कलियुग में केवल नाम सुमिरन से ही मोक्ष संभव है : विवेक जोशी जी

कलियुग में केवल नाम सुमिरन से ही मोक्ष संभव है : विवेक जोशी जी
श्री हरि सिमरण सेवा समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन उमड़ा जनसैलाब
चण्डीगढ़ : श्री हरि सिमरण सेवा समिति द्वारा आयोजित भव्य श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। कथा व्यास आचार्य श्री विवेक जोशी जी ने आज के सत्र में भगवान के विभिन्न अवतारों, भक्त ध्रुव की अटूट भक्ति और ईश्वर सुमिरन के महत्व पर प्रकाश डाला ओर बताया कि कलियुग में केवल नाम सुमिरन से ही मोक्ष संभव है।
समिति के पदाधिकारियों ने समाज सेवा और प्रभु भक्ति को जीवन का असली आधार बताया।
श्रीमद्भागवत कथा के पावन प्रसंगों को सुनकर पंडाल में उपस्थित सभी श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। भजनों पर झूमते भक्तों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। कथा के समापन पर मुख्य यजमानों द्वारा महाआरती की गई और सभी उपस्थित श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।

समिति के अध्यक्ष कांति देवी ने सभी क्षेत्रवासियों से अनुरोध किया है कि वे अगले दिनों में भी इसी प्रकार अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर पुण्य के भागीदार बनें। आज कथा में पूनम कोठारी, कांति देवी , राज रानी, महीपाल खाती, बस्वानंद, तेजस्वी मठपाल, गोपाल, पुष्प, आरती, कुसुम, प्रीति, तरुणा, कीर्ति , मोहन व सभी समिति के मेंबर उपस्थित रहे।


