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पंजाबी विकिमीडियंस यूजर ग्रुप ने उर्दू विकीसोर्स शुरू किया : रेख्ता फाउंडेशन और ब्रिटिश लाइब्रेरी के साथ साझेदारी की  

पंजाबी विकिमीडियंस यूजर ग्रुप ने उर्दू विकीसोर्स शुरू किया : रेख्ता फाउंडेशन और ब्रिटिश लाइब्रेरी के साथ साझेदारी की 

 

उर्दू साहित्य के लिए एक वैश्विक डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में कार्य करेगा उर्दू विकीसोर्स

 

चण्डीगढ़ : क्षेत्रीय डिजिटल विरासत की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर स्थापित करते हुए पंजाबी विकिमीडियंस यूजर ग्रुप ने आज उर्दू विकीसोर्स के शुभारंभ की घोषणा की। यह एक मुफ्त, ओपन सोर्स विकिमीडिया प्रोजेक्ट है जो अब उर्दू साहित्य के लिए एक वैश्विक डिजिटल लाइब्रेरी के रूप में कार्य करेगा। आज चण्डीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस वार्ता में मुक्त ज्ञान के समर्थकों के इस समुदाय ने बताया कि यह उपलब्धि स्वयंसेवकों और भागीदारों के गहन सहयोग से संभव हुई है। उन्होंने पंजाबी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के डिजिटल विकास के लिए सरकारी सहायता की आवश्यकता पर भी बल दिया, जो वर्तमान कॉपीराइट कानूनों के कारण सीमित है।

 

उर्दू विकीसोर्स का शुभारंभ दक्षिण एशियाई साहित्यिक इतिहास के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। विकिमीडिया फाउंडेशन में कंटेंट इनेबलमेंट टीम के प्रबंधक सतदीप गिल ने बताया कि इस मील के पत्थर को रेख्ता फाउंडेशन और ब्रिटिश लाइब्रेरी के जरिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का समर्थन मिला।

उन्होंने बताया कि रेख्ता फाउंडेशन ने उर्दू साहित्य के दुनिया के सबसे बड़े संग्रह ने 10 दुर्लभ उर्दू पुस्तकें साझा करके इस परियोजना को गति दी। इनमें मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित ‘रामायण’ और मज़हर अली खान विला की ‘बेताल पच्चीसी’ का उर्दू अनुवाद शामिल है। इसके अलावा ब्रिटिश लाइब्रेरी ने 7 दुर्लभ ऐतिहासिक ग्रंथ साझा किए, जिन्हें टू सेंचुरीज ऑफ इंडियन प्रिंट (2016-2022) परियोजना के तहत डिजिटल किया गया था। इनमें अरबी कहानियों की किताब अलिफ लैला और मलिक मोहम्मद जायसी की कविता प‌द्मावत का 19वीं शताब्दी का संस्करण शामिल है।

 

विकीसोर्स की शक्ति : स्कैन को खोजने योग्य बनाना

 

सामुदायिक समन्वयक कुलदीप सिंह ने बताया कि विकीसोर्स डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में अद्वितीय है। साधारण इमेज आर्काइव के विपरीत, यह स्कैन किए गए दस्तावेजों को डिजिटल रूप से सर्चेबल टेक्स्ट में बदल देता है। इससे शोधकर्ताओं और छात्रों के लिए पहली बार सदियों पुरानी किताबों में विशिष्ट शब्दों को खोजना संभव हो गया है।

 

उन्होंने बताया कि चरण सिंह, डॉ. पवन टिब्बा (प्रिंसिपल, एनआरएलसी, पटियाला) और नाटककार बलराम बोधी जैसे स्वयंसेवकों की टीम ने पिछले एक साल से इस पर लगातार काम किया है।

 

पंजाब सरकार से माँगा सहयोग

 

पंजाबी विकिमीडियंस ने पंजाब सरकार से स्थानीय विरासत को बढ़ावा देने के लिए कॉपीराइट नियमों में ढील देने की अपील की। उन्होंने तमिलनाडु सरकार के सफल मॉडल का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने क्राउन कॉपीराइट से ओपन-एक्सेस ढांचे में बदलाव ने वहां की डिजिटल विरासत को बदल दिया है।

 

उन्होंने पंजाब सरकार से ओपन एक्सेस पॉलिसी बना कर सरकारी अकाद‌मियों (जैसे पंजाब साहित्य अकादमी) द्वारा वित्त पोषित सभी पुस्तकों और शोधों को सीसी-बाय-एसए लाइसेंस के तहत जारी करने तथा स्कूलों में डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम के तहत शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम लागू करने की मांगे की ताकि वे विकिपीडिया पर डिजिटल पंजाब के निर्माण में मदद कर सकें।

 

सतदीप गिल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के युग में, जिन भाषाओं का डिजिटल फुटप्रिंट मजबूत नहीं है, उनके पीछे छूट जाने का खतरा है। ओपन लाइसेंस वाला टेक्स्ट एआई मॉडल के लिए ईंधन की तरह है। इसके बिना, भविष्य की तकनीकों में पंजाबी का सही प्रतिनिधित्व करना मुश्किल होगा।

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

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