चंडीगढ़ में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नौकरी और सामाजिक सुरक्षा के लिए संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने मेयर को सौंपा मांग-पत्र
हरियाणा कौशल रोजगार निगम की तर्ज पर सरकारी रोजगार एजेंसी गठित करने की उठाई मांग; ठेकेदार आधारित व्यवस्था समाप्त करने पर दिया जोर

पुनीत महाजन
चंडीगढ़, 30 अक्टूबर। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा, यू.टी. एवं एम.सी., चंडीगढ़ ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और शोषण से मुक्ति के लिए नगर निगम के मेयर सौरभ जोशी को मांग-पत्र सौंपा। मोर्चा ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम की तर्ज पर चं
डीगढ़ में भी एक केंद्रीयकृत सरकारी आउटसोर्सिंग रोजगार एजेंसी अथवा निगम गठित करने की मांग उठाई।


मोर्चा के प्रतिनिधियों ने मेयर को अवगत करवाया कि चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम के विभिन्न विभागों में हजारों आउटसोर्सिंग कर्मचारी पिछले 10 से 20 वर्षों या उससे भी अधिक समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इनमें सफाई कर्मचारी, हाउसकीपिंग स्टाफ, वॉच एंड वार्ड कर्मचारी, तकनीकी कर्मचारी और डाटा एंट्री ऑपरेटर सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं। इन कर्मचारियों के योगदान से शहर की आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन लंबे समय तक सेवाएं देने के बावजूद उन्हें नौकरी की स्थायी सुरक्षा और सम्मानजनक सेवा शर्तें नहीं मिल पा रही हैं।
मोर्चा ने मौजूदा GeM और निजी ठेकेदारों पर आधारित व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन न मिलने, अनधिकृत कटौतियों, श्रम कानूनों के उल्लंघन तथा EPF और ESI जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं में अनियमितताओं का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा ठेकेदार या टेंडर बदलने पर वर्षों से काम कर रहे कर्मचारियों की नौकरी पर भी संकट खड़ा हो जाता है। ठेकेदारों से संबंधित भ्रष्टाचार और अन्य अनियमितताओं की शिकायतें भी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करती हैं।
मोर्चा की प्रमुख मांगें
संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने मांग की कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम की तर्ज पर चंडीगढ़ में सरकारी आउटसोर्सिंग रोजगार एजेंसी का गठन किया जाए, ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और कर्मचारियों की नियुक्ति सरकारी निगरानी में की जा सके। निजी ठेकेदारों पर निर्भरता समाप्त कर वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों की सेवा निरंतरता सुनिश्चित की जाए तथा ठेकेदार या टेंडर बदलने के कारण किसी भी कर्मचारी की मनमानी छंटनी न हो।
इसके साथ ही कर्मचारियों को समय पर पूरा वेतन, EPF, ESI, मातृत्व लाभ सहित सभी वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध करवाने की मांग की गई। कर्मचारियों की शिकायतों के निवारण के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाने और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दिया गया। मोर्चा ने पात्र कर्मचारियों के पूर्व सेवाकाल को मान्यता देने तथा उनके लिए पारदर्शी, गैर-भेदभावपूर्ण और शोषणमुक्त सेवा शर्तें लागू करने की मांग भी रखी।
प्रतिनिधियों ने कहा कि हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए विभिन्न संस्थागत व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। ऐसे में चंडीगढ़ में भी कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए व्यापक और कर्मचारी-केंद्रित नीति लागू करने की आवश्यकता है।
मोर्चा ने मेयर से आग्रह किया कि इस मामले को नगर निगम सदन के साथ-साथ चंडीगढ़ प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष भी प्राथमिकता के आधार पर उठाया जाए, ताकि हजारों कर्मचारियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सके।
मोर्चा के प्रतिनिधियों ने कहा कि कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक सेवा शर्तें देना केवल श्रमिक कल्याण का विषय नहीं है, बल्कि पारदर्शी प्रशासन और जनहित से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा भी है।
इस अवसर पर गोपाल दत्त जोशी, सुरमुख सिंह, सुखबीर सिंह, रंजीत हंस और बिपिन शेर सिंह उपस्थित रहे।

