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बलबीर बाहरी तन्हा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए

बलबीर बाहरी तन्हा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए

 

चण्डीगढ़ : प्राचीन कला केंद्र, सेक्टर 35 एवं बृहस्पति कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य सरिता कार्यक्रम का अनुष्ठान किया गया व बलबीर बाहरी तन्हा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। केंद्र के‌ अध्यक्ष और प्रसिद्ध संगीतज्ञ ‌प्रो. सौभाग्य वर्धन ने कहा कि बलवीर बाहरी तन्हा बहुत ही ज़हीन ग़ज़लकार थे। साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ अनीश गर्ग ने कहा कि बाहरी की शायरी की खुशबू सदैव साहित्य प्रेमियों के हृदय में रहेगी। बरसों से बलवीर के साथी रहे प्रेम विज ने काव्य में ढंग से कहा -‘वह बैंक में रुपयों का हिसाब रखता था, फिर अदब की दुनिया में उसने कदम रखा था। चमन‌ शर्मा चमन और डॉ विभा रे ने भी अपने विचार रखें। काव्य गोष्ठी में शहर के जाने-माने कवियों और कवयित्रियों ने अपनी कविताओं से स्वर्गीय बलबीर बाहरी तन्हा को श्रद्धा सुमन अर्पित किए।

गोष्ठी में ज्योति रंजन, प्रीति, अमित कुमार, जया सूद,श्याम सुंदर, रोहित सिंह, सुरेंद्र पाल काकरोड़, करिश्मा वर्मा, प्रिया कुमारी, सुखविंदर पठानिया, दर्शन सिंह, कुसुम धीमान, केपी सिंह, राजेश कपिल, सरबजीत कौर, नीतू कुमारी, डॉ विभा राय आदि कवियों ने अपनी खूबसूरत कविताएं प्रस्तुत की। मंच संचालन करते हुए डॉ मंजू चौहान ने कवि मन की उलझनों को कुछ इस प्रकार सांझा किया

कभी-कभी तो ये लगता है

बेमतलब सब सपने है क्या?

लफ़्ज़ किसी के अपने है क्या?

दर्शन सिंह कहते हैं

हम-तुम

घण्टों बतियाते थे

खुली छत पर

दुपहरी..संध्या…रात्रि हम-तुम

कवि के पी सिंह ने अपनी बात कुछ यूं रक्खी:

पी पी हुंजुवा का तेल दिल जलदा रिहा

सुबह आंउदी रही दिन ढलदा रिहा

कवियित्री नीतू कुमारी “नितुंजलि” ने कहा

मुकम्मल सी है ज़िन्दगी तुम्हारे बिना ।

तथा हे कृष्ण कन्हैया ।

कवियत्री सरबजीत कौर ने अपनी बात रखी।

 

राजेश कपिल कहते हैं-

जी लो जिंदगी हर लम्हा बस एक ख्वाब है

कल का नहीं भरोसा ना कोई ऐतबार है

वहीं कुसुम धीमान ‘कलिका’ जीवन की सच्चाई पर प्रकाश डालती हैं कि

हाँ अंतिम शय्या पर जब हम, पड़े मिलेंगे।

सुनो सखा ये चार लोग तो, खड़े मिलेंगे॥

मैं नारी हूं, कमजोर नहीं,

मै अग्नि हूं, अंगारों की।

सुनाकर प्रिया कुमारी ने दर्शकों में जोश भर दिया।श्याम सुंदर जी ने आंखों को दिल का आईना बताते हुए कहा

आंखें बोलती हैं

भेद दिलों के खोलती है

जया सूद कहती हैं

सृजि हैं यह प्यारी दुनिया भगवान ने,

चला रहा हैं वो सृष्टि अपने प्यार से

सुखविंदर सिंह पठानिया ने कहा

ये जो तूने साड़ी के, सिलवटों को समेट के रखा है,

बड़े इत्मीनान से,हर एक पहलू को लपेट के रखा है!

गोष्ठी के अंत में राजन सुदामा ने सभी का धन्यवाद किया।

 

 

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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