वैश्विक स्वास्थ्य मॉडल को सशक्त बना रहा है ‘भरोसेमंद’ आधार ‘आयुर्वेद’ : डॉ. गौरव गर्ग, उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस), राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला


पंचकूला : “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्” अर्थात स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोगों का निवारण। आयुर्वेद में स्वस्थ्य जीवन का मंत्र निहित है। भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति तनाव, उच्च रक्तचाप (बीपी) और शुगर जैसी बीमारियों से जूझ रहा है। ऐसे में पूरी दुनिया आयुर्वेद के रोग नियंत्रक मंत्र की ओर बढ़ रही है। ये कहना है उप चिकित्सा अधीक्षक (डीएमएस), राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला के डॉ. गौरव गर्ग का, जिन्होंने 7 अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में विशेष व्यक्तव्य जारी किया। 
उन्होंने कहा कि आज आयुर्वेद केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों के महत्व को स्वीकारा है। दुनिया के कई देशों में आयुर्वेदिक उपचार और वेलनेस केंद्र तेजी से बढ़ रहे हैं। लोग अब प्राकृतिक और समग्र स्वास्थ्य की ओर लौट रहे हैं। इसी कड़ी में आयुष मंत्रालय, भारत सरकार के तत्वाधान में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान, पंचकूला कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) संजीव शर्मा और डीन प्रोफेसर गुलाब चंद पमनानी के मार्गदर्शन में व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा और रोगी के रोगों का निवारण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
21वीं सदी में विज्ञान और तकनीक ने स्वास्थ्य सेवाओं को शिखर तक पहुंचाया है, लेकिन नई चुनौतियां भी खड़ी की हैं, जोकि मानव जीवन को प्रभावित कर रही हैं। यूं भी कह सकते हैं, जिस तेजी से इलाज के साधन बढ़ रहे हैं, उतनी ही गति से बीमारियों की जकड़न मजबूत हो रही है। बिगड़ती जीवन शैली के चलते मानसिक तनाव, शुगर और बीपी की समस्या आम हो गई है। ऐसे में आयुर्वेद पंरपरा एक सशक्त समाधान बनकर उभर रही है। यह ऐसा समाधान है जो हजारों वर्षों के अनुभव, प्रकृति ज्ञान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अनूठा संगम है, जोकि बीमारियों का समाधान देने के साथ यह भी चेतावनी दे रहा है कि स्वास्थ्य केवल दवाइयों से नहीं, बल्कि जीवन के संतुलन से बनता है, क्योंकि आयुर्वेद में हर व्यक्ति को अलग माना जाता है। उसकी प्रकृति, खान-पान, दिनचर्या और मानसिक स्थिति के आधार पर उपचार निर्धारित किया जाता है। आधुनिकता के दौर में इसे “पर्सनलाइज्ड मेडिसिन” नाम दिया गया है।
हर वर्ष 7 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व स्वास्थ्य दिवस पूरी दुनिया को स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदारी निभाने के लिए सचेत करता है। इस बार विश्व स्वास्थ्य दिवस-2026 का थीम “स्वास्थ्य के लिए एकजुटता-विज्ञान पर भरोसा” (स्वास्थ्य के लिए साथ–विज्ञान के साथ खड़े हों) इस दिशा में आयुर्वेद सबसे विश्वनीय है, क्योंकि स्वास्थ्य के लिए एकजुट होना और विज्ञान के साथ खड़ा होना अब विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है, इस सार्थकता को पूरा करने में आयुर्वेद सशक्त आधार बन रहा है। यह एक ऐसा आधार है जो न केवल रोगों का उपचार करता है, बल्कि जीवन जीने का सही रास्ता भी प्रशस्त कर रहा है।
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान रोगों के लक्षणों को नियंत्रित करने पर केंद्रित है, वहीं आयुर्वेद शरीर में बीमारियों के मूल कारणों को समझकर रोगी के रोगों का निवारण को प्राथमिकता देता है। आयुर्वेद में त्रिदोष सिद्धांत वात, पित्त और कफ के आधार पर व्यक्ति के प्रकृति का विश्लेषण उपचार किया जाता है। लिहाजा, आधुनिक चिकित्सा और आयुर्वेद के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ सस्ती और सुलभ प्रभावी पद्धतियों के साथ यदि मानवता को स्वस्थ, संतुलित और सुरक्षित भविष्य चाहिए तो उसे आयुर्वेद के ज्ञान और विज्ञान की शक्ति को अपनाना होगा।
आयुर्वेद में दिनचर्या और ऋतुचर्या का विशेष महत्व है, जिसमें सुबह जल्दी उठना, समय पर भोजन करना, मौसमी और संतुलित आहार लेना तथा नियमित योग और ध्यान करने पर जोर दिया गया है। इन प्राकृतिक उपायों से न केवल शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है, बल्कि मन और इंद्रियां भी स्थिर और सकारात्मक बनती हैं। ये उपाय शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। आयुर्वेद का मूल मंत्र है, बीमारी को आने ही न देना।
आयुर्वेद का सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांत है-प्रकृति के साथ सामंजस्य। आज जब प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और रासायनिक जीवनशैली स्वास्थ्य पर असर डाल रही हैं। मसलन, शारीरिक स्वास्थ्य के लिए लोग आयुर्वेद उपचार की ओर कदम बढ़ रहे हैं। शुद्ध भोजन, स्वच्छ जल, ताजी हवा और प्राकृतिक जीवनशैली, ये सभी अच्छे स्वास्थ्य के आधार माने गए हैं, जिनको आयुर्वेद में प्राथमिकता दी गई है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक स्तर पर आयुर्वेद की स्वीकार्यता बढ़ रही है, जोकि भारत के लिए गर्व की बात है कि उसका प्राचीन ज्ञान आज वैश्विक स्वास्थ्य प्रणाली को दिशा दे रहा है।
विश्व स्वास्थ्य दिवस 2026 थीम “विज्ञान के साथ खड़े हों” आयुर्वेद की प्रांसगिकता को मजूबत करता है, क्योंकि आज अश्वगंधा, तुलसी, हल्दी, गिलोय जैसी औषधियों पर वैज्ञानिक शोध हो रहे हैं, जो इनके प्रभाव को प्रमाणित कर रहे हैं। इम्युनिटी बढ़ाने, सूजन कम करने, मानसिक तनाव घटाने और शरीर को संतुलित रखने में इनकी भूमिका अब वैश्विक स्तर पर स्वीकार की जा रही है। आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, बल्कि एक प्रमाणित और वैज्ञानिक चिकित्सा प्रणाली है।



