान से जुड़े गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
यह मामला वर्ष 2017 में डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10 में इतिहास विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर की गई नियुक्ति से संबंधित है। आरोप है कि नियुक्त व्यक्ति सुरज नारायण इतिहास (यूजीसी सब्जेक्ट कोड-6) में स्नातकोत्तर नहीं थे, जबकि यूजीसी विनियमों के अनुसार यह इस पद के लिए अनिवार्य योग्यता है। इस आधार पर उन्हें यूजीसी स्तर पर इतिहास पढ़ाने के लिए अयोग्य बताया गया है।
चूंकि यह नियुक्ति 95% सरकारी अनुदान योजना के अंतर्गत की गई थी, इसलिए चंडीगढ़ के आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. राजेन्द्र सिंगला ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2017 से अब तक लगभग ₹60–65 लाख का सरकारी नुकसान हो चुका है। इस संबंध में उन्होंने यूटी चंडीगढ़ के प्रशासक, शिक्षा सचिव, वित्त सचिव, मुख्य सतर्कता अधिकारी तथा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) को शिकायतें भेजी हैं।
सरकारी अनुदान नीति के प्रावधान
पंजाब सरकार की 1979 की सरकारी अनुदान नीति, जिसे चंडीगढ़ प्रशासन ने भी अपनाया है, के अनुसार यदि कोई सहायता-प्राप्त कॉलेज विश्वविद्यालय, यूजीसी या सरकारी मानदंडों का पालन नहीं करता, तो उच्च शिक्षा निदेशक को संबंधित संस्थान का सरकारी अनुदान रोकने, निलंबित करने, घटाने या वापस लेने का अधिकार है।
सीएएस पदोन्नति आवेदन से खुला मामला
यह कथित अनियमितता तब सामने आई जब संबंधित व्यक्ति ने यूजीसी की करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के अंतर्गत पदोन्नति के लिए आवेदन किया। यदि सीएएस के तहत आवेदन नहीं किया जाता, तो यह मामला संभवतः वर्ष 2017 से लगातार बिना किसी जांच के चलता रहता। 16 अगस्त 2024 को पंजाब विश्वविद्यालय की स्क्रीनिंग कमेटी ने सीएएस प्रकरण की जांच के दौरान उनकी योग्यता पर सवाल उठाए। इसके बाद 17 जनवरी 2025 को डीन, कॉलेज डेवलपमेंट काउंसिल (डीसीडीसी), पंजाब विश्वविद्यालय ने यूजीसी से यह स्पष्टता मांगी कि प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व में स्नातकोत्तर डिग्री रखने वाला अभ्यर्थी क्या इतिहास विषय पढ़ा सकता है।
यूजीसी ने दी स्पष्टता
25 सितंबर 2025 को यूजीसी ने अपने उत्तर में स्पष्ट किया कि इतिहास विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए इतिहास (यूजीसी सब्जेक्ट कोड-6) में स्नातकोत्तर होना अनिवार्य है, न कि पुरातत्व (यूजीसी सब्जेक्ट कोड-67) में, क्योंकि दोनों अलग-अलग विषय हैं।
विश्वविद्यालय समिति का निर्णय
इसके बाद 24 नवंबर 2025 को पंजाब विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग की संयुक्त प्रशासनिक एवं अकादमिक समिति ने यह निष्कर्ष दिया कि: सूरज नारायण यूजीसी मानदंडों के अनुसार इतिहास पढ़ाने के लिए अयोग्य हैं।
इतिहास विषय में उनकी सीएएस पदोन्नति अमान्य है।
मामला अभी भी लंबित
इन सभी आधिकारिक निष्कर्षों के बावजूद यह मामला कथित रूप से पिछले दो महीनों से पंजाब विश्वविद्यालय के कॉलेज ब्रांच और कुलपति कार्यालय में लंबित बताया जा रहा है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि दोषियों को बचाने के लिए बाहरी दबाव या प्रभाव काम कर रहे हैं।
नियुक्ति प्रक्रिया पर उठे सवाल
यूजीसी और पंजाब विश्वविद्यालय के चांसलर को भेजी गई शिकायतों में डॉ. राजेन्द्र सिंगला ने सवाल उठाया है कि एक अयोग्य अभ्यर्थी जांच और चयन समितियों से कैसे पार हो गया? उसे तत्कालीन कुलपति से नियुक्ति की स्वीकृति कैसे मिल गई? उन्होंने कहा कि इससे योग्य और मेधावी उम्मीदवारों का अधिकार छिन गया। डॉ. सिंगला ने यह भी मांग की है कि यूटी चंडीगढ़ के निजी-सहायता प्राप्त कॉलेजों, विशेषकर डीएवी कॉलेज, सेक्टर-10, में कार्यरत सभी असिस्टेंट प्रोफेसरों की योग्यता की स्वतंत्र जांच कराई जाए। उनका दावा है कि ऐसी जांच से और भी कई अनियमित नियुक्तियों के मामले सामने आ सकते हैं, खासकर उन मामलों में जहां संबंधित शिक्षक इस प्रकरण के उजागर होने के बाद सीएएस पदोन्नति के लिए आवेदन करने से बचते रहे हैं।



