लोग दर्द को लफ्ज़ों में पिरोने लगे हैं, मेरे शहर में मुशायरे खूब होने लगे हैं…

लोग दर्द को लफ्ज़ों में पिरोने लगे हैं, मेरे शहर में मुशायरे खूब होने लगे हैं…
चंडीगढ़: आज प्राचीन कला केंद्र सेक्टर 35 में संस्कार भारती और बृहस्पति कला केंद्र चंडीगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में ‘साहित्य सरिता’ काव्य गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अनीश गर्ग, वाइस चेयरमैन, चंडीगढ़ साहित्य अकादमी और वरिष्ठ साहित्यकार प्रेम विज रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध रंगकर्मी एवं साहित्यकार राजेश आत्रेय ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मंजू चौहान ने बखूबी निभाया।

युवा कवयित्री कीर्ति सोनी काकड़ौद ने कहा,” शायद मिल जाती आज़ादी तुझे भी, और हो जाते तेरे कुछ-कुछ ख़्वाब मुकम्मल”,
विकास सैनी ने पढ़ा,”मन की डोरी मन से बंधी,
फिर भी क्यों ये छूट जाती है”,
नीतू कुमारी”नितुंजलि” ने सरहद पर तैनात सैनिकों पर पंक्तियां रखीं,”
सरहद पर जो भाई खड़े, उनको एक राखी भेजूंगी,
तुम संभालो भाई सीमा पर
अंदर मै संभालूँगी ॥
कभी हंसी के संग उड़ती,
कभी चुपचाप टूट जाती है”,
डा अनीश गर्ग ने तालियां बटोरते हुए कहा, “लोग दर्द को लफ्ज़ों में पिरोने लगे हैं, मेरे शहर में मुशायरे खूब होने लगे हैं,
देशभक्ति पर अपना गीत पेश करते हुए कविवर प्रेम विज ने कहां – ‘धूप तेरी हे मातृभूमि हम, अपने शीश लगाएंगे, जान पर अपनी खेल के भी मां, तेरा कर्ज चुकाएंगे”,
पटियाला से आयीं कवयित्री सरिता नौहरिया ने कुछ यूं कहा,”हमको तेरे प्यार ने क्या-क्या बना दिया, अच्छे भले थे दीवाना बना दिया”,

मुरारीलाल अरोड़ा ने पढ़ा,
घर में बैठे राम भजो, मर्यादा के गुण गाइए”,
श्याम सुंदर सखा ने पढ़ा,”
बलिदान तेरा कोई कैसे
भूल पाएगा, देश-हित में जो तू सर्वस्व लुटाएगा”,
पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट कामना ने पढ़ा, “अब तू सिर्फ हमें नहीं संभालता, हर घर की रक्षा करता है।
जो भूगोल के नक्शे में उलझ जाया करता था, अब सुरक्षित देश का नक्शा करता है”,
युवा कवयित्री दीया ने अपनी मां पर कुछ यूं पंक्तियां रखीं,” मेरी मां रसोई घर में नए-नए प्रयोग करती है, व्यंजनों में ममत्व और भावों का संयोग करती है”
खुशनूर कौर ने पंजाबी में नज़्म सुनाई,”यह मेरी होंद दी लड़ाई है जम्मण तों पिच्छों, किन्नी वार मरना ते जम्मणा पैंदा जिउंदे रहिण लिए”
परमजीत सिंह सूफ़ी ने अपने जीवन यात्रा पर पढ़ा,”पदचाप कुछ थका-सा, अनमना-सा
सपनों की गठरी लादकर
मैं चल रहा हूँ”
राजेश कपिल ने कहा,
“दिल लगा के देखा,
प्यार जाता के देखा,
कुछ ना हासिल हुआ
सब कुछ लुटा के देखा,”
कवि विनोद कश्यप ने काव्य गोष्ठी में रंग भरते हुए कहा,”चांदनी ने चांद से सौदा किया मैं चुप रहा।
चांद ग़ैरों से बुरा , मैं भी कहां अपना हुआ।
इस कार्यक्रम में प्रेम विज, डा अनीश गर्ग, वीरेंद्र राय, मंजू चौहान, कीर्ति, रोहित सिंह,किरण आहूजा, कामिनी सिंह, ज्योति शर्मा, विकास सैनी, नीतू कुमारी, विनोद कश्यप, राजेश कपिल, राकेश कुमार रसिक, खुशनूर कौर, दीया, कुलभूषण गोस्वामी, सरिता नौहरिया मैं अपनी दमदार प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के अंत में संस्कार भारती, चंडीगढ़ के अध्यक्ष यशपाल ने सबका धन्यवाद ज्ञापित किया।


