बेड खाली है तो मरीज की जेब नहीं देखी जाती, इलाज सबका हक: एमजीयूएमएसटी

बेड खाली है तो मरीज की जेब नहीं देखी जाती, इलाज सबका हक: एमजीयूएमएसटी

एमजी मेडिवर्ल्ड के चंडीगढ़ संवाद में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की जानकारी; 80% मरीजों का सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त इलाज

चण्डीगढ़ : अस्पताल में बेड खाली है तो मरीज की जेब नहीं देखी जाती। पैसा है या नहीं, इससे पहले यह देखा जाता है कि मरीज को इलाज की जरूरत कितनी है। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी (एमजीयूएमएसटी), जयपुर की हेल्थकेयर फिलॉसफी की यह तस्वीर चंडीगढ़ में आयोजित ‘एमजी मेडिवर्ल्ड–इंटरनेशनल हेल्थकेयर सर्विसेज’ के विशेष संवाद सत्र में ‘ओवरव्यू ऑफ सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एट एमजीयूएमएसटी’ विषय पर संस्थान की चिकित्सा सेवाओं और कार्यप्रणाली की जानकारी साझा की गई। संस्थान का लक्ष्य ऐसा वर्ल्ड-क्लास टीचिंग हॉस्पिटल तैयार करना है, जहां आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं के साथ समाज के हर वर्ग को किफायती और नैतिक इलाज मिल सके। इसी सोच के तहत एमजीयूएमएसटी में विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम की खास बात यह रही कि चर्चा सिर्फ आधुनिक मशीनों और चिकित्सा तकनीक तक सीमित नहीं रही। इसके केंद्र में यह सवाल रहा कि बेहतर इलाज आम मरीज की पहुंच में कैसे आए? संस्थान की ओर से इसका जवाब समान अवसर, नैतिक चिकित्सा, विशेषज्ञता और किफायती उपचार के मॉडल में दिया गया। कार्यक्रम के दौरान ‘एमजी मेडिवर्ल्ड–इंटरनेशनल हेल्थकेयर सर्विसेज’ पहल के जरिए मरीजों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी गई। चर्चा में यह बात सामने आई कि गंभीर बीमारियों के मरीज अब सिर्फ नजदीकी अस्पताल तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि विशेषज्ञता, तकनीक और बेहतर उपचार सुविधाओं वाले संस्थानों की तलाश करते हैं।

‘एमजी मेडिवर्ल्ड’ से बढ़ेगा हेल्थकेयर कनेक्शन : 80% मरीजों का मुफ्त इलाज
एमजीयूएमएसटी के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर सुकांता कुमार दास ने संस्थान की सोच और सेवाओं के बारे में जानकारी साझा की। संस्थान की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक अस्पताल में आने वाले करीब 80% मरीजों को केंद्र या राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं के तहत मुफ्त उपचार मिल रहा है। वहीं करीब 20% मरीज कॉरपोरेट या हेल्थ इंश्योरेंस के माध्यम से इलाज करा रहे हैं। खास बात यह है कि अस्पताल में आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए अलग बेड या अलग श्रेणी नहीं बनाई गई है। बेड उपलब्ध होने पर मरीज की आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। यानी एक ही व्यवस्था में सभी वर्गों के मरीजों को उपचार उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है।
लाखों का इलाज, कीमत में राहत की कोशिश

जटिल और महंगी चिकित्सा प्रक्रियाओं को आम मरीज की पहुंच में रखने की नीति का उदाहरण लिवर ट्रांसप्लांट के एक मामले से दिया गया। संस्थान के मुताबिक आर्थिक रूप से कमजोर एक स्कूल शिक्षक के उपचार में लागत को काफी कम किया गया और मरीज से दवाओं की लागत के बराबर राशि लेने का प्रयास किया गया। संस्थान का दावा है कि जटिल प्रक्रियाओं की कीमतें भी किफायती रखने का प्रयास किया जाता है। कई उपचारों की लागत सार्वजनिक संस्थानों जैसे पीजीआई, चंडीगढ़ के स्तर के आसपास रखने की कोशिश की जाती है। मकसद यह कि गंभीर बीमारी का इलाज केवल आर्थिक रूप से सक्षम मरीजों तक सीमित न रहे।
टेस्ट ज्यादा नहीं, सिर्फ जरूरत के हिसाब से ही
अस्पताल की कार्यप्रणाली का एक और पहलू मरीजों के लिए खास मायने रखता है। संस्थान में डॉक्टरों को फिक्स्ड सैलरी दी जाती है। इसलिए अनावश्यक जांच लिखने का कोई व्यावसायिक प्रोत्साहन नहीं है। संस्थान के अनुसार डॉक्टर बीमारी की पहचान और उपचार के लिए आवश्यक जांचों पर ही जोर देते हैं। यानी मरीज के लिए ‘जितना जरूरी, उतना ही टेस्ट’ की नीति अपनाने का प्रयास किया जाता है।
आधी रात पुलिस मरीज लेकर आई, इलाज शुरू हुआ
कोविड महामारी के दौरान अस्पताल की इसी मरीज-केंद्रित नीति का उदाहरण सामने आया। संस्थान के मुताबिक प्रशासन को यह अधिकार था कि पुलिस द्वारा आधी रात में लाए गए किसी अज्ञात मरीज को भी तत्काल भर्ती कर उपचार शुरू किया जा सके। यानी मरीज की पहचान, आर्थिक स्थिति या अन्य औपचारिकताओं के कारण इमरजेंसी इलाज में देरी न हो—इस सोच को प्राथमिकता दी गई। सत्र में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। जटिल बीमारियों के इलाज में अलग-अलग विशेषज्ञों की टीम, आधुनिक तकनीक और मरीज-केंद्रित उपचार व्यवस्था को महत्वपूर्ण बताया गया। संस्थान का उद्देश्य विभिन्न विशेषज्ञताओं को एक साथ लाकर ऐसे उपचार मॉडल को बढ़ावा देना है, जहां गंभीर बीमारी के मरीज को अलग-अलग स्तरों पर विशेषज्ञ राय के लिए भटकना न पड़े। आधुनिक तकनीक के साथ विशेषज्ञ टीम का समन्वय उपचार को अधिक प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।



