जब प्रेम सच्चा हो और भक्ति अडिग हो, तो स्वयं भगवान उसे सफल बनाते हैं। : कथा व्यास पूज्य श्री बांकेबिहारी पचौरी जी महाराज

जब प्रेम सच्चा हो और भक्ति अडिग हो, तो स्वयं भगवान उसे सफल बनाते हैं। : कथा व्यास पूज्य श्री बांकेबिहारी पचौरी जी महाराज

चण्डीगढ़ : प्राचीन शिव मंदिर सेक्टर 23-डी में हो रही श्रीमद्भागवत कथा के पावन अवसर पर कथा व्यास पूज्य श्री बांकेबिहारी पचौरी जी महाराज, वृंदावन धाम के श्रीमुख से कंस वध एवं श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत वर्णन किया गया। महाराज जी ने बताया कि जब अधर्म और अत्याचार अपनी सीमाएं पार कर देता है, तब भगवान धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस जैसे अत्याचारी का अंत कर सत्य एवं धर्म की विजय का संदेश दिया। रुक्मिणी विवाह का वर्णन करते हुऐ कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को हराकर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका में लाकर उनका विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया।

उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल धर्म स्थापना और युद्ध विजय तक सीमित नहीं था, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना से भी जुड़ा हुआ था। उनके जीवन की अनेक लीलाओं में से एक सबसे महत्वपूर्ण घटना थी रुक्मिणी विवाह। यह केवल एक राजकुमारी और एक राजकुमार का विवाह नहीं था, बल्कि यह सच्चे प्रेम, भक्ति और समर्पण की विजय की कहानी है।
रुक्मिणी ने भगवान श्रीकृष्ण को मन, वचन और कर्म से अपना पति मान लिया था, लेकिन उनके भाई रुक्मी ने उनके विवाह को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया। फिर भी, जब प्रेम सच्चा हो और भक्ति अडिग हो, तो स्वयं भगवान उसे सफल बनाते हैं। यही सिद्धांत इस कथा का मूल है।
इसके पश्चात श्रीकृष्ण विवाह प्रसंग का मधुर एवं मनोहारी वर्णन सुन श्रद्धालु भक्ति भाव में सराबोर हो उठे। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन एवं जयघोष के साथ दिव्य वातावरण का अनुभव किया। पूरा पंडाल “राधे-राधे” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा।
इस पावन अवसर पर आयोजक समस्त मंदिर सभा के सदस्य मौजूद रहे तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा श्रवण का पुण्य लाभ प्राप्त किया।



