आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकारों की जीत: विक्रम सिंह ने श्रम आयुक्त को पत्र लिखकर नई निविदाओं में ग्रेच्युटी अनिवार्य करने की उठाई मांग।

आउटसोर्स कर्मचारियों के अधिकारों की जीत: विक्रम सिंह ने श्रम आयुक्त को पत्र लिखकर नई निविदाओं में ग्रेच्युटी अनिवार्य करने की उठाई मांग।

चंडीगढ़: 21 अगस्त 2026 : आउटसोर्स और संविदा कर्मचारियों के सामाजिक व वित्तीय अधिकारों के लिए निरंतर आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम सिंह ने आज श्रम आयुक्त, यू.टी. चंडीगढ़ को एक ईमेल के माध्यम से औपचारिक अपील पत्र सौंपा है। पत्र के माध्यम से उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन के सभी विभागों में जारी होने वाली आगामी सेवा निविदाओं (Tenders) में ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 को अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग की है।

यह कदम माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा मेसर्स गुड हाउसकीपिंग की याचिका (CWP No. 22183 of 2018) के दिनांक : 17 / 08 / 2026 को खारिज होने के बाद उठाया गया है। उच्च न्यायालय के फैसले से श्रम न्यायालय के उस आदेश पर मुहर लग गई है, जिसमें आउटसोर्स कर्मचारियों को ग्रेच्युटी भुगतान का स्पष्ट निर्देश दिया गया था। विक्रम सिंह ने मांग की है कि संबंधित एजेंसी को वर्ष 2010 से लेकर अब तक की बकाया राशि का 9% ब्याज दर के साथ एक सप्ताह के भीतर सभी योग्या वर्करों को तत्काल भुगतान कराया जाए।

पत्र में भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा लागू किए जा रहे संशोधित सामाजिक सुरक्षा मानकों का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत आउटसोर्स व संविदा कर्मियों की वित्तीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखा गया है। भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय ने नए श्रम संहिताओं के तहत ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के पात्रता मानदंड में संशोधन किया है, जिससे निरंतर सेवा की योग्यता शर्त 4 साल से कम होकर 1 वर्ष हो गई है।
मामले पर अपनी बात रखते हुए विक्रम सिंह ने कहा: “चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों में वर्षों से निष्ठापूर्वक सेवाएं दे रहे हजारों आउटसोर्स कर्मचारी अब तक पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी के लाभ से अपने मौलिक अधिकारों से वंचित रहे हैं। माननीय उच्च न्यायालय का रुख और श्रम न्यायालय का निर्णय यह स्पष्ट करता है, कि ठेका प्रथा के तहत काम करने वाले कर्मियों को भी सामाजिक सुरक्षा का पूरा अधिकार है।
हमने श्रम आयुक्त से पुरजोर मांग की है कि GeM पोर्टल या अन्य माध्यमों से चुने जाने वाली कंपनी सभी भविष्य की निविदाओं में सभी विभिन्न सरकारी विभागों को एक प्रशासनिक अधिसूचना/आदेश सख्ती से पारित करके ग्रेच्युटी भुगतान की शर्त को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाए, ताकि किसी भी सेवा प्रदाता एजेंसी द्वारा कर्मचारियों के अधिकारों का हनन न हो सके।”
मुख्य मांगे: चंडीगढ़ प्रशासन के सभी विभागों को भविष्य की निविदाओं में एव वर्ष की सेवा पूरी कर चुके वर्करों को ग्रेच्युटी अधिनियम में शामिल करने हेतु बाध्यकारी निर्देश जारी किए जाएं।
GeM पोर्टल या अन्य के माध्यम से ठेका लेने वाली एजेंसियों के लिए अनुबंध दो वर्ष के बाद समाप्ति पर पात्र आउटसोर्स कर्मियों को ग्रेच्युटी देना अनिवार्य हो।
विक्रम सिंह ने उम्मीद जताई है कि चंडीगढ़ प्रशासन और श्रम विभाग इस विषय की गंभीरता को समझते हुए जल्द से जल्द सकारात्मक अधिसूचना जारी करेगा, जिससे हजारों परिवारों को उनका हक और वित्तीय सुरक्षा मिल सके।
जारी कर्ता आवेदक
विक्रम सिंह (मौलिक अधिकारों के प्रति समर्पित आवाज)
चंडीगढ़।



