साइबर क्राइम मामलों पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, पंजाब-हरियाणा और चण्डीगढ़ के पुलिस प्रमुखों को सख्त कार्रवाई के निर्देश

साइबर क्राइम मामलों पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, पंजाब-हरियाणा और चण्डीगढ़ के पुलिस प्रमुखों को सख्त कार्रवाई के निर्देश
चण्डीगढ़ : देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराध को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि साइबर क्राइम अब महामारी का रूप ले चुका है और इसका नेटवर्क ग्रामीण क्षेत्रों तक भी फैल गया है। अदालत ने माना कि मौजूदा कानून साइबर अपराध की गंभीरता से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं तथा कानूनों में सुधार और कड़ी सजा के प्रावधान की आवश्यकता है।

जस्टिस संजय वशिष्ठ की अदालत ने साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए कहा कि आज आम खाताधारकों में अपने बैंक खातों को लेकर डर का माहौल है। लोगों को आशंका रहती है कि उनके खाते से कभी भी अचानक रकम निकाल ली जा सकती है।
अधिवक्ता सागर पंघाल के अनुसार, अदालत ने एक मामले में आरोपी को जमानत देते हुए स्पष्ट किया कि यदि वह भविष्य में दोबारा इसी प्रकार के अपराध में शामिल पाया जाता है तो उसकी जमानत तत्काल रद्द की जानी चाहिए और उसे दोबारा जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि मामले में विक्रम मिढ़ा नामक व्यक्ति के साथ करीब 73 लाख रुपये की साइबर ठगी हुई थी। इस मामले में आरोपी के खाते में करीब 20 लाख रुपये आए थे। बताया गया कि आरोपी के पास व्हाट्सऐप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेडिंग से संबंधित एक लिंक आया था। पैसे कमाने के लालच में उसने लिंक पर क्लिक किया और विभिन्न बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की।

सुनवाई के दौरान यह दलील भी रखी गई कि साइबर ठगी के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने के बजाय कई बार पुलिस उन खाता धारकों और कथित मीडियेटर्स को गिरफ्तार कर लेती है, जो कुछ पैसों के लालच में अपना बैंक खाता उपलब्ध करा देते हैं। बाद में इन्हीं खातों में लाखों-करोड़ों रुपये की संदिग्ध रकम पहुंचती है। कई मामलों में खाता धारक को यह तक पता नहीं होता कि उसके खाते का इस्तेमाल कौन और कहां से कर रहा है।
अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि साइबर अपराध के मामलों में पुलिस को और अधिक प्रभावी एवं सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। साथ ही विदेशों में ट्रांसफर होने वाली संदिग्ध रकम को रोकने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई गई।
इसी संदर्भ में हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ के पुलिस प्रमुखों को निर्देश जारी करते हुए तीनों राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों के साइबर सेल को साइबर अपराध के मामलों में सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
लोन एजेंटों के जरिए भी साइबर ठगी का नेटवर्क
अधिवक्ता सागर पंघाल ने बताया कि आजकल लोन दिलाने वाले कुछ एजेंट भी ऐसे साइबर अपराध नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं। आरोप है कि लोन की प्रक्रिया के दौरान ग्राहक से कुछ समय के लिए बैंक अकाउंट की किट लेकर उसके खाते में साइबर ठगी से प्राप्त रकम पार्क कर दी जाती है और बाद में उसे विदेशी खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है।
कई मामलों में संबंधित ग्राहक को पूरे घटनाक्रम की जानकारी तब मिलती है, जब पुलिस उसके घर गिरफ्तारी के लिए पहुंचती है। इस तरह कई निर्दोष लोग भी साइबर अपराध के मामलों में आरोपी बनकर जेल पहुंच रहे हैं।
अधिवक्ता के मुताबिक, जिला अदालतों से समय पर जमानत नहीं मिलने के कारण ऐसे लोगों को जमानत के लिए हाईकोर्ट और कई बार सुप्रीम कोर्ट तक का रुख करना पड़ता है। इससे पहले से लंबित मामलों का बोझ झेल रही उच्च अदालतों पर मुकदमों का अतिरिक्त दबाव बढ़ रहा है।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी और निर्देश को साइबर अपराध पर लगाम लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अदालत के रुख से स्पष्ट है कि साइबर ठगी के असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने के साथ-साथ बैंक खातों के दुरुपयोग और विदेशों में धन के अवैध हस्तांतरण पर प्रभावी रोक लगाने की जरूरत है।



