पीजीआई में जाली कागजातों के आधार पर सैनिटरी इंस्पेक्टर की भर्ती पर उठे सवाल, संस्थान के अपने विजिलेंस विभाग ने भी कागजातों को जाली बताया पर फिर भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
बसपा ने उठाई न्याय दिलाने की जिम्मेदारी


यदि सुनवाई नहीं हुई तो धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाया जाएगा : स. सुरिंदर सिंह, चण्डीगढ़ बसपा प्रभारी
नतिंदर कुमार के अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता और भर्ती समिति की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग, एससी उम्मीदवार बलकार सिंह ने भी उठाए भेदभाव के सवाल
तत्कालीन रिक्रूटमेंट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. विपन कौशल और वरिष्ठ सैनिटेशन अधिकारी रवि शर्मा की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग

चण्डीगढ़ : पीजीआई, चंडीगढ़ में सैनिटरी इंस्पेक्टर के नियमित पदों के लिए हुई भर्ती अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों और पीजीआई के विजिलेंस विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर नतिंदर कुमार की नियुक्ति तथा उनके द्वारा प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए गए हैं। मामले में वर्ष 2019 में विजिलेंस जांच रिपोर्ट जारी होने के बावजूद कथित तौर पर आगे की कार्रवाई नहीं किए जाने पर भी सवाल खड़े किए गए हैं।
चण्डीगढ़ बसपा के प्रभारी स. सुरिंदर सिंह ने आज चण्डीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उक्त जानकारी देते हुए बताया कि उनके समाज के व्यक्ति के साथ हुए धक्के को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा व एक सप्ताह के भीतर यदि कार्यवाई नहीं हुई तो बसपा अन्य यूनियनों के साथ मिल कर सड़कों पर उतरेगी।
प्रेस वार्ता में उनके साथ स्वास्थ्य विभाग के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. नरेंद्र, पंजाब बसपा के महासचिव राजा राजिंदर सिंह ननहेड़िया, से. भजन सिंह व परमजीत सिंह चम्मा आदि भी उपस्थित रहे।
राजा राजिंदर सिंह ननहेड़िया ने बताया कि प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2012 में सैनिटरी इंस्पेक्टर के नियमित पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई थी। 31 अक्टूबर 2014 को योग्य और अयोग्य उम्मीदवारों की सूची तैयार की गई, जिसमें बलकार सिंह को योग्य घोषित किया गया था। हालांकि, योग्य घोषित होने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ। दूसरी ओर, चयनित उम्मीदवार नतिंदर कुमार के अनुभव प्रमाणपत्र को लेकर बाद में शिकायत दर्ज करवाई गई।
शिकायत के आधार पर पीजीआई के मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) ने मामले की जांच की। शिकायत और जांच से संबंधित दस्तावेजों के पृष्ठ संख्या 70/95 के हवाले से दावा किया गया है कि नतिंदर कुमार का अनुभव प्रमाणपत्र अप्रमाणित पाया गया था। बताया गया है कि 13 नवंबर 2019 को विजिलेंस विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट जारी की थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि जांच में अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता स्थापित नहीं हुई थी, तो संबंधित अधिकारियों ने इसके बाद क्या कार्रवाई की?
मामले में यह भी सामने आया है कि पीजीआई सफाई कर्मचारी यूनियन ने 4 सितंबर 2018 को तत्कालीन निदेशक और उपनिदेशक को शिकायत भेजकर इस मामले को उठाया था। इसके बावजूद अब तक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की जा रही है।
राजा राजिंदर सिंह ननहेड़िया के मुताबिक विवाद को और गंभीर बनाते हुए दस्तावेजों के पृष्ठ संख्या 71/96 का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, डॉ. पल्लव राय ने 11 जनवरी 2026 को मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को पांच दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। अब सवाल यह है कि इन निर्देशों पर क्या कार्रवाई हुई और संबंधित रिपोर्ट किस स्तर पर लंबित है?
मामले में वर्ष 2012 की भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी तत्कालीन रिक्रूटमेंट कमेटी के अध्यक्ष डॉ. विपन कौशल और वरिष्ठ सैनिटेशन अधिकारी रवि शर्मा की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि जब भर्ती समिति की जिम्मेदारी उम्मीदवारों के दस्तावेजों और योग्यता की जांच करना था, तो अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता की जांच किस आधार पर की गई थी और इसमें कथित चूक कैसे हुई?
इसके अलावा, बलकार सिंह ने चयन प्रक्रिया में जातिगत भेदभाव के आरोप भी लगाए हैं। अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से संबंधित बलकार सिंह को योग्य घोषित किए जाने के बावजूद चयन नहीं होने के कारणों की जांच कराने की मांग की गई है। यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि कहीं चयन प्रक्रिया में उनके साथ जाति के आधार पर भेदभाव तो नहीं किया गया।
मामले को लेकर पीजीआई निदेशक और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से सात प्रमुख सवाल उठाए गए हैं। इनमें नतिंदर कुमार के अनुभव प्रमाणपत्र की वास्तविक स्थिति, 2019 की विजिलेंस रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई, रिपोर्ट निदेशक तक पहुंचने, डॉ. पल्लव राय के जनवरी 2026 के निर्देशों के पालन और बलकार सिंह के चयन नहीं होने के कारणों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग
मामले को लेकर मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच एजेंसी से जांच करवाई जाए। नतिंदर कुमार के अनुभव प्रमाणपत्र की वास्तविक जारीकर्ता संस्था से दोबारा पुष्टि करवाई जाए तथा वर्ष 2012 की भर्ती से लेकर अब तक के सभी रिकॉर्ड और विजिलेंस फाइल की समीक्षा की जाए। साथ ही जातिगत भेदभाव के आरोपों की स्वतंत्र जांच करवाकर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाया है कि जब अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर विजिलेंस जांच में सवाल उठाए जाने और कार्रवाई के निर्देश दिए जाने का दावा किया जा रहा है, तो इतने वर्षों बाद भी मामले में स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हुई? उन्होंने पीजीआई प्रशासन से पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने, जांच की मौजूदा स्थिति सार्वजनिक करने और सभी संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की हैl
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