पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के स्थानांतरण आदेश को किया रद्द
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) के स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया, जिसे दूसरी नगर निगम में बिल्डिंग इंस्पेक्टर के पद पर तैनात किया गया था। अदालत ने इस आदेश को सेवा नियमों के विपरीत और जारी करने वाले अधिकारी की अधिकारिता से बाहर बताया। यह निर्णय जस्टिस हरप्रीत सिंह ब्रार ने सिविल रिट पिटिशन नंबर 18055 ऑफ 2022, महेंद्र सिंह बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले में सुनाया। याचिकाकर्ता महेंद्र सिंह को जून 2020 में फरीदाबाद नगर निगम में जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) नियुक्त किया गया था। बाद में 10 अगस्त 2022 को उन्हें पानीपत नगर निगम में स्थानांतरित कर बिल्डिंग इंस्पेक्टर बना दिया गया। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि बिल्डिंग इंस्पेक्टर का पद सिविल इंजीनियरिंग से संबंधित है और इसके लिए विशेष योग्यता आवश्यक होती है, जो एक मैकेनिकल इंजीनियर के पास नहीं होती। उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश हरियाणा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन कर्मचारियों के सेवा नियम, 1998 के तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया।
अदालत ने नियमों की समीक्षा करते हुए स्पष्ट किया कि जूनियर इंजीनियर (सिविल), मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल अलग-अलग कैडर हैं और उनकी योग्यता व कार्यक्षेत्र भी अलग हैं। ऐसे में मैकेनिकल इंजीनियर को सिविल कार्यों के लिए तैनात करना नियमों के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसा स्थानांतरण तकनीकी विशेषज्ञता के अंतर के कारण जनहित के विरुद्ध हो सकता है। अंततः हाईकोर्ट ने स्थानांतरण आदेश रद्द करते हुए सक्षम प्राधिकारी को नियमों के अनुसार नया आदेश जारी करने की छूट दी ।



