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जनता के चुने प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं तो लोकतंत्र अधूरा : राजबीर सिंह भारतीय

 

जनता के चुने प्रतिनिधियों को अधिकार नहीं तो लोकतंत्र अधूरा : राजबीर सिंह भारतीय

मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष हो, पार्षदों और मेयर को पर्याप्त अधिकार मिलें; दल-बदल करने वालों को दोबारा जनता के बीच जाना चाहिए

 

चंडीगढ़, 11.08.2026।

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता अपने प्रतिनिधियों को केवल चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र की समस्याओं का समाधान करने और जनता से किए वायदों को पूरा करने के लिए चुनती है। ऐसे में यदि चुने हुए मेयर और पार्षदों के पास पर्याप्त अधिकार ही नहीं होंगे तो उनसे जवाबदेही मांगना भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ न्याय नहीं है। यह बात राजबीर सिंह भारतीय ने कही।

उन्होंने कहा कि नगर निगम की व्यवस्था में सबसे बड़ा सवाल “अधिकार और जवाबदेही” का है। जनता पानी, सड़क, सफाई, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट, पार्क, डंपिंग ग्राउंड और विकास कार्यों को लेकर मेयर और पार्षदों से जवाब मांगती है, लेकिन कई महत्वपूर्ण कार्यकारी अधिकार अधिकारियों के पास होने के कारण चुने हुए प्रतिनिधि अपने ही वायदों को पूरा कराने में असहाय नजर आते हैं।

जवाबदेही जनप्रतिनिधियों की है तो अधिकार भी उन्हीं के पास हों:

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि जनता के वोट से चुना गया मेयर और पार्षद जनता के प्रति उत्तरदायी और जवाबदेह होता है। इसलिए जिस काम के लिए जनता ने उसे चुना है, उस काम को करने के लिए आवश्यक अधिकार भी उसे मिलने चाहिए।

उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था लोकतंत्र के मूल उद्देश्य के विपरीत है जिसमें जनता मेयर और पार्षद से सवाल करे, लेकिन निर्णय लेने और काम करवाने के वास्तविक अधिकार किसी और के पास हों। जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की और अधिकार सीमित—यह व्यवस्था लोकतंत्र को कमजोर करती है।

उन्होंने कहा कि कई बार मेयर और पार्षद पूरे पांच साल ऐसी व्यवस्था के “कठपुतली” बनकर रह जाते हैं, जहां जिम्मेदारी उनकी होती है, लेकिन अधिकार सीमित होते हैं।

मेयर का चुनाव पांच साल के लिए होना चाहिए

 

उन्होंने कहा कि मेयर का कार्यकाल केवल एक वर्ष का होना नगर निगम की स्थिरता और विकास के लिए उचित नहीं है। मेयर का चुनाव पांच वर्ष के लिए होना चाहिए, ताकि वह दीर्घकालिक योजनाएं बनाकर उन्हें पूरा करने के लिए पर्याप्त समय प्राप्त कर सके।

 

हर वर्ष मेयर का चुनाव होने से राजनीतिक अस्थिरता बढ़ती है और हॉर्स ट्रेडिंग यानी पार्षदों की खरीद-फरोख्त जैसी आशंकाओं को बल मिलता है। इससे विकास पीछे छूट जाता है और राजनीति आगे आ जाती है।

 

दल-बदल पर जनता का अधिकार सर्वोच्च हो

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि जनता किसी पार्षद को उसकी पार्टी, विचारधारा और घोषणापत्र को देखकर वोट देती है। यदि चुनाव जीतने के बाद कोई पार्षद निजी लाभ या राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए दूसरी पार्टी में चला जाता है तो वह केवल पार्टी नहीं बदलता, बल्कि उस जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है जिसने उसे वोट दिया है।

 

उन्होंने कहा कि यदि कोई पार्षद या मेयर अपनी राजनीतिक पार्टी और विचारधारा बदलना चाहता है तो उसे अपना निर्वाचित पद छोड़कर दोबारा जनता के बीच जाना चाहिए।

 

उन्होंने कहा, “जनता ने जिस विचारधारा और राजनीतिक दल के नाम पर वोट दिया था, अगर प्रतिनिधि उसी से अलग हो गया है तो उसे पुराने वोट के आधार पर पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं होना चाहिए। उसे नई पार्टी के साथ दोबारा चुनाव लड़कर जनता से नया जनादेश प्राप्त करना चाहिए।”

 

जनता का वोट सर्वोच्च, जनप्रतिनिधि मजबूत तो लोकतंत्र मजबूत

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र के लिए तीन बातें जरूरी हैं—जनता का विश्वास, जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और जनप्रतिनिधियों के पास पर्याप्त अधिकार।

 

उन्होंने कहा कि अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है और प्रशासनिक व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए, लेकिन निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को केवल नाममात्र की जिम्मेदारी देकर उनके हाथ बांध देना लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करता है।

उन्होंने मांग की कि मेयर और पार्षदों के अधिकार स्पष्ट एवं मजबूत किए जाएं, मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष किया जाए तथा दल-बदल करने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों को दोबारा जनता से जनादेश लेने की व्यवस्था की जाए।

 

उन्होंने कहा, “जनता ने जिन्हें चुना है, उन्हें काम करने का अधिकार भी मिलना चाहिए और काम न करने पर जनता के सामने जवाब देने की जिम्मेदारी भी। यही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।”

 

जारीकर्ता:

राजबीर सिंह भारतीय

अध्यक्ष,

ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन

सेक्टर-13, चंडीगढ़

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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