मनीमाजरा में ₹5,000 चालान विवाद: पार्षद प्रेमलता का हमला—”नगर निगम में चरम पर भ्रष्टाचार, व्यापा


चंडीगढ़ नगर निगम में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार, इंस्पेक्टर राज और दुकानदारों के उत्पीड़न पर स्थानीय पार्षद प्रेमलता ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने निगम की प्रशासनिक कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करते हुए स्पष्ट किया कि छोटे-बड़े व्यापारियों का शोषण किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।


प्रेमलता ने कहा कि व्यापारी अपनी खून-पसीने की कमाई से व्यापार करते हैं और भारी-भरकम टैक्स देकर चंडीगढ़ के विकास में रीढ़ की हड्डी का काम करते हैं। इसके बावजूद यदि नगर निगम के इंस्पेक्टर और अधिकारी आए दिन अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर व्यापारियों को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करेंगे, तो यह सरासर अन्याय है। आज शहर का छोटा-बड़ा हर व्यापारी विभागीय मनमानी और उत्पीड़न के डर में जीने को मजबूर है।
मनीमाजरा में सेनेटरी इंस्पेक्टर दविंदर सिंह रोहिल्ला पर दुकानदार से चालान के नाम पर ₹5,000 नकद लेने के गंभीर आरोपों पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “इस पूरे मामले की दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अगर चालान का नियम था, तो मौके पर ही तुरंत सरकारी रसीद क्यों नहीं काटी गई? शिकायत दर्ज होने के बाद रसीद जारी करने का यह खेल खुद में कई बड़े सवाल खड़े करता है। किसी भी अधिकारी को अपनी वर्दी या पद की धौंस जमाने की इजाजत नहीं दी जाएगी।”
उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वह पूरे चंडीगढ़ के व्यापारियों और छोटे दुकानदारों के साथ चट्टान की तरह खड़ी हैं। किसी भी व्यापारी पर नाजायज दबाव बनाने या उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई, तो वह सड़क से लेकर सदन तक निर्णायक लड़ाई लड़ेंगी।
पार्षद प्रेमलता ने मांग की कि MOH विभाग और सेनेटरी इंस्पेक्टरों की कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच कराई जाए और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर बिना किसी पक्षपात के तुरंत निलंबन व विभागीय कार्रवाई की जाए।
निगम की वर्तमान कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि शहर में लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामले और व्यापारियों की बढ़ती परेशानियां गंभीर चिंता का विषय हैं। निगम के शीर्ष नेतृत्व को इन समस्याओं की सीधी जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत सख्त कदम उठाने चाहिए।
प्रेमलता ने दोटूक शब्दों में कहा कि व्यापारियों का स्वाभिमान और उनके व्यापार की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों की मनमानी और भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना उनका कर्तव्य है और वह अंतिम सांस तक व्यापारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करती रहेंगी।

