13 मई को सुप्रीम कोर्ट में होगी चण्डीगढ़ हाउसिंग स्कीम मामले की सुनवाई

13 मई को सुप्रीम कोर्ट में होगी चण्डीगढ़ हाउसिंग स्कीम मामले की सुनवाई
एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन, चण्डीगढ़ ने जताई न्याय की उम्मीद
चण्डीगढ़ : वर्ष 2008 में यूटी प्रशासन, चंडीगढ़ द्वारा बेघर कर्मचारियों के लिए शुरू की गई हाउसिंग योजना का मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस योजना के तहत 3,920 कर्मचारियों को ड्रा ऑफ लॉट्स के माध्यम से सफल घोषित किया गया था, लेकिन बाद में प्रशासन द्वारा फ्लैटों का आवंटन नहीं किया गया, जिससे हजारों कर्मचारी लंबे समय से परेशानी का सामना कर रहे हैं।
प्रभावित कर्मचारियों ने इस मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ी। लगभग 13 वर्षों तक चले संघर्ष के बाद हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को निर्देश दिए कि सफल कर्मचारियों के लिए फ्लैटों का निर्माण कर उन्हें मूल भूमि लागत तथा वर्तमान निर्माण लागत पर आवंटित किया जाए।
हालांकि, यूटी प्रशासन ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए भूमि की कीमत मौजूदा बाजार दरों के अनुसार वसूलने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रशासन की यह मांग स्वीकार हो जाती है, तो उन पर कई गुना अधिक आर्थिक बोझ पड़ जाएगा।
एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन, चण्डीगढ़ के महासचिव विजय जुनेजा ने बताया कि 2,143 कर्मचारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और अधिवक्ता राजीव भल्ला ने सुप्रीम कोर्ट में प्रशासन की मांग का विरोध करते हुए मामले की शीघ्र सुनवाई की मांग की।
पिछली सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संजय कुमार एवं के. चंद्रन की पीठ ने मामले का गंभीर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को जल्द सुनवाई की तिथि निर्धारित करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत अब मामले की अगली सुनवाई 13 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
एसोसिएशन ने कहा है कि वह कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए लगातार संघर्षरत है और मामले से जुड़े हर घटनाक्रम की जानकारी कर्मचारियों को समय-समय पर देती रहेगी।



