समय बढ़ाता दूरियां, समय बढ़ावे मेल, समय बड़ा बलवान है, समय खिलावे खेल…

समय बढ़ाता दूरियां, समय बढ़ावे मेल, समय बड़ा बलवान है, समय खिलावे खेल…
चण्डीगढ़ : राष्ट्रीय कवि संगम, चण्डीगढ़ प्रांत द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें वरिष्ठ साहित्यकारा किरण आहूजा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थिति रहीं। इनके कर कमल द्वारा दीप प्रज्वलन के बाद गोष्ठी का शुभारंभ कवयित्री अमिता गुप्ता मगोत्रा ने मां शारदे की वंदना से किया। इस बहुभाषीय काव्य गोष्ठी का सन्चालन प्रांतीय महासचिव अनिल ‘चिंतक’ ने किया। संस्था सचिव बिजेंद्र सिंह चौहान एवं मोहाली इकाई अध्यक्ष रंजन मगोत्रा भी उपस्थित रहे।
इस गोष्ठी में डॉ. संतोष गर्ग, किरण आहूजा, अनिल शर्मा, रंजन मगोत्रा, अमिता मगोत्रा, बिजेंद्र चौहान, गौरव शर्मा, राजेश भाटिया, प्रियंका बिश्नोई, गरिमा गर्ग, सुनीता गर्ग, संगीता पुखराज, पुष्पा हंस आदि रचनाकारों द्वारा हिंदी, पंजाबी, हरियाणवी, डोगरी व अनेक भाषाओं पर रचनाएं प्रस्तुत की गईं।
कमला क्षत्रीय, विक्की, सीमा सैनी व रोशनी का विशेष सहयोग रहा। अंत में प्रोफेसर डॉ. एस.एल. गर्ग ने सभी अतिथियों का धन्यवाद किया। इस बहुभाषीय कवि गोष्ठी में किरण आहूजा ने कहा-बात दिल की अगर बता देते, फूल राहों में हम बिछा देते, डोगरी भाषा में रंजन मगोत्रा ने ओ पंछी कुथ्थे गई मेरी जान सुनाया, संगीता पुखराज ने जहां बैठोगे तुम माधो, वहीं हम बैठ जाएंगे, राजेश भाटिया ने आज जवान कल हम बुड्ढे हो जाएंगे। ये दिल के रिश्ते और भी गूढ़े हो जाएंगे, हरियाणवी लेखक विजेंदर चौहान ने जो करै गीता का मनन, पावै परम सत्कार सै, सुनीता गर्ग ने दिल उसी दिन से मेरा परेशान है, उसके नैनों में जब से नमीं देख ली, अमिता मगोत्रा ने की गल्ल सुनावां तैनू रंगा दी अड़िए, गल्ला दा सिरा कित्थों फड़िए, गौरव शर्मा ने सात जन्मों की बात करता था, कितनी जल्दी मुकर गया है वो। मेरे दिल से उतर गया है वो, गरिमा गर्ग ने सताओ न हमें दिलवर, हमें दिल की बीमारी है, अनिल चिंतक ने समय बढ़ाता दूरियां, समय बढ़ावे मेल, समय बड़ा बलवान है, समय खिलावे खेल तथा नवोदित कवयित्री प्रियंका बिश्नोई ने सब रिश्ते बदल जाते हैं, पर मां का प्यार कभी नहीं बदलता आदि कवितायेँ पढ़ीं।



