देश का युवा सड़कों पर है, यह केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की पुकार है: राजबीर सिंह भारतीय

देश का युवा सड़कों पर है, यह केवल एक आंदोलन नहीं बल्कि राष्ट्र के भविष्य की पुकार है: राजबीर सिंह भारतीय
देश का युवा सड़कों पर है, यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चेतावनी है: राजबीर सिंह भारतीय
युवा सड़कों पर उतर जाए तो समझिए देश का भविष्य सवाल पूछ रहा है: राजबीर सिंह भारतीय
NEET पेपर लीक ने युवाओं का विश्वास तोड़ा, संवाद ही लोकतंत्र का सबसे बड़ा समाधान है: राजबीर सिंह भारतीय
देश का भविष्य सड़कों पर: लोकतंत्र में युवाओं पर बर्बरता दुर्भाग्यपूर्ण एवं निंदनीय
चंडीगढ़। ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन, सेक्टर-13, चंडीगढ़ के अध्यक्ष राजबीर सिंह भारतीय ने देशभर में शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मानजनक भविष्य की मांग को लेकर हो रहे युवा आंदोलनों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जब किसी देश का युवा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर हो जाए, तो यह केवल एक आंदोलन नहीं होता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य की एक गंभीर चेतावनी होती है।
उन्होंने कहा कि भारत की आजादी लाखों युवाओं के बलिदान की नींव पर खड़ी है। भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद और असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने जिस भारत का सपना देखा था, उसमें युवाओं को अवसर, सम्मान, न्याय और समान अधिकार मिलने थे। आज यदि वही युवा शिक्षा, रोजगार, निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और अपने भविष्य की सुरक्षा की मांग कर रहा है, तो उसकी आवाज़ को लोकतंत्र की आवाज़ समझकर सुना जाना चाहिए।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि NEET पेपर लीक जैसी घटनाओं ने लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों का विश्वास गहराई से प्रभावित किया है। वर्षों की मेहनत, माता-पिता के त्याग और युवाओं के सपनों पर जब प्रश्नचिह्न लग जाता है, तब केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता कठघरे में खड़ी हो जाती है। यदि युवा यह महसूस करने लगे कि उसकी मेहनत से अधिक व्यवस्था की कमियां उसके भविष्य का फैसला करेंगी, तो यह किसी भी राष्ट्र के लिए अत्यंत चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने कहा कि हाल के समय में अनेक छात्रों की आत्महत्या और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौतों की खबरों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। चाहे इन घटनाओं के कारण अलग-अलग हों, लेकिन यह स्पष्ट है कि युवाओं पर बढ़ता मानसिक, सामाजिक और शैक्षणिक दबाव राष्ट्रीय चिंता का विषय है। हर युवा का जीवन देश की अमूल्य पूंजी है और उसे निराशा की ओर धकेलने वाली परिस्थितियों को रोकना सरकार, समाज और सभी संस्थाओं की साझा जिम्मेदारी है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि हाल के आंदोलनों में “कॉकरोच” शब्द भी एक प्रतीक बनकर सामने आया है। यदि देश का युवा स्वयं को अपमानित, उपेक्षित या अनसुना महसूस कर रहा है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। किसी भी लोकतंत्र की ताकत अपने युवाओं के सम्मान और विश्वास में होती है, न कि उनकी आवाज़ को दबाने में।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति संवाद है। इतिहास गवाह है कि बड़े से बड़े जनआंदोलनों का समाधान बातचीत, संवेदनशीलता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से निकाला गया। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतांत्रिक परंपराएं और जनता का विश्वास हमेशा सर्वोपरि रहना चाहिए।
“लोकतंत्र में सरकारें जनता के द्वारा और जनता के कल्याण के लिए चुनी जाती हैं। जब देश का होनहार युवा अपने लोकतांत्रिक अधिकारों और ऐतिहासिक स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों के भारत की मांग करता है, तो संवाद के बजाय लाठी-गोली का रास्ता अपनाना बेहद चिंतनीय है। इतिहास गवाह है कि पूर्ववर्ती सरकारों—चाहे पं. जवाहरलाल नेहरू हों, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, पी.वी. नरसिम्हा राव या डॉ. मनमोहन सिंह—सभी ने आंदोलनों के दौरान संवाद का रास्ता खुला रखा। लेकिन आज किसान आंदोलन से लेकर युवा आंदोलनों तक, संवादहीनता का माहौल बनाया जा रहा है।”
— राजबीर सिंह भारतीय
उन्होंने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं के विरुद्ध बार-बार बल प्रयोग, आंसू गैस, पानी की बौछार या अन्य कठोर उपायों की तस्वीरें सामने आती हैं, तो यह समाज में चिंता पैदा करती हैं। किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में बल प्रयोग अंतिम विकल्प होना चाहिए, पहला नहीं। सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने नागरिकों, विशेषकर युवाओं की बात सुनना, उनके साथ संवाद करना और उनकी समस्याओं का संवेदनशील समाधान करना है।
राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि युवा देश से विशेषाधिकार नहीं मांग रहा, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त समान अवसर, निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, सुरक्षा और अपने भविष्य का विश्वास मांग रहा है। यदि इन मूलभूत अपेक्षाओं के लिए भी युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह हम सभी के लिए आत्मचिंतन का विषय है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि युवाओं के आंदोलनों को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से न देखा जाए, बल्कि उनकी वास्तविक समस्याओं और पीड़ा को समझते हुए तत्काल सार्थक संवाद शुरू किया जाए। परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता, पेपर लीक जैसे मामलों में त्वरित और कठोर कार्रवाई, युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान तथा रोजगार और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस सुधार समय की आवश्यकता हैं।
अंत में राजबीर सिंह भारतीय ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ताकत उसकी सेना नहीं, उसकी युवा शक्ति होती है। यदि युवा निराश होगा तो देश का भविष्य भी असुरक्षित होगा। इसलिए समय की मांग है कि टकराव नहीं, संवाद हो; दमन नहीं, समाधान हो; अविश्वास नहीं, विश्वास हो। यही लोकतंत्र की असली पहचान है और यही भारत के उज्ज्वल भविष्य का मार्ग भी।
जारीकर्ता:
राजबीर सिंह भारतीय
अध्यक्ष
ऑल मनीमाजरा रेजिडेंट्स एंड वेलफेयर एसोसिएशन
सेक्टर-13, चंडीगढ़


