संवाद साहित्य मंच के आयोजन में कवियों ने बांधा समां, डॉ. अलका कांसरा सम्मानित

कविताओं, भावनाओं और साहित्यिक सरोकारों से सजी शाम
संवाद साहित्य मंच के आयोजन में कवियों ने बांधा समां, डॉ. अलका कांसरा सम्मानित

चण्डीगढ़ : प्रसिद्ध कवयित्री अलका कांसरा की हाल ही में हिंदी और अंग्रेज़ी में नई पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। इसी उपलक्ष्य में उनके निवास स्थान पर संवाद साहित्य मंच के बैनर तले एक साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के कई साहित्यकारों एवं कवियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में प्रसिद्ध समाजसेवी के के शारदा की गरिमामयी उपस्थिति विशेष आकर्षण रही। इस अवसर पर अलका कांसरा ने अपने नवप्रकाशित काव्य संग्रह ‘मैं हूं स्वयंसिद्धा’ से पगडंडियां, लहरें, ढलान, गंगा, इंद्रधनुष और पहाड़ जैसी भावपूर्ण कविताओं का प्रभावशाली पाठ कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी कविता ‘गंगा’ की पंक्तियां —गंगा घाट / आरती के बोल / घंटियों की गूंज / पिघल कर / सोना हुआ सूरज / आन गिरा गंगा में / कर देता उसे पवित्र” — ने वातावरण को आध्यात्मिक भाव से भर दिया। कवि प्रेम विज ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा —जब से मुझ में समझदारी आ गई है / लोगों की पहचान भी आ गई है।विजय कपूर ने रचना प्रस्तुत करते हुए कहा- मैं हूँ स्वयंसिद्धा,न मैं किसी के द्वारा खींची गई लकीर हूँ, न किसी और के, मौन की गूँज। वहीं डॉ. विनोद कुमार शर्मा ने ‘फूल’ शीर्षक कविता के माध्यम से जीवन में प्रेम और सौंदर्य का संदेश दिया। उनकी पंक्तियां —बिना फूल शोभा देते नहीं बाग, सुंदर सफर है फूलों से सजा हो मार्ग।कार्यक्रम में भरत कांसरा, राज विज, परमिंदर सोनी, कंवल सोनी, डॉ निर्मल सूद, राजिंदर कौर, संगीता शर्मा कुंद्रा, विजय कपूर सहित अनेक साहित्य प्रेमियों ने सहभागिता की। समारोह के अंत में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. अलका कांसरा को सम्मानित भी किया गया।




