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Ravinder Popli : दुःख कोई दंड नहीं, असत्य का संग है : नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज

चण्डीगढ़ : दशहरा मैदान सैक्टर 56 में  नृसिंह भक्ति सेवा संस्थान भारतवर्ष के सानिध्य में चल रही कृष्ण कथा गोपी गीत महायज्ञ के दूसरे दिन नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने बताया कि जीवन में सुखी होने की चाह तो प्रत्येक व्यक्ति के भीतर है पर उसके प्रयास सदैव विपरीत दिशा में होते हैं। यदि आप सच में सुखी होना चाहते हैं तो फिर उन रास्तों का त्याग क्यों नहीं करते जिन रास्तों से दुःख आता है ? आपकी सुख की चाह तो ठीक है पर राह ठीक नहीं हैं। सुख के लिए केवल निरंतर प्रयास ही पर्याप्त नहीं है अपितु उचित दिशा में प्रयास हो यह भी आवश्यक है। दुःख भगवान के द्वारा दिया गया कोई दंड नहीं है, यह तो असत्य का संग देने का फल है। आज का आदमी बड़ी दुविधा में है। वह कभी तो राम का संग कर लेता है पर अवसर मिलते ही रावण का संग करने से भी नहीं चूकता है। आप पहले विचार करो कि राम के साथ जीवन जीना है या रावण के साथ ? राम अर्थात् सद्गुण – सदाचार एवं रावण अर्थात् दुर्गुण – दुराचार।
जैसा चुनाव करोगे वैसा ही परिणाम प्राप्त होगा। सत्य पीड़ा देगा मगर पराजय नहीं। असत्य के मार्ग का परित्याग करके हमें राममय ,धर्ममय जीवन जीना है, बस यही सीख ही हमारे जीवन में सुख-शांति की मूल है। आज इस अवसर पर एरिया पार्षद मनोहर खान, समाजसेवी सुभाष शर्मा, साध्वी मां देवेश्वरी, करन नेगी, नत्थी सिंह रावत, कर्ण खंतवाल, बीरबल सिंह, अशोक पांथरी, हरि रणाकोटी, अरविंद जुंतवाण एवं बड़ी संख्या में सनातनी भक्त उपस्थित रहे।

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