समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस पर हरियाणा सरकार की रोक
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी से ऊर्जा विभाग ने HERC को जारी किए निर्देश

सरकारी बिजली निगमों, उपभोक्ताओं और क्रॉस सब्सिडी पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर जताई चिंता
Ravinder Popli (tricitinews.com)
चंडीगढ़, 24 अक्टूबर 2026।
हरियाणा सरकार ने प्रदेश में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी से ऊर्जा विभाग ने हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत नीतिगत निर्देश जारी किए हैं। सरकार ने आयोग से हरियाणा में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को बनाने, चालू करने या प्रभावी करने की कार्रवाई नहीं करने को कहा है।
यह कदम उस समय उठाया गया है, जब HERC ने 19 अक्टूबर 2026 को याचिका संख्या 30/2026 में इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को गुरुग्राम और नूंह राजस्व जिलों में 25 वर्षों के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया था। इन क्षेत्रों में पहले से दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (DHBVN) बिजली वितरण का कार्य कर रहा है।
जनहित और सरकारी बिजली निगमों की वित्तीय स्थिति पर चिंता
सरकार ने अपने निर्देशों में कहा है कि समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के संभावित प्रभावों को लेकर राज्य सरकार गंभीर रूप से चिंतित है। सरकार को इस संबंध में आम जनता, किसानों, बिजली उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों के बीच असंतोष एवं आशंकाओं की जानकारी मिली है।
सरकार का मानना है कि बिजली वितरण व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव का आकलन केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि सार्वजनिक हित, उपभोक्ता संरक्षण और राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।
वित्तीय बोझ और क्रॉस सब्सिडी पर चिंता
सरकारी निर्देशों में समानांतर लाइसेंस से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए हैं। इनमें निजी कंपनी द्वारा अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं को चुनिंदा रूप से अपने साथ जोड़ने की आशंका, क्रॉस सब्सिडी पर संभावित प्रभाव, पहले से किए गए बिजली खरीद समझौतों की देनदारियां और मौजूदा वितरण नेटवर्क के दोहराव से होने वाला अतिरिक्त खर्च शामिल हैं।
सरकार ने यह भी चिंता व्यक्त की है कि यदि सरकारी बिजली वितरण निगमों के राजस्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, तो इसका असर मौजूदा उपभोक्ताओं और राज्य की बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है।
कंपनी की पात्रता और तकनीकी क्षमता पर भी सवाल
समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस का विरोध करते हुए राज्य की बिजली कंपनियों और संबंधित संगठनों ने लाइसेंसधारी कंपनी की वित्तीय क्षमता, ऋण चुकाने की विश्वसनीयता, तकनीकी तैयारियों, न्यूनतम आपूर्ति क्षेत्र और सभी उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता से संबंधित सवाल उठाए थे।
सरकार ने इन चिंताओं को अपने नीतिगत निर्णय के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसका वर्तमान कदम HERC के पूर्व आदेश में दर्ज निष्कर्षों की सही या गलत होने की जांच के बजाय सार्वजनिक हित और राज्य की बिजली नीति से संबंधित है।
धारा 108(1) के तहत जारी हुए निर्देश
विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत राज्य सरकार सार्वजनिक हित से जुड़े नीतिगत मामलों में विद्युत विनियामक आयोग को निर्देश दे सकती है। हरियाणा सरकार ने इसी प्रावधान का उपयोग करते हुए आयोग को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के क्रियान्वयन को रोकने के निर्देश दिए हैं।
सरकार ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और आयोग के पूर्व आदेश की समीक्षा के लिए भी कदम उठाने की बात कही है। लाइसेंस की अंतिम कानूनी स्थिति आयोग की आगामी कार्रवाई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त
समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के विरोध में प्रदेश के बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने आंदोलन किया था। सरकार के साथ बातचीत और धारा 108(1) के तहत निर्देश जारी किए जाने के बाद कर्मचारी संगठनों ने 23 अक्टूबर को हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
सरकार ने बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और बिजली कर्मचारियों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। कर्मचारियों की अन्य मांगों पर आगे की बातचीत के लिए 3 नवंबर को बैठक प्रस्तावित की गई है।
उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने हैं?
सरकार के इस कदम से प्रदेश में निजी बिजली वितरण लाइसेंस के मुद्दे पर आगे की कार्रवाई प्रभावित होगी। हालांकि, उपभोक्ताओं की बिजली दरों, कनेक्शन या वितरण व्यवस्था में तत्काल बदलाव के बारे में कोई निष्कर्ष निकालने से पहले आयोग के आगामी आदेशों का इंतजार करना होगा।
हरियाणा सरकार के निर्देशों से यह स्पष्ट है कि फिलहाल राज्य सरकार मौजूदा बिजली वितरण व्यवस्था, सार्वजनिक हित और सरकारी बिजली निगमों की वित्तीय स्थिरता को प्राथमिकता दे रही है।
स्रोत एवं संदर्भ: हरियाणा सरकार के ऊर्जा विभाग द्वारा विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत जारी नीतिगत निर्देशों से संबंधित उपलब्ध दस्तावेज तथा 23 और 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टें।
Ravinder Popli
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