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थाड़िया चौंफल गीत व झुमैलू लोकनृत्य द्वारा उतराखंडी संस्कृति को जीवित रखने का प्रयास

चण्डीगढ़ : देवभूमि- सैक्टर-41 व दीवा जागृति समिति चण्डीगढ़ (ग्राम रणस्वा, उतराखंड) की महिलाओं ने पौराणिक उतराखंडी नृत्य व लोकगीत कार्यक्रम का आयोजन किया। जो कि रणबीर बिष्ट के निवास स्थान, नयागांव में आयोजित किया गया। रणवीर बिष्ट ने इस अवसर पर सभी को अवगत कराया कि पुराने समय में गढ़वाल कुमाऊ पहाड़ी क्षेत्र के लोग अपने नए साल (चैत मास) के आगमन से और बैसाखी तक नवरात्रि पूजन में देवी देवताओं का आह्वान साथ में बसंत ऋतु के आगमन हरियाली, बुरांश के फूल, नई डाली पंया जमने के उपलक्ष में कुछ विशेष प्रकार के कार्यक्रम शुरू करते थे और इसी दौरान गाँव की महिलाएँ एवं पुरुष अपने पारंपरिक गीत थाड़िया चौंफल झुमैलू नृत्य और गीत देवी-देवताओं की पूजा के लिए, लोक परंपरा को निभाने के लिए, अपनी भावनाएं व्यक्त करने के लिए गाते थे। इस के बाद पूरे क्षेत्र में कौथिग (मेले) शुरू हो जाते थे। जिसमें दीशाएं/ध्यानिया दूरदराज अपने ससुराल से अपने मैंतियों से मिलने कौथीग देखने आती थी। देवभूमि- सैक्टर-41 एवं दीवा जागृति समिति (ग्राम रणस्वा) चंडीगढ़ की महिलाओं ने चंडीगढ़ शहर में अपनी नए पीढ़ी को देवभूमि उत्तराखंड की बोली भाषा, संस्कृति, सभ्यता रीति रिवाज लोकगीत नृत्य इत्यादि के बारे में घर-घर जाकर गीत के माध्यम से अवगत व जागरूक कर रही हैं जिसको काफी सराहनीय योगदान मिल रहा है।

Ravinder Popli

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