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आउटसोर्स कर्मियों का वेतन समय पर मिले: बिना ठेकेदार के अंडर गैप अंतरिम अवधि में भी सीधे भुगतान और सख्त निर्देशों की मांग को लेकर प्रशासक को ज्ञापन सौंपा।

 

आउटसोर्स कर्मियों का वेतन समय पर मिले: बिना ठेकेदार के अंडर गैप अंतरिम अवधि में भी सीधे भुगतान और सख्त निर्देशों की मांग को लेकर प्रशासक को ज्ञापन सौंपा।

चंडीगढ़ : दिनांक : 27 – 08 – 2026

 

यू.टी. चंडीगढ़ प्रशासन के अंतर्गत शिक्षा विभाग, स्पोटर्स, स्वास्थ्या विभाग, इंजीनीरिंग पब्लिक हेल्थ, और नगर निगम चंडीगढ़ के विभिन्न विभागों में कार्यरत हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन की सुरक्षा और आजीविका के अधिकार को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण व सकारात्मक पहल की है। आउटसोर्स कर्मियों के तरफ से श्री विक्रम सिंह मौलिक अधिकारों के प्रति आवाज समाज सेवी ने यू.टी. चंडीगढ़ के माननीय प्रशासक महोदय एवं माननीय श्रम मंत्रालय को एक विस्तृत एवं प्रभावकारी ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि जीईएम (GeM) पोर्टल पर नई निविदा प्रक्रिया में देरी या ठेकेदारों के बदलाव की अंतरिम अवधि (Under-gap Period) के दौरान कर्मियों के वेतन का भुगतान किसी भी सूरत में न रोका जाए।

ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि टेंडर की प्रक्रियात्मक देरी या ठेकेदारों के बदलाव के दौरान भी आउटसोर्स कर्मचारी पूरी निष्ठा और लगन से अपनी सेवाएं देते रहते हैं। ऐसे में प्रशासनिक या संविदात्मक देरी के कारण कम वेतन पाने वाले कर्मियों का मासिक वेतन रुकना उनके परिवार की आजीविका पर सीधा प्रहार करता है। कई आउट सोर्सिंग वर्करों को वेतन विलंबित होने पर मजबूरी में आत्महत्या करनी पडी।

 

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने भारत सरकार के वैधानिक श्रम कानूनों—जैसे अनुबंध श्रम अधिनियम 1970 (धारा 21(4)), मजदूरी संहिता 2019 (धारा 43), और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति संहिता 2020—का हवाला देते हुए ध्यान दिलाया कि यदि ठेकेदार समय पर भुगतान करने में विफल रहता है, तो प्रधान नियोक्ता (Principal Employer/संबंधित विभाग) की यह कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह कर्मचारियों को सीधे वेतन जारी करे तथा इस राशि की भरपाई ठेकेदार के बकाया बिलों या सुरक्षा जमा राशि से करे।

ज्ञापन के माध्यम से रखी गई प्रमुख माँगें : वेतन में शून्य-व्यवधान: टेंडर प्रक्रिया लंबित रहने या ठेकेदार बदलने की स्थिति में भी कर्तव्य निभा रहे कर्मचारियों का वेतन न रोका जाए।

 

प्रधान नियोक्ता द्वारा सीधा भुगतान: यदि सेवा प्रदाता नहीं है, और वर्कर सीधे विभाग में कार्यरत हैं, तो अंतरिम अवधि में विभाग स्वयं कर्मचारियों के बैंक खातों में समय पर (हर महीने की 7 तारीख तक) सीधे वेतन का भुगतान सुनिश्चित करे।

 

ठेकेदारों से वसूली: डिफ़ॉल्ट करने वाले ठेकेदारों की सुरक्षा जमा राशि या लंबित बिलों से भुगतान राशि की वैधानिक वसूली की जाए।

 

विभागों की तय हो जवाबदेही : स्वास्थ्य, शिक्षा, इंजीनियरिंग और नगर निगम जैसे प्रमुख विभागों में सेवा प्रदाताओं के अनुपस्थिति में वेतन विलंब प्रशासनिक देरी के कारण कर्मचारियों के उत्पीड़न पर स्थायी रोक लगे।

 

स्थायी नीति निर्देश: एक स्पष्ट प्रशासनिक आदेश/नीति जारी हो ताकि भविष्य में कभी भी किसी आउटसोर्स कर्मी का वेतन अंतरिम अवधि के कारण न अटके।

 

कर्मचारी प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया है कि चंडीगढ़ प्रशासन का दूरदर्शी और संवेदनशील नेतृत्व हजारों आउटसोर्स कर्मियों के परिवारों के वित्तीय हितों, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए इस विषय पर शीघ्र ही एक ऐतिहासिक व सकारात्मक आदेश जारी करेगा।

 

जारीकर्ता:

विक्रम सिंह

Voice for fundamental Rights

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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