फोर्टिस मोहाली में घुटने की गंभीर बीमारी से पीड़ित घुटने के नीचे से पैर कटे मरीज की सफल घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी

फोर्टिस मोहाली में घुटने की गंभीर बीमारी से पीड़ित घुटने के नीचे से पैर कटे मरीज की सफल घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी
व्यापक जांच और सावधानीपूर्वक सर्जरी की योजना बनाकर डॉ. गगन दीप गुप्ता ने मरीज के पैर की स्थिरता और काम करने की क्षमता को फिर से बेहतर किया।

हमीरपुर, 8 सितंबर 2026: फोर्टिस अस्पताल मोहाली के ऑर्थोपेडिक्स विभाग ने 45 वर्षीय एक ऐसे मरीज का सफल इलाज किया है, जिसका दायां पैर पहले घुटने के नीचे से काटना पड़ा था। इस प्रक्रिया में पैर का निचला हिस्सा, जिसमें पैर का पंजा और टखना शामिल है, निकाल दिया गया था, लेकिन घुटने का प्राकृतिक जोड़ सुरक्षित था।
इस मरीज को घुटने के जोड़ में बहुत ज्यादा ऑस्टियोआर्थराइटिस (घुटने की गंभीर घिसावट) हो गई थी। इसके कारण उसे लगातार दर्द, अकड़न और चलने में परेशानी हो रही थी। मरीज की टोटल नी रिप्लेसमेंट (टीकेआर) सर्जरी की गई।
यह मामला इसलिए खास है क्योंकि इससे पता चलता है कि पैर की जटिल समस्या वाले मरीजों में भी सही जांच, योजना और सावधानी के साथ घुटने का प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया जा सकता है।

मरीज के दाएं पैर को पहले घुटने के नीचे से काटना पड़ा था। इसके कारण उसके पैर की सामान्य बनावट और शरीर का वजन पैर पर पड़ने का तरीका बदल गया था। समय के साथ उसके घुटने में गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस हो गया। उसे लगातार दर्द और अकड़न रहती थी और चलने में भी काफी दिक्कत होती थी।
दर्द से परेशान होकर मरीज ने हाल ही में फोर्टिस अस्पताल मोहाली के ऑर्थोपेडिक्स और जॉइंट रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. गगन दीप गुप्ता से संपर्क किया।
डॉक्टरों की टीम ने सामान्य घुटना बदलने की प्रक्रिया के बजाय मरीज की स्थिति के अनुसार विशेष सर्जरी योजना तैयार की। डॉ. गुप्ता ने सफलतापूर्वक टीकेआर सर्जरी की। सर्जरी के दौरान हड्डी को सही तरीके से तैयार करने, घुटने के इम्प्लांट को सही जगह लगाने, पैर की सही दिशा बनाए रखने, लिगामेंट्स का संतुलन बनाने और घुटने को स्थिर करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
सर्जरी का उद्देश्य केवल घुटने के दर्द को कम करना नहीं था, बल्कि घुटने को इतना मजबूत और कार्यशील बनाना भी था कि मरीज अपने बचे हुए पैर और कृत्रिम पैर (प्रोस्थेटिक सपोर्ट) का अधिकतम उपयोग कर सके।
सर्जरी के बाद मरीज को डॉक्टरों की निगरानी में रिहैबिलिटेशन यानी फिजियोथेरेपी और चलने-फिरने की विशेष प्रक्रिया कराई गई। सर्जरी के पांच दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अब वह पूरी तरह ठीक हो चुका है और सामान्य जीवन जी रहा है।
मामले के बारे में जानकारी देते हुए डॉ. गगन दीप गुप्ता ने कहा कि यह टीकेआर सर्जरी चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि मरीज का पैर घुटने के नीचे से कटा हुआ था। सामान्य घुटना बदलने की सर्जरी में जिन प्राकृतिक हड्डियों और शरीर की बनावट के संकेतों का हम इस्तेमाल करते हैं, वे इस मरीज में काफी बदल चुके थे। ऐसे मामलों में सामान्य सर्जरी की योजना और तकनीक को मरीज की स्थिति के अनुसार बहुत सावधानी से बदलना पड़ता है।
डॉ. गुप्ता ने आगे कहा कि सामान्य पैर में सर्जन हड्डियों की प्राकृतिक बनावट और सामान्य उपकरणों की मदद से घुटने के इम्प्लांट की सही दिशा और स्थिति तय कर सकता है। लेकिन जिस पैर का कुछ हिस्सा काट दिया गया हो, उसमें ये सामान्य संकेत बदल जाते हैं या मौजूद नहीं होते। इसलिए पैर की सही दिशा और इम्प्लांट की सही स्थिति तय करना काफी मुश्किल हो जाता है।
पैर के निचले हिस्से के न होने से घुटने पर पड़ने वाला वजन और घुटने के काम करने का तरीका भी बदल जाता है। इसके बावजूद सर्जरी सफल रही और अब मरीज आसानी से चल पा रहा है। पूरी जांच और सावधानीपूर्वक सर्जरी की योजना के कारण मरीज के पैर की स्थिरता और कार्यक्षमता को दोबारा हासिल किया जा सका।
डॉ. गगन दीप गुप्ता फोर्टिस अस्पताल, मोहाली में रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण सर्जन हैं और उन्हें 1,600 घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी करने का अनुभव है।



