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हिमाचल में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के तहत सुक्खू सरकार के बड़े फैसले, पारदर्शी भर्ती से लेकर डिजिटल सेवाओं तक प्रशासनिक सुधारों पर जोर

हिमाचल कांग्रेस किसान प्रवक्ता जी.एल. शर्मा ने सरकार की पहल को किया उजागर

चंडीगढ़/हिमाचल प्रदेश, 21 अक्टूबर

हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के नारे के तहत प्रशासनिक, वित्तीय और सामाजिक क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाना, सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता लाना, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना और आम जनता तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच आसान बनाना है। भर्ती प्रक्रिया में सुधार से लेकर प्रशासनिक पुनर्गठन, वित्तीय अनुशासन, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक कल्याण तक कई क्षेत्रों में बदलाव की पहल की गई है। इन पहलों से जुड़े मुद्दों को हिमाचल कांग्रेस किसान प्रवक्ता जी.एल. शर्मा ने भी प्रमुखता से उठाया है।

पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पर जोर

भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से पेपर लीक मामलों के बाद हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग (HPSSC) को भंग किया गया। इसके स्थान पर नई भर्ती व्यवस्था लागू करने की पहल की गई, ताकि युवाओं को भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से मुक्त प्रक्रिया के माध्यम से रोजगार के अवसर मिल सकें।

प्रशासनिक पुनर्गठन और नए आयोग का गठन

राज्य की प्रशासनिक इकाइयों, जैसे जिलों, उपमंडलों और तहसीलों की सीमाओं की समीक्षा के लिए प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के गठन की पहल की गई। इसका उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना, जनता की समस्याओं का शीघ्र समाधान करना और सरकारी सेवाओं की पहुंच को बेहतर बनाना है।

अफसरशाही के स्वीकृत पदों में कटौती

राज्य की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने के लिए सरकार ने IAS, IPS और IFS अधिकारियों के स्वीकृत पदों की संख्या में कटौती करने का निर्णय लिया। इस कदम को सरकारी खर्च नियंत्रित करने और प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

वित्तीय अनुशासन और वेतन संबंधी कदम

प्रदेश को कर्ज के दबाव से राहत दिलाने के लिए सरकार ने वित्तीय सुधारों पर जोर दिया। इसके तहत मंत्रियों, विधायकों और वरिष्ठ अधिकारियों के वेतन को कुछ समय के लिए स्थगित करने जैसे कदम उठाए गए, ताकि सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखा जा सके और वित्तीय संसाधनों का उचित प्रबंधन हो।

सचिवालय में समयबद्ध कार्य संस्कृति

सरकारी कामकाज में तेजी और जवाबदेही बढ़ाने के लिए राज्य सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए सुबह 10 बजे तक कार्यालय पहुंचने तथा समय पर उपस्थिति दर्ज करने के नियम लागू किए गए। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों में अनुशासन कायम करना और आम लोगों के कार्यों को समय पर पूरा करना है।

 

डिजिटलीकरण से पारदर्शिता बढ़ाने की पहल

हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड (HPSEBL) सहित विभिन्न विभागों में एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण, स्मार्ट मीटरिंग और ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दिया गया। इन पहलों का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाना, सेवाओं को सुगम करना तथा भ्रष्टाचार और राजस्व के नुकसान को रोकने में मदद करना है।

सामाजिक कल्याण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर ध्यान

सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में अनाथ बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ का दर्जा देकर उनके कल्याण के लिए ‘मुख्यमंत्री सुख-आश्रय योजना’ शुरू की गई। वहीं, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के उद्देश्य से दूध खरीद की दरों में बढ़ोतरी की गई, ताकि पशुपालकों और ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में सहायता मिल सके।

‘व्यवस्था परिवर्तन’ से आत्मनिर्भर हिमाचल का लक्ष्य

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रशासनिक सुधारों, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शी भर्ती, डिजिटल सेवाओं और सामाजिक कल्याण को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। इन पहलों का व्यापक उद्देश्य सरकारी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना, जनता का विश्वास मजबूत करना और हिमाचल प्रदेश को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

हिमाचल कांग्रेस किसान प्रवक्ता जी.एल. शर्मा ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हुए प्रदेश में चल रहे प्रशासनिक सुधारों और जनकल्याणकारी पहलों को जनता तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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