अगर लोकसभा-राज्यसभा में भी टेबल एजेंडे की यही प्रथा चली तो लोकतंत्र कैसे चलेगा? : राजबीर सिंह भारतीय

अगर लोकसभा-राज्यसभा में भी टेबल एजेंडे की यही प्रथा चली तो लोकतंत्र कैसे चलेगा? : राजबीर सिंह भारतीय

16 टेबल एजेंडों और करीब ₹227 करोड़ के प्रस्ताव पर उठे सवाल — चंडीगढ़ की जनता-जनार्दन और बुद्धिजीवियों का भी यही सवाल, प्रशासन दे जवाब:
चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम की 31 जुलाई की बैठक में लाए गए 16 टेबल एजेंडों, जिनमें एक प्रमुख प्रस्ताव लगभग ₹227 करोड़ का बताया जा रहा है, को लेकर मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि यदि लोकसभा, राज्यसभा और देश की विधानसभाओं में भी महत्वपूर्ण और करोड़ों रुपये के प्रस्ताव बिना पर्याप्त पूर्व सूचना के टेबल पर रखकर जल्दबाजी में पारित होने लगें, तो लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं कैसे काम करेंगी? नगर निगम सदन भी जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की संस्था है। प्रत्येक महत्वपूर्ण एजेंडे पर पार्षदों को पहले से जानकारी, अध्ययन और खुलकर चर्चा का पूरा अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी कौन-सी आपात स्थिति थी कि 16 महत्वपूर्ण एजेंडों को इतनी जल्दबाजी में टेबल एजेंडा के रूप में सदन में लाना पड़ा? यदि वास्तव में जनहित में तत्काल निर्णय जरूरी था तो विशेष सदन बुलाकर सभी पार्षदों को एजेंडे पहले उपलब्ध कराए जा सकते थे और पर्याप्त समय देकर चर्चा कराई जा सकती थी। बिना पर्याप्त चर्चा और पूर्व सूचना के करोड़ों रुपये के प्रस्ताव सदन में लाना सदन की गरिमा, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

राजबीर सिंह भारतीय ने कहा, “क्या नगर निगम सदन इतना कमजोर है कि करोड़ों रुपये के प्रस्तावों पर जनप्रतिनिधियों को पहले से जानकारी और चर्चा का अवसर नहीं दिया जा सकता? सदन जनता के चुने प्रतिनिधियों की संस्था है, उसे केवल औपचारिकता का मंच नहीं बनाया जा सकता।”
उन्होंने कहा कि 31 जुलाई की कार्यवाही अब नगर निगम के रिकॉर्ड का हिस्सा है। चिंता इस बात की है कि कहीं यह प्रक्रिया भविष्य में एक परंपरा न बन जाए। यदि महत्वपूर्ण प्रस्ताव इसी तरह बिना पर्याप्त चर्चा के लाए जाने लगे तो इससे जनता का नगर निगम सदन और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कमजोर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ नगर निगम बजट और आर्थिक संसाधनों की कमी की बात करता है, दूसरी तरफ ऐसी प्रक्रिया के कारण दोबारा सदन बुलाने की नौबत आती है। एक दिन की सदन कार्यवाही पर लगभग ₹2 लाख खर्च होने की बात सामने आती है। ऐसे में दोबारा बैठक पर होने वाले अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए, क्योंकि यह पैसा जनता की गाढ़ी कमाई से आता है।
राजबीर सिंह भारतीय ने मांग की कि सभी 16 टेबल एजेंडों, विशेषकर लगभग ₹227 करोड़ के प्रस्ताव की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। यह पता लगाया जाए कि इन्हें टेबल एजेंडा के रूप में लाने का निर्णय किस स्तर पर हुआ, संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों ने किस आधार पर प्रक्रिया अपनाई और क्या निर्धारित नियमों का पालन हुआ। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदारी तय कर दोषियों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मेरा सवाल नहीं है। चंडीगढ़ की जनता-जनार्दन और बुद्धिजीवी वर्ग के मन में भी यही सवाल है—आखिर करोड़ों रुपये के 16 टेबल एजेंडों को इतनी जल्दबाजी में सदन में लाने की जरूरत क्या थी? प्रशासन इस पर जवाब दे।”
राजबीर सिंह भारतीय ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने का मामला नहीं, बल्कि सदन की गरिमा, पारदर्शिता, जनप्रतिनिधियों के अधिकार और जनता के पैसे की जवाबदेही का सवाल है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्थाओं से लेकर नगर निगम तक यदि प्रक्रिया कमजोर होगी तो धीरे-धीरे जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था पर विश्वास कम होगा। इसलिए पूरे मामले में सब कुछ साफ होना चाहिए और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय
वरिष्ठ उपाध्यक्ष
मनीमाजरा ईडब्ल्यूएस रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन
मनीमाजरा, चंडीगढ़



