भगवान श्री कृष्ण जी को इस ग्रीष्म ऋतू की तपिश से शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन की घिसाई करने में जुटे भक्त

चैतन्य गौड़ीय मठ में चंदन यात्रा महोत्सव प्रारंभ
भगवान श्री कृष्ण जी को इस ग्रीष्म ऋतू की तपिश से शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन की घिसाई करने में जुटे भक्त 
चण्डीगढ़ : आज श्री चैतन्य गौड़ीय मठ, सेक्टर 20 चंडीगढ़ में चंदन यात्रा महोत्सव का शुभारंभ त्रिदंडी स्वामी वामन जी महाराज जी के सानिध्य में प्रारंभ हो गया। मठ के प्रवक्ता जयप्रकाश गुप्ता ने बताया कि प्रातः काल मंगल आरती के पश्चात विधिविधान के साथ भगवान श्री कृष्ण जी को इस ग्रीष्म ऋतू की तपिश से शीतलता प्रदान करने के लिए चंदन लेपन के लिए भक्तों ने चंदन की घिसाई प्रारंभ कर दी। सर्वप्रथम साधु संतों मैं चंदन की घिसाई की तत्पश्चात अन्य भक्तों ने चंदन घिसाई का सेवा प्रारंभ की। चंदन घिसने के लिए स्त्रियों के लिए धोती या साड़ी और पुरुषों के लिए धोती कुर्ता पहनना अनिवार्य है। भक्तों को संबोधित करते हुए त्रिदंडी स्वामी वामन महाराज जी ने कहा कि आज से लगभग 550 वर्ष पूर्व ब्रज क्षेत्र में माधविंदर पुरी नामक वैष्णव संत को भगवान कृष्ण ने आदेश दिया कि उनका शरीर गर्मी की ज्वाला से तप रहा है, इसलिए शरीर को शीतलता प्रदान करने के लिए उड़ीसा स्थित माल्या गिरी पर्वत से चंदन लाकर मेरे शरीर में लेपन करो। माधवेंद्र पुरी जी ने उनके आदेश का पालन कर चंदन लेपन का संकल्प लिया। इस परंपरा का पालन करते हुए प्रत्येक वर्ष भगवान श्री कृष्ण जी के शरीर में ग्रीष्म काल में चंदन लेपन 21 दिनों तक किया जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण जी के चंदन लेपन विग्रह के दर्शन करने से कृष्ण भक्ति प्राप्त होती है और घर में सुख शांति समृद्धि आती है क्लेशों का नाश होता है, भक्तों में चंदन घिसने के लिए के लिए इतना उत्साह था की अपनी बारी का इंतजार करते रहे। प्रतिदिन भगवान को चंदन से नई-नई विधि में प्रस्तुत किया जाएगा। सैंकड़ों की संख्या में भक्तों में चंदन लेपित भगवान के दर्शन करने के लिए होड़ लगी रही। भगवान के चंदन को रात्रि विश्राम के बाद उतार दिया जाता है। वह चंदन भक्तों को प्रसाद के रूप में शर्बत बनाकर बांटा जाता है। आज प्रथम दिवस भगवान को स्वादिष्ट व्यंजनों का भोग लगाया गया और भगवान को अर्पित प्रसाद भक्तों में बांटा गया l



