शनिदेव व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और मेहनत से आगे बढ़ने की सीख देते हैं : ज्योतिषाचार्य पूनम शर्मा

शनिदेव व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और मेहनत से आगे बढ़ने की सीख देते हैं : ज्योतिषाचार्य पूनम शर्मा 
शनि जयंती : कर्म, न्याय और सेवा का महापर्व 16 मई को
चंडीगढ़ : इस वर्ष शनि जयंती 16 मई 2026, शनिवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में भगवान शनिदेव को न्याय का देवता और कर्मफल दाता माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं तथा जीवन में अनुशासन, धैर्य, सत्य और परिश्रम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
शनि जयंती के अवसर पर देशभर के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, दान-पुण्य एवं सेवा कार्य आयोजित किए जाएंगे। श्रद्धालु शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए व्रत रखेंगे और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेंगे। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से किए गए उपाय जीवन की बाधाओं, कष्टों और नकारात्मक प्रभावों को कम करने में सहायक होते हैं।
ज्योतिषाचार्य पूनम शर्मा के अनुसार शनिदेव व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और मेहनत से आगे बढ़ने की सीख देते हैं। यदि व्यक्ति ईमानदारी, सत्य और अच्छे कर्मों का पालन करे, तो शनिदेव की कृपा से जीवन में स्थिरता, सफलता और सम्मान प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि “शनि केवल दंड नहीं देते, बल्कि व्यक्ति को कर्म और सत्य का महत्व भी सिखाते हैं।”
शनि जयंती पर किए जाने वाले प्रमुख उपाय
पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
“ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करना लाभकारी माना गया है।
काले तिल, उड़द दाल, सरसों का तेल और काले वस्त्र का दान करना शुभ फलदायी माना जाता है।
जरूरतमंद, गरीब एवं बुजुर्ग लोगों की सेवा करने का विशेष महत्व बताया गया है।
हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
कौवों और काले कुत्तों को भोजन खिलाने की परंपरा भी प्रचलित है।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार शनि जयंती केवल पूजा-अर्चना का पर्व नहीं, बल्कि सेवा, सदाचार और अच्छे कर्मों के महत्व को समझने का भी संदेश देती है।



