अनशन बाबा चंडीगढ़ प्रशासन पर भड़के , प्रशासक के निर्देशों के बावजूद फंड ट्रांसफर में देरी और भूमि अधिग्रहण की कछुआ चाल पर उठाए सवाल

चंडीगढ़ : हरमिलाप नगर-रायपुर कलां रेलवे फाटक पर लगने वाले भीषण जाम से पिछले कई वर्षों से संघर्ष कर रही है, परन्तु राहत की अभी कोई उम्मीद नहीं लगती। ‘जॉइंट एक्शन कमेटी फॉर वेलफेयर ऑफ बलटाना रेजिडेंट्स’ के अध्यक्ष प्रताप सिंह राणा, जो अनशन बाबा के नाम से मशहूर हैं, ने आज चंडीगढ़ प्रशासन के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए कड़े शब्दों में अपनी नाराजगी व्यक्त की।
प्रताप सिंह राणा ने बताया कि चंडीगढ़ के प्रशासक व पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया के व्यक्तिगत हस्तक्षेप और सख्त निर्देशों के बाद ही चंडीगढ़ प्रशासन ने अपने हिस्से की राशि (50%) रेलवे को देने का आश्वासन दिया था। इसी आधार पर रेलवे ने 20 जनवरी 2026 को अंडरपास के लिए निविदाएं प्रकाशित की थीं। लेकिन 13 फरवरी को टेंडर खुलने के दिन रेलवे ने यह कहकर हाथ पीछे खींच लिए कि चंडीगढ़ प्रशासन ने अब तक फंड जमा नहीं किया है।
इस पर प्रताप सिंह राणा ने 14 फरवरी को फिर से अन्न-जल का त्याग कर भूख हड़ताल पर बैठ गए। 16 फरवरी की रात प्रशासन के अधिकारी एक पत्र लेकर पहुंचे, जिसमें रेलवे से टेंडर रद्द न करने और जल्द फंड ट्रांसफर करने का आग्रह किया गया था। उनके मुताबिक प्रशासक के दबाव में मार्च के अंत में केवल 2 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई, जबकि कुल हिस्सा 6.40 करोड़ रुपये का था।
रेलवे का सख्त रुख
अंबाला डिवीजन द्वारा 06 अप्रैल 2026 को जारी ताजा पत्र (No. 128-W/SR.DEN/I/UMB/25-26) के जरिए रेलवे ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक प्रशासन अपने हिस्से की शेष पूरी राशि जमा नहीं करता, तब तक ‘फाइनेंशियल बिड’ नहीं खोली जाएगी और न ही ‘वर्क ऑर्डर’ जारी होगा। रेलवे के अनुसार, कुल 12.80 करोड़ के बजट में से प्रशासन का 50% हिस्सा देना अनिवार्य है, लेकिन मात्र 2 करोड़ देकर प्रशासन ने काम को फिर से अधर में लटका दिया है।
भूमि अधिग्रहण पर भी उठे सवाल
राणा ने कहा कि प्रशासन के अपने ही पत्रों के अनुसार, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अप्रैल 2025 तक पूरी हो जानी चाहिए थी। अब अप्रैल 2026 बीत रहा है, फिर भी अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी हो रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कोई अधिकारी जानबूझकर इस प्रोजेक्ट को ठंडे बस्ते में डालना चाहता है।
प्रताप सिंह राणा ने चंडीगढ़ के प्रशासक और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से पुरजोर अपील की है कि वे इस मामले में ‘स्वतः संज्ञान’ लेते हुए उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दें।
राणा ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब रेलवे ने इस स्थान पर अंडरपास बनाने का प्रस्ताव वर्ष 2014 में ही चंडीगढ़ प्रशासन को भेज दिया था, तो पिछले 12 वर्षों से इस फाइल को दबाकर रखने का असली जिम्मेदार कौन है?
उनके मुताबिक वर्ष 2023 में भी यह टेंडर केवल चंडीगढ़ प्रशासन की लापरवाही और प्रशासनिक विफलताओं के कारण रद्द हुआ था, जिससे जनता के समय और संसाधन की भारी हानि हुई।
यदि इस बार भी चंडीगढ़ के प्रशासक व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप न करते, तो यह परियोजना एक बार फिर रद्द होने की कगार पर थी।
प्रताप सिंह राणा ने माँग की है कि इस बात की जाँच की जाए कि कौन से अधिकारी या विभाग इस जनहितकारी परियोजना में बार-बार रोड़े अटका रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रशासन की इस सुस्ती की सजा स्थानीय जनता अपने कीमती वक्त और जान-माल के खतरे के रूप में भुगत रही है। अब समय आ गया है कि जवाबदेही तय की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही हो।



