आंगनबाड़ी, क्रैच और डिस्पेंसरी के बाहर गंदा पानी जमा—नन्हे बच्चों और मरीजों की सेहत से खिलवाड़, नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

आंगनबाड़ी, क्रैच और डिस्पेंसरी के बाहर गंदा पानी जमा—नन्हे बच्चों और मरीजों की सेहत से खिलवाड़, नगर निगम की कार्रवाई पर उठे सवाल

चंडीगढ़, 26 अगस्त 2026: हेलो माजरा, वार्ड नंबर 20 स्थित संपर्क केंद्र में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्र, क्रैच और डिस्पेंसरी के आसपास गंदे पानी का जलभराव चिंता का विषय बना हुआ है। यहां छोटे-छोटे बच्चे और बच्चियां तथा डिस्पेंसरी में इलाज के लिए आने वाले मरीज रोजाना इस गंदगी के बीच से गुजरने को मजबूर हैं। जमा गंदे पानी के कारण मच्छरों के पनपने और डेंगू-मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बना हुआ है।

सोशल वर्कर अरविंद सिंह ने कहा कि नगर निगम प्रशासन को कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया। उन्होंने मौके की तस्वीरें जारी करते हुए कहा कि एक तरफ प्रशासन लोगों के घरों में पानी की टंकी का ढक्कन खुला मिलने पर चालान करने में तत्परता दिखाता है, वहीं दूसरी तरफ आंगनबाड़ी, क्रैच और डिस्पेंसरी जैसे संवेदनशील सरकारी स्थानों के बाहर गंदा पानी जमा होने पर आखिर चालान कौन करेगा?

उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम से सीधा सवाल किया है—“अगर किसी आम नागरिक की छत पर पानी की टंकी का ढक्कन खुला हो तो नगर निगम चालान कर देता है, लेकिन यहां मासूम बच्चों और मरीजों के बीच गंदा पानी जमा है, तो इस लापरवाही का चालान कौन करेगा? इसकी जिम्मेदारी किस अधिकारी की तय होगी?”

अरविंद सिंह ने कहा कि नियम-कायदे केवल आम जनता के लिए नहीं होने चाहिए। प्रशासनिक विभागों और सार्वजनिक संस्थानों में भी स्वच्छता एवं स्वास्थ्य संबंधी नियमों का उतनी ही सख्ती से पालन होना चाहिए। किसी बीमारी के फैलने के बाद कार्रवाई करने से बेहतर है कि प्रशासन पहले ही समस्या का समाधान करे।
उन्होंने चंडीगढ़ प्रशासन एवं नगर निगम से मांग की कि तत्काल मौके का निरीक्षण करवाकर गंदे पानी की निकासी, सफाई, फॉगिंग एवं एंटी-लार्वा दवा का छिड़काव करवाया जाए और जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में यहां दोबारा जलभराव न हो।
“मासूम बच्चों और मरीजों की सुरक्षा के मामले में नगर निगम को केवल चालान काटने वाला विभाग नहीं, बल्कि जिम्मेदारी निभाने वाला प्रशासन भी नजर आना चाहिए। अब देखना यह है कि आम जनता का चालान करने वाला नगर निगम इस सरकारी परिसर की लापरवाही का चालान कब करता है?”
— अरविंद सिंह, सोशल वर्कर



