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चंद्रभेदी प्राणायाम से शरीर की गर्मी को शांत किया जा सकता है : देवराज त्यागी, प्राकृतिक चिकित्सक

चंद्रभेदी प्राणायाम से शरीर की गर्मी को शांत किया जा सकता है : देवराज त्यागी, प्राकृतिक चिकित्सक

चंडीगढ़: वरदान नेचुरोपैथी एवं योग इंस्टिट्यूट चंडीगढ़ के संयोजक तथा प्राकृतिक चिकित्सक देवराज त्यागी ने गर्मी से बचने के लिए कुछ उपायों पर चर्चा की।

गर्मी का मौसम अपने साथ तेज धूप, लू, पसीना, थकावट और कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएँ लेकर आता है। यदि इस मौसम में सही खान-पान, दिनचर्या और प्राकृतिक उपाय अपनाए जाएँ, तो शरीर को स्वस्थ और ऊर्जावान रखा जा सकता है। आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में प्राकृतिक चिकित्सा और योग, प्राणायाम गर्मी से बचाव के सबसे सरल और प्रभावी उपाय हैं।

1. बासी भोजन से बचें

गर्मी में भोजन जल्दी खराब हो जाता है, इसलिए ताजा और हल्का भोजन ही करें। बासी, तला-भुना और अत्यधिक मसालेदार भोजन पेट की गड़बड़ी, गैस और फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है।

हरी सब्जियाँ, मौसमी फल, दही, छाछ, खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजा शरीर को ठंडक प्रदान करते हैं।

2. पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ लें

गर्मी में शरीर से पसीने के रूप में पानी अधिक निकलता है। इसलिए दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना आवश्यक है।

नींबू पानी, शिकंजी, नारियल पानी, बेल का शरबत, सत्तू और छाछ शरीर में ऊर्जा बनाए रखते हैं और लू से बचाते हैं।

3. दोपहर की तेज धूप से बचें

दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक धूप सबसे अधिक तेज होती है। इस समय बिना आवश्यकता बाहर न निकलें। यदि बाहर जाना जरूरी हो तो सिर ढककर जाएँ, सूती कपड़े पहनें और पानी साथ रखें।

4. मिट्टी चिकित्सा का लाभ

प्राकृतिक चिकित्सा में मिट्टी का विशेष महत्व है। पेट पर मिट्टी की पट्टी लगाने से शरीर की गर्मी कम होती है तथा पाचन क्रिया सुधरती है।

मिट्टी स्नान और पैरों पर मिट्टी लगाने से शरीर को ठंडक मिलती है और मानसिक तनाव भी कम होता है।

5. घर को ठंडा रखने के प्राकृतिक उपाय

खिड़कियों पर गीले पर्दे या खस की टट्टी लगाएँ।

सुबह और शाम घर में ताजी हवा आने दें।

अधिक गर्मी वाले समय में पंखे और वेंटिलेशन का सही उपयोग करें।

घर के आसपास पौधे लगाने से वातावरण शुद्ध और ठंडा रहता है।

गर्मी से बचाने वाले विशेष प्राणायाम

योग और प्राणायाम शरीर को भीतर से शीतलता प्रदान करते हैं। गर्मी के मौसम में निम्न प्राणायाम अत्यंत लाभकारी माने गए हैं —

1. चंद्रभेदी प्राणायाम

यह शरीर और मन को ठंडक देने वाला श्रेष्ठ प्राणायाम है।

विधि:

सुखासन या पद्मासन में बैठ जाएँ।

दाएँ नथुने को अंगूठे से बंद करें।

बाएँ नथुने से धीरे-धीरे श्वास लें।

फिर बाएँ नथुने को बंद करके दाएँ से श्वास बाहर छोड़ें।

यही प्रक्रिया 10–15 बार करें।

लाभ:

शरीर की गर्मी कम करता है।

मानसिक शांति देता है।

उच्च रक्तचाप और तनाव में लाभकारी।

लू और अत्यधिक प्यास से राहत देता है।

2. शीतली प्राणायाम

विधि:

जीभ को नली के आकार में मोड़कर मुँह से श्वास लें और नाक से धीरे-धीरे छोड़ें।

लाभ:

शरीर को तुरंत ठंडक देता है।

पित्त दोष कम करता है।

गुस्सा और बेचैनी शांत करता है।

3. शीतकारी प्राणायाम

विधि:

दाँतों को हल्का खोलकर उनके बीच से श्वास लें और नाक से छोड़ें।

लाभ:

शरीर का तापमान संतुलित करता है।

थकान और अधिक पसीने में राहत देता है।

4. अनुलोम-विलोम

यह प्राणायाम शरीर की ऊर्जा को संतुलित करता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।

देवराज त्यागी ने बताया कि

गर्मी के मौसम में यदि हम प्राकृतिक जीवनशैली अपनाएँ, संतुलित भोजन करें, पर्याप्त पानी पिएँ तथा योग और प्राणायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ, तो हम अनेक बीमारियों से बच सकते हैं।

प्राकृतिक चिकित्सा का मूल संदेश है —

“प्रकृति के साथ चलें, स्वस्थ और प्रसन्न रहें।”

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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