सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड कर्मियों की हड़ताल पर सरकार की चुप्पी क्यों? : राजबीर सिंह भारतीय

Chandigarh: 7.9.26
कोरोना में फूलों से स्वागत पाने वाले कोरोना योद्धा आज सड़कों पर क्यों?
सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड कर्मियों की हड़ताल पर सरकार की चुप्पी क्यों? : राजबीर सिंह भारतीय

सरकार बताए—जो कर्मचारी वर्षों से सेवा कर रहे हैं, उन्हें पक्का करने और उचित पदों पर समायोजित करने में आखिर दिक्कत क्या है?
चंडीगढ़।

ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-13 चंडीगढ़ के संस्थापक एवं अध्यक्ष और एडवोकेट जनरल हरियाणा हाई कोर्ट चंडीगढ़ के सेवानिवृत्त सुपरिटेंडेंट राजबीर सिंह भारतीय ने हरियाणा में सफाई कर्मचारियों और फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के लंबे समय से चल रहे आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से सीधे सवाल किया है कि कोरोना महामारी के दौरान जिन कर्मचारियों को कोरोना योद्धा और सफाई सैनिक कहकर सम्मानित किया गया था, आज उन्हीं कर्मचारियों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है?

उन्होंने कहा कि कोरोना काल को आज प्रशासन और समाज शायद भूल चुका है। जब पूरा समाज अपने घरों में सुरक्षित बैठा था, बाजार बंद थे, सड़कों पर सन्नाटा था और लोग अपने जीवन को लेकर भयभीत थे, उस समय सफाई कर्मचारी और फायर ब्रिगेड के कर्मचारी अपनी जान की परवाह किए बिना जनता की सेवा में डटे हुए थे। सफाई कर्मचारियों ने शहरों और गांवों को संक्रमण से बचाने के लिए सफाई व्यवस्था संभाली, जबकि फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने आपात परिस्थितियों में अपनी सेवाएं जारी रखीं।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि उस समय इन कर्मचारियों के सम्मान में फूलों की वर्षा की गई, उनका स्वागत किया गया और कई जगह उनके पैर तक धोए गए। उन्हें कोरोना योद्धा कहा गया। लेकिन आज वही कोरोना योद्धा अपने भविष्य, नौकरी की सुरक्षा और पक्की नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है?
सरकार से राजबीर सिंह भारतीय के 7 सीधे सवाल:
1. जब कर्मचारी वर्षों से लगातार सरकार और जनता की सेवा कर रहे हैं, तो उन्हें पक्का करने में आखिर दिक्कत क्या है?
2. यदि सरकार को आज भी इन कर्मचारियों की सेवाओं की आवश्यकता है, तो उन्हें वर्षों तक कच्चा और अस्थायी कर्मचारी बनाकर क्यों रखा जा रहा है?
3. यदि स्वीकृत पद उपलब्ध हैं और उन्हीं पदों पर कर्मचारी काम कर रहे हैं, तो नियमितीकरण का रास्ता क्यों नहीं निकाला जा रहा?
4. यदि पहले की सरकारों के समय लंबे समय तक सेवाएं देने वाले कर्मचारियों को नियमित किया गया है, तो वर्तमान कर्मचारियों के लिए वही नीति लागू करने में क्या बाधा है?
5. फायर ब्रिगेड जैसी आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी यदि हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं, तो सरकार ने समय रहते उनकी समस्याओं का समाधान क्यों नहीं किया?
6. क्या कोरोना काल में इन कर्मचारियों को दिया गया “कोरोना योद्धा” का सम्मान केवल उस समय की जरूरत थी, या सरकार आज भी उनके योगदान को उतना ही महत्वपूर्ण मानती है?
7. जब इन कर्मचारियों की सेवाएं जनता की सुरक्षा और जीवन से सीधे जुड़ी हैं, तो उनके भविष्य को असुरक्षित रखकर सरकार किस प्रकार की व्यवस्था स्थापित करना चाहती है?
8. आवश्यक सेवा के कर्मचारियों को आंदोलन की नौबत क्यों?
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि फायर ब्रिगेड जैसे विभाग जनता की जान और संपत्ति की सुरक्षा से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग हैं और आवश्यक सेवाओं के अंतर्गत आने वाली सेवाओं के कर्मचारियों को भी यदि अपनी जायज मांगों के लिए आंदोलन और हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ रहा है, तो सरकार को आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कर्मचारी हड़ताल पर बैठना नहीं चाहते। कोई भी कर्मचारी अपना वेतन और काम छोड़कर सड़क पर बैठना नहीं चाहता। जब बार-बार अपनी मांगें सरकार और प्रशासन के सामने रखने के बावजूद समाधान नहीं निकलता, तभी आंदोलन की स्थिति पैदा होती है। सरकार को कर्मचारियों को धमकाने या आंदोलन को दबाने के बजाय बातचीत की मेज पर बैठकर समाधान निकालना चाहिए।
