चौथा स्तंभ तभी मजबूत रहेगा, जब पत्रकार को सवाल पूछने की आजादी होगी : राजबीर सिंह भारतीय

चंडीगढ़/ 6.9.29
लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनावों से नहीं होती, बल्कि जनता की आवाज को सत्ता तक पहुंचाने वाली स्वतंत्र संस्थाओं से होती है। इन्हीं संस्थाओं में ईमानदार और निष्पक्ष पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा गया है। पत्रकारिता केवल खबर दिखाने या छापने का माध्यम नहीं, बल्कि मजलूम, मजबूर और आम नागरिक की आवाज को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

यह विचार राजबीर सिंह भारतीय, प्रधान, ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सैक्टर-13, चंडीगढ़ ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि भारत की आजादी से पहले और आजादी के बाद भी पत्रकारिता ने समाज को जागरूक करने, सत्ता से सवाल पूछने और जनता के अधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सच्ची पत्रकारिता किसी सरकार या राजनीतिक दल की समर्थक या विरोधी नहीं होती, बल्कि वह जनता के पक्ष में खड़ी होती है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि पत्रकार का दायित्व केवल सरकार की उपलब्धियां बताना नहीं है, बल्कि यह पूछना भी है कि जनता की समस्याओं का समाधान क्यों नहीं हुआ, किए गए वादे कितने पूरे हुए, गरीब, किसान, मजदूर, कर्मचारी, महिलाएं और आम नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर आज भी संघर्ष क्यों कर रहे हैं। इसी प्रकार पत्रकारिता का दायित्व विपक्ष से भी सवाल पूछना है, ताकि लोकतंत्र में जवाबदेही बनी रहे।

उन्होंने कहा कि जिस दिन पत्रकारिता जनहित के सवाल उठाना बंद कर देगी, उस दिन लोकतंत्र कमजोर होने लगेगा। किसी भी मीडिया संस्थान पर यदि दबाव, भय, लालच या स्वार्थ हावी हो जाए और जनहित के मुद्दे दबने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय है। पत्रकारिता का धर्म सत्ता के सामने झुकना नहीं, बल्कि जनहित में सत्ता से सवाल पूछना है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि हाल ही में दिल्ली के साकेत क्षेत्र में महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान द्वारा लगाए गए आरोपों तथा पुलिस के पक्ष के सामने आने के बाद यह आवश्यक हो गया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करवाई जाए, ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न किसी पक्ष को बिना जांच दोषी ठहराना उचित है और न ही किसी शिकायत को बिना जांच खारिज करना उचित है।
उन्होंने जंतर-मंतर का काकरोच अंदोलन, नीट परीक्षा पेपर लीक अंदोलन, हिसार, हांसी के चैनत और लगभग सवा साल के किसान आंदोलन के दौरान पत्रकारों के सामने आई परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता किसी एक दल, सरकार या विचारधारा का विषय नहीं, बल्कि पूरे लोकतंत्र और जनता के अधिकारों का विषय है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि आज सोशल मीडिया ने भी जनहित के मुद्दों को उठाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अनेक स्वतंत्र पत्रकार, वीडियो पत्रकार, यु-ट्युबर और नागरिक पत्रकार ऐसे विषयों को सामने लाते हैं, जिन्हें कई बार बड़े मीडिया संस्थानों में पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। सोशल मीडिया ने लोकतंत्र में संवाद और जनभागीदारी को नई ताकत दी है।
उन्होंने कहा कि यदि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, तो उसे स्वतंत्र रूप से काम करने का वातावरण भी मिलना चाहिए। पत्रकार सरकार से सवाल पूछे तो उसे सरकार विरोधी न कहा जाए, विपक्ष से सवाल पूछे तो उसे किसी दल का समर्थक न कहा जाए और यदि पत्रकार जनता की समस्याएं उठाए तो उसकी आवाज को दबाने के बजाय समस्याओं का समाधान किया जाए।
राजबीर सिंह भारतीय ने सरकार और प्रशासन से ये मांगें कीं—
पत्रकारों की सुरक्षा और स्वतंत्रता सुनिश्चित की जाए।
दिल्ली की घटना एवं अन्य घटनाओं की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई की जाए।
जनहित के मुद्दे उठाने वाले स्वतंत्र और सोशल मीडिया पत्रकारों को भी सुरक्षित वातावरण दिया जाए।
सरकारें और प्रशासन पत्रकारों द्वारा उठाए गए जनहित के प्रश्नों पर गंभीरता से विचार करें।
अंत में राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि लोकतंत्र की खूबसूरती इसी में है कि पत्रकार सवाल पूछे, सरकार जवाब दे, विपक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाए और जनता अंतिम निर्णायक बने।
उन्होंने कहा कि “यदि सवाल पूछने वाले डर जाएंगे, खबर दिखाने वाले चुप हो जाएंगे और जनता की आवाज उठाने वाले दबा दिए जाएंगे, तो लोकतंत्र केवल चुनावों तक सीमित होकर रह जाएगा।”
या तो पत्रकारिता को चौथा स्तंभ कहना बंद कर दीजिए, या फिर इस चौथे स्तंभ को स्वतंत्र होकर खड़ा रहने दीजिए।
— राजबीर सिंह भारतीय
प्रधान
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सैक्टर-13, चंडीगढ़


