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चुनाव नजदीक आते ही ‘बरसाती मेंढकों’ की तरह बाहर आए चुनावी नेता: तलविंदर सिंह

Dated: 9 September 2026

चुनाव नजदीक आते ही ‘बरसाती मेंढकों’ की तरह बाहर आए चुनावी नेता: तलविंदर सिंह

“पांच साल जनता की याद नहीं आई, अब रोज हो रहे उद्घाटन—जहाँ जरूरत नहीं वहाँ भी उखाड़ी जा रही अच्छी टाइलें”

चंडीगढ़। आगामी नगर निगम चुनावों को लेकर शहर में बढ़ती राजनीतिक गतिविधियों के बीच वार्ड नंबर 6, मनीमाजरा के प्रधान एवं समाजसेवी तलविंदर सिंह ने चुनावी मौसम में अचानक सक्रिय हुए नेताओं और विकास कार्यों की प्राथमिकता को लेकर तीखा कटाक्ष किया है।

 

तलविंदर सिंह ने कहा कि चुनाव अब ज्यादा दूर नहीं हैं और लगभग तीन महीने के भीतर चुनावी माहौल पूरी तरह गर्म होने वाला है। ऐसे में वर्षों तक वार्डों से दूर रहे कई चुनावी नेता अब बरसाती मेंढकों की तरह बाहर निकल आए हैं।

उन्होंने कहा कि जिन जनप्रतिनिधियों को जनता ने पांच साल के लिए चुना था, उनमें से कई पूरे कार्यकाल के दौरान वार्ड की समस्याओं और जनता की परेशानियों से दूर रहे। “पांच साल तक वार्ड में झांकने का समय नहीं था, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही अचानक जनता, सड़कें, गलियां, सीवर और विकास सब याद आने लगा है।”

पांच साल के काम अब तीन महीने में याद क्यों आए?

तलविंदर सिंह ने कहा कि इन दिनों शहर के अलग-अलग वार्डों में लगातार नए उद्घाटन किए जा रहे हैं। कहीं सड़क का उद्घाटन, कहीं गली का, कहीं सीवर लाइन का तो कहीं अन्य विकास कार्यों के उद्घाटन किए जा रहे हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि “अगर ये काम जनता के लिए इतने जरूरी थे तो इन्हें पूरे पांच साल में क्यों नहीं करवाया गया? चुनाव से ठीक पहले ही इन कार्यों की याद क्यों आई?”

उन्होंने कहा कि जनता को अब केवल उद्घाटन के पत्थर, नारियल और फोटो नहीं चाहिए, बल्कि वास्तविक और स्थायी विकास चाहिए।

“अच्छी टाइलें उखाड़कर नई लगाना विकास है या जनता के पैसे की बर्बादी?”

तलविंदर सिंह ने विकास कार्यों की प्राथमिकता पर विशेष रूप से सवाल उठाते हुए कहा कि कई स्थानों पर पहले से लगी टाइलें अच्छी स्थिति में हैं, फिर भी उन्हें उखाड़कर दोबारा नई टाइलें लगाई जा रही हैं।

उन्होंने कहा, “जहाँ टाइलें पहले से ठीक हैं, वहाँ उन्हें उखाड़कर दोबारा लगाने का क्या औचित्य है? अगर जनता का पैसा खर्च करना ही है तो उन जगहों पर किया जाए जहाँ वास्तव में जरूरत है। कई इलाकों में सड़कें, गलियां और सीवर की समस्याएं आज भी लोगों के लिए परेशानी बनी हुई हैं, लेकिन उन पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।”

उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि “शायद मकसद काम पूरा करना नहीं, बल्कि चुनाव से पहले काम का उद्घाटन करके फोटो खिंचवाना और वाहवाही लूटना है। वरना जिस काम की वास्तविक जरूरत नहीं है, उस पर पैसा खर्च करने का तर्क जनता को कौन देगा?”

“काम कम, चुनावी जुमला ज्यादा?”

