उपभोक्ता आयोग का आदेशः ओमैक्स को दो महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा सौंपने के निर्देश
9% वार्षिक ब्याज, ₹ 75,000 मुआवजा और ₹ 35,000 मुकदमे का खर्च देने का आदेश

शिकायतकर्ता सुनील चौधरी ने वर्ष 2018 में फ्लैट नंबर टीएलसी/एमराल्ड-सी/सेवंथ/703 बुक कराया था और बिक्री मूल्य के रूप में लगभग ₹ 58.07 लाख का भुगतान किया था। फ्लैट का कब्जा 31 जुलाई 2021 तक देने का वादा किया गया था, लेकिन कोविड-19 के कारण दी गई अनुमत अतिरिक्त अवधि समाप्त होने के बाद भी उन्हें फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया।
आयोग ने अपने 15 अक्टूबर के आदेश में कहा कि कब्जा देने में लंबे समय तक हुई और उचित कारणों से स्पष्ट न की गई देरी सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार के समान है। आयोग ने बिल्डर की उन आपत्तियों को भी खारिज कर दिया कि शिकायतकर्ता केवल निवेशक है और शिकायत निर्धारित समय सीमा के बाद दायर की गई है।
आयोग ने सभी विपक्षी पक्षों को संयुक्त रूप से और पृथक-पृथक रूप से निम्नलिखित निर्देश दिए हैं, दो महीने के भीतर फ्लैट का वास्तविक कब्जा सौंपनाः आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने से दो महीने के भीतर फ्लैट का कब्जा सभी आवश्यक कार्य पूरे करके तथा सक्षम प्राधिकरणों से अधिभोग प्रमाणपत्र और अंतिम पूर्णता प्रमाणपत्र प्राप्त करने के बाद सौंपा जाए। शिकायतकर्ता को समझौते में निर्धारित बिक्री मूल्य के अनुसार शेष राशि का भुगतान करना होगा। उससे विलंबित भुगतान का कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
30 अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2026 तक 9% वार्षिक ब्याज, शिकायतकर्ता से प्राप्त संपूर्ण बिक्री राशि पर उक्त अवधि के लिए 9% वार्षिक ब्याज के बराबर मुआवजा दिया जाए। इसका भुगतान आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर करना होगा। ऐसा न करने पर संचित मुआवजा राशि पर चूक की तारीख से भुगतान होने तक 12% वार्षिक ब्याज देना होगा।
1 अक्टूबर 2026 से आगे भी 9% वार्षिक ब्याजः फ्लैट का कब्जा सौंपने संबंधी निर्देशों का पालन होने तक शिकायतकर्ता से प्राप्त संपूर्ण बिक्री राशि पर 9% वार्षिक ब्याज की दर से मुआवजा दिया जाता रहेगा। यह भुगतान प्रत्येक आगामी महीने की 10 तारीख तक किया जाना है।
₹ 75,000 मानसिक उत्पीड़न के लिए तथा ₹ 35,000 मुकदमे के खर्च के रूप में: मानसिक परेशानी, उत्पीड़न, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए ₹ 75,000 तथा मुकदमे के खर्च के रूप में ₹ 35,000 का भुगतान प्रमाणित प्रति प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर करना होगा। भुगतान में चूक होने पर इन राशियों पर चूक की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
इस मामले में आदेश न्यायमूर्ति राज शेखर अत्री, अध्यक्ष, तथा प्रीतिंदर सिंह, सदस्य, राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, चंडीगढ़ द्वारा सुनाया गया।
इस मामले की शिकायत तैयार करने, कानूनी तथ्यों को व्यवस्थित करने तथा आयोग के समक्ष शिकायतकर्ता की ओर से पैरवी करने का कार्य एन. के. झिंगन, महासचिव, कंज्यूमर्स एसोसिएशन, चंडीगढ़, ने शिकायतकर्ता के अधिकृत प्रतिनिधि के रूप में किया।
यह निर्णय दर्शाता है कि उपभोक्ता संगठनों की सहायता से घर खरीदने वाले उपभोक्ता कब्जा देने में अनुचित देरी के विरुद्ध अपने अधिकारों के लिए कानूनी उपाय अपना सकते हैं। बिल्डरों द्वारा निर्धारित समय पर मकान का कब्जा न देने की स्थिति में उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत राहत प्राप्त करने का रास्ता उपलब्ध है।
एन. के. झिंगन के अनुसार, यह निर्णय इस सिद्धांत को मजबूत करता है कि अपने घर के लिए बड़ी राशि का भुगतान कर चुके खरीदारों को अनिश्चितकाल तक कब्जे की प्रतीक्षा करने के लिए विवश नहीं किया जाना चाहिए। कंज्यूमर्स एसोसिएशन, चंडीगढ़, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार से प्रभावित उपभोक्ताओं को न्याय दिलाने के लिए अपना प्रयास जारी रखेगी।
एन.के. झिंगन, महासचिव
कंज्यूमर्स एसोसिएशन, चंडीगढ़
मोबाइल: 9417004937