पक्का करना ही क्यों हो प्रमुख मांग?
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि सफाई कर्मचारियों की सबसे महत्वपूर्ण मांगों में नियमितीकरण यानी पक्का किया जाना शामिल है। उन्होंने कहा कि जिस कर्मचारी ने वर्षों तक अपनी जवानी सरकार की सेवा में लगा दी, उसके सामने हर समय नौकरी जाने का डर बना रहे, यह सामाजिक न्याय नहीं है।
“एक तरफ सरकार कहती है कि कर्मचारी हमारे परिवार का हिस्सा हैं और दूसरी तरफ उसी परिवार के सदस्य को वर्षों तक अस्थायी रखकर उसके भविष्य को अनिश्चित बना दिया जाता है—यह दोहरा रवैया क्यों?”
उन्होंने कहा कि नियमितीकरण के साथ कर्मचारियों की उचित पदों पर एडजस्टमेंट/समायोजन, सेवा सुरक्षा, वेतन एवं अन्य जायज सेवा संबंधी मांगों पर भी सरकार को सकारात्मक और स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।
फूल नहीं, अब अधिकार चाहिए:
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि कोरोना योद्धाओं को अब केवल फूलों की जरूरत नहीं है।
“जिन हाथों में कोरोना काल में झाड़ू थी, उन हाथों को आज सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार चाहिए। जिन हाथों ने आग बुझाई और लोगों की जान बचाई, उन हाथों को अपने भविष्य की चिंता नहीं होनी चाहिए।”
उन्होंने कहा कि कोरोना योद्धाओं का वास्तविक सम्मान स्थायी नौकरी, सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और नौकरी की गारंटी देने से होगा, न कि केवल समारोहों में सम्मानित करने से।
महिला कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा की भी गारंटी हो:
राजबीर सिंह भारतीय ने महिला सफाई कर्मचारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटनाओं पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ऐसी कोई घटना हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी महिला कर्मचारी का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता और सरकार को आंदोलनरत कर्मचारियों की सुरक्षा एवं सम्मान की भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।
सरकार टकराव नहीं, समाधान का रास्ता अपनाए:
राजबीर सिंह भारतीय ने हरियाणा सरकार से मांग की कि कर्मचारियों के साथ टकराव की नीति छोड़कर तत्काल बातचीत शुरू की जाए। उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखीं:
वर्षों से कार्यरत कच्चे कर्मचारियों को नियमित/पक्का करने की ठोस नीति बनाई जाए।
कर्मचारियों को उनकी योग्यता एवं कार्य के अनुरूप उचित पदों पर समायोजित किया जाए।
उनकी अन्य जायज सेवा संबंधी मांगों का समयबद्ध समाधान किया जाए।
आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के साथ बातचीत के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए।
महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
कर्मचारियों को आंदोलन करने के लिए मजबूर करने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान बातचीत से किया जाए।
अंत में राजबीर सिंह भारतीय ने कहा—
“कोरोना के समय जिस समाज ने सफाई कर्मचारियों के पैर धोए थे, आज उसी समाज और सरकार को उनके अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़ा होना चाहिए। फूलों से सम्मान करना आसान है, लेकिन किसी कर्मचारी को उसके अधिकार देना ही असली सम्मान है।”
उन्होंने कहा कि सरकार को अब फैसला करना होगा कि वह कोरोना योद्धाओं को केवल संकट के समय याद करेगी या उनके पूरे जीवन और परिवार के भविष्य की भी जिम्मेदारी निभाएगी।
बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी के विचारों को याद करते हुए उन्होंने कहा—
“अंतिम छोर पर बैठे हर एक आदमी तक सामाजिक न्याय और बुनियादी सुविधा मिले, यही हमारे महान संविधान का मुख्य संकल्प है। मेहनतकशों के अधिकारों की रक्षा करना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।”
राजबीर सिंह भारतीय
संस्थापक एवं अध्यक्ष
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन
सेक्टर-13, चंडीगढ़ एवं रि. सुपरिटेंडेंट ऑफिस आफ एडवोकेट जनरल हरियाणा, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट चंडीगढ़।

