राकेश शर्मा : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज के 61वें स्थापना दिवस समारोह में संस्थान को ₹11 लाख की अनुदान राशि देने की घोषणा की

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज के 61वें स्थापना दिवस समारोह में संस्थान को ₹11 लाख की अनुदान राशि देने की घोषणा क
विद्यार्थीगण प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विज़न में सक्रिय योगदान दें : नायब सिंह सैनी
चण्डीगढ़ : श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज, सेक्टर 26 के 61वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय समारोह के समापन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस अवसर की गरिमा बढ़ाई। लगभग 3,000 छात्रों, शिक्षकों, पूर्व छात्रों एवं आमंत्रित अतिथियों की विशाल सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने मूल्य-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने तथा सिख गुरुओं की विरासत के संरक्षण में कॉलेज की भूमिका की सराहना की। उन्होंने सिख गुरुओं की समृद्ध विरासत, शौर्य और सर्वोच्च बलिदानों पर विस्तार से प्रकाश डाला तथा अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध दृढ़ता से खड़े रहने के उनके शाश्वत संदेश को रेखांकित किया।
युवा निर्माण को राष्ट्र निर्माण और संसार निर्माण की आधारशिला बताते हुए उन्होंने शिक्षा, कौशल विकास और सभी युवाओं के लिए समान अवसरों के महत्व पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने हरियाणा में उच्च शिक्षा को सुदृढ़ करने तथा शोध एवं नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार द्वारा उठाए गए प्रमुख कदमों की जानकारी दी, जिनमें शोध संस्थानों को समर्थन तथा कौशल-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहन शामिल है।
लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने के लिए राज्य की दृढ़ प्रतिबद्धता पर बल देते हुए उन्होंने शिक्षा के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को रेखांकित किया। शिक्षा संस्थानों को रोजगार सृजन, खेल प्रोत्साहन और नवाचार के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने विद्यार्थियों से प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के विज़न में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। प्रोत्साहन स्वरूप उन्होंने कॉलेज की शैक्षणिक पहलों के समर्थन हेतु ₹11 लाख की अनुदान राशि की घोषणा की। उन्होंने कॉलेज की समग्र पहलों, अनुशासित शैक्षणिक वातावरण, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के माध्यम से राष्ट्र निर्माण के प्रति उसकी सतत प्रतिबद्धता की सराहना की और छात्रों एवं शिक्षकों से आत्मीय संवाद किया।
मुख्यमंत्री सैनी का प्रबंधन समिति, सिख एजुकेशनल सोसायटी (एसईएस) के सदस्यों द्वारा सिरोपा भेंट कर गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इस अवसर पर अध्यक्ष ( प्रेसिडेंट) सरदार गुरदेव सिंह, आईएएस (सेक्रेटरी) (सेवानिवृत्त), उपाध्यक्ष (वाइस प्रेसिडेंट) डॉ. बिरेन्द्र कौर, सचिव कर्नल (सेवानिवृत्त) जसमेर सिंह बाला, उपाध्यक्ष अधिवक्ता (जॉइंट सेक्रेटरी) सरदार करनदीप सिंह चीमा तथा प्राचार्य डॉ. जसविंदर सिंह उपस्थित रहे।
प्राचार्य डॉ. जसविंदर सिंह ने समारोह की शोभा बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया तथा उन्हें कॉलेज और विद्यार्थियों की उपलब्धियों से अवगत कराया। उन्होंने सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए सभी छात्रों और स्टाफ का भी धन्यवाद किया। आध्यात्मिक गरिमा से परिपूर्ण इस दिवस की शुरुआत श्री अखंड पाठ साहिब के भोग से हुई, जिसके पश्चात भाई महाबीर सिंह जी, हजूरी रागी, श्री दरबार साहिब, अमृतसर द्वारा शबद कीर्तन प्रस्तुत किया गया, जिसमें पूर्व छात्र, कॉलेज के शिक्षक और छात्र भी सम्मिलित हुए। समारोह के दौरान कॉलेज की वार्षिक पत्रिका अगम्मी ज्योत, कॉलेज कैलेंडर तथा कॉलेज प्लानर का विमोचन किया गया। पंजाबी बस्ता घर, पटियाला द्वारा प्रस्तुत गुरमुखी प्रदर्शनी तथा ऑल इंडिया पिंगलवाड़ा चैरिटेबल सोसायटी, अमृतसर द्वारा लगाए गए स्टॉल भी आयोजित किए गए।
शून्य खाद्य अपव्यय और शून्य कचरा परिसर को बढ़ावा देने वाली पहल ने कॉलेज की प्रतिबद्धता को पुनः रेखांकित किया। विश्वविद्यालय एवं कॉलेज स्तर पर शैक्षणिक उपलब्धियां प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों तथा कॉलेज में आयोजित प्रतियोगिताओं के विजेताओं को एसईएस के सदस्यों द्वारा सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन अरदास के साथ हुआ, जिसके उपरांत कॉलेज के छात्रों और स्टाफ द्वारा आयोजित एवं परोसे गए गुरु का लंगर “सेवा” और “संगत” के मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता रहा। एसईएस के अंतर्गत आने वाले अन्य तीन संस्थानों के प्राचार्य और शिक्षकगण ने भी अत्यंत उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
- शैक्षणिक उत्कृष्टता, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर आधारित समग्र शिक्षा के प्रति प्रतिबद्ध इस आयोजन के पूर्ववर्ती दिनों में श्री अखंड पाठ साहिब का आरंभ तथा पगड़ी बांधना, गुरबाणी कंठ और गुरमुखी सुलेख जैसी गुरमत प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। समारोह में प्रो. राजिंदर सिंह द्वारा प्रस्तुत “सरब रोग का औखध नाम” विषयक मन-उपचार कार्यशाला तथा विरासती गतका प्रदर्शन भी शामिल रहा, जिसने सिख संस्कृति की समृद्ध आध्यात्मिक, बौद्धिक और युद्ध विरासत को उजागर किया।