तलविंदर सिंह ने कहा कि चुनावी घोषणा के बाद आचार संहिता लागू होते ही ऐसे कई कार्यों और नई घोषणाओं पर विराम लग जाएगा। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले शुरू किए जा रहे कार्यों को लेकर जनता को भी सवाल पूछने चाहिए।

उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, “खैर, इन सभी कार्यों को पूरा करना भी शायद उद्देश्य नहीं है। उद्देश्य तो चुनाव तक उद्घाटन, प्रचार और वाहवाही हासिल करना दिखाई देता है। इसे विकास से ज्यादा चुनावी जुमला कहा जाए तो शायद गलत नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि जनता को यह देखना चाहिए कि किस जनप्रतिनिधि ने पूरे पांच साल में कितना काम किया और कौन केवल चुनाव के समय दिखाई देता है।

दल-बदल की राजनीति पर भी तलविंदर सिंह का निशाना

तलविंदर सिंह ने चुनाव से पहले नेताओं द्वारा लगातार किए जा रहे दल-बदल पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि कुछ नेता पहले ही अपना दल बदल चुके हैं और कुछ चुनाव नजदीक आते ही दल बदलने की तैयारी में हैं। इसके लिए अलग-अलग कारण बताए जाते हैं—कहीं कहा जाता है कि पार्टी ने पूछा नहीं, कहीं सम्मान नहीं मिला और कहीं राजनीतिक अवसर नहीं मिला।

उन्होंने सवाल किया, “जिस चुनाव चिन्ह पर जीतकर नेता सदन तक पहुंचा, उस चुनाव चिन्ह के पीछे जनता का वोट और विश्वास था। अगर चुनाव जीतने के बाद व्यक्तिगत राजनीतिक लाभ के हिसाब से पार्टी बदल ली जाए तो क्या यह जनता के जनादेश के साथ न्याय है?”

उन्होंने कहा कि ऐसी राजनीति से सबसे ज्यादा ठगा हुआ आम मतदाता महसूस करता है, जिसने किसी पार्टी और उसके चुनाव चिन्ह को देखकर अपना वोट दिया था।

“जनता अब नेताओं का पांच साल का रिपोर्ट कार्ड देखेगी”

तलविंदर सिंह ने कहा कि इस बार जनता को केवल चुनाव के दौरान किए जा रहे वादों और उद्घाटनों के आधार पर फैसला नहीं करना चाहिए।

“जनता को पूछना चाहिए कि पिछले पांच साल में नेता कितनी बार उनके बीच आया? कितनी समस्याएं हल करवाईं? कितनी सड़कें बनीं? कितनी गलियां सुधरीं? सीवर की कितनी समस्याएं दूर हुईं? और जनता के बीच कितनी बार खड़ा रहा?”

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नेता राजा नहीं बल्कि जनता के प्रतिनिधि होते हैं।

“कुछ लोग खुद को राजा समझने लगे हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि लोकतंत्र में असली ताकत जनता के पास है। नेता जनता की सेवा के लिए चुना जाता है, अपने निजी राजनीतिक और पारिवारिक हित साधने के लिए नहीं।”

“इस बार जनता सबका हिसाब रखेगी”

तलविंदर सिंह ने कहा कि इस बार जनता उन नेताओं का भी हिसाब रखेगी जो पूरे कार्यकाल में जनता से दूर रहे और चुनाव आते ही अचानक सक्रिय हो गए।

उन्होंने कहा, “जनता बहुत समझदार है। पांच साल की खामोशी और चुनाव से तीन महीने पहले की सक्रियता के बीच का अंतर जनता अच्छी तरह समझती है। इस बार केवल उद्घाटन के पत्थर और भाषण काम नहीं आएंगे, जनता काम का हिसाब मांगेगी।”

उन्होंने यह भी कहा कि जो काम वास्तव में जरूरी हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए, न कि केवल ऐसे कार्य किए जाएं जिनसे चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार हासिल हो।

दल बदलने वालों को टिकट पर रोक का हो प्रावधान

तलविंदर सिंह ने मांग की कि दल-बदल की राजनीति पर रोक लगाने के लिए ऐसा प्रभावी प्रावधान होना चाहिए कि निर्वाचित पद पर रहते हुए पार्टी बदलने वाले व्यक्ति को किसी अन्य पार्टी से तत्काल चुनावी टिकट न दिया जाए।

उन्होंने कहा कि इससे नेताओं को बार-बार राजनीतिक निष्ठा बदलने से पहले जनता के जनादेश के बारे में सोचना पड़ेगा और मतदाता के वोट की गरिमा भी बनी रहेगी।

अंत में तलविंदर सिंह ने कहा:

“पांच साल जनता के बीच रहकर काम कीजिए, चुनाव से तीन महीने पहले नहीं। जनता को उद्घाटन नहीं, परिणाम चाहिए; फोटो नहीं, विकास चाहिए; वादे नहीं, काम चाहिए। इस बार जनता सब देख रही है और समय आने पर अपने वोट से जवाब भी देगी।”

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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