news

नालागढ़ के ऐतिहासिक नरसिंह मंदिर की भूमि को लेकर विवाद, हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

41 बीघा से अधिक भूमि के हस्तांतरण और प्रस्तावित टाउनशिप को लेकर मंदिर प्रबंधन ने उठाए सवाल; आरोपों की न्यायिक जांच की मांग

नालागढ़ (सोलन), 26 अक्टूबर 2026।

हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) स्थित ऐतिहासिक ठाकुर द्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर की भूमि को लेकर विवाद सामने आया है। मंदिर प्रबंधन की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मंदिर की भूमि के कथित हस्तांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में बताई गई विसंगतियों और आवासीय टाउनशिप विकसित किए जाने के मुद्दे को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका संख्या 115/2026 दायर की गई है।

मंदिर प्रबंधन ने इस मामले में भूमि के स्वामित्व, हस्तांतरण की प्रक्रिया और संबंधित राजस्व अभिलेखों की जांच की आवश्यकता जताई है। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और उन पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना अभी बाकी है।

मंदिर की ऐतिहासिक भूमि को लेकर प्रबंधन के दावे

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, वर्ष 1421 में राजा विक्रम चंद्र द्वारा मंदिर के निर्माण एवं धार्मिक उद्देश्यों के लिए 1730 बीघा 12 बिस्वा भूमि दान किए जाने का ऐतिहासिक दावा किया जाता है। प्रबंधन का आरोप है कि वर्ष 1972 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने रखरखाव के उद्देश्य से इसमें से 1564 बीघा 13 बिस्वा भूमि अपने अधीन ले ली थी।

मंदिर प्रबंधन ने इस भूमि के संबंध में ऐतिहासिक दस्तावेजों, स्वामित्व अभिलेखों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। इन दावों की वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों एवं सक्षम न्यायिक या प्रशासनिक प्राधिकारियों के निष्कर्षों के आधार पर ही निर्धारित हो सकेगी।

वर्ष 2017 के समझौते और 41 बीघा से अधिक भूमि पर सवाल

मंदिर प्रबंधन की ओर से जारी प्रेस नोट में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2017 में मंदिर की भूमि की वापसी और जीर्णोद्धार से जुड़े आश्वासनों के संदर्भ में 41 बीघा 10 बिस्वा भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया अपनाई गई थी। प्रबंधन ने इस प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाए हैं और स्थानीय विधायक राम कुमार चौधरी सहित अन्य संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की है।

प्रेस नोट में भूमि पर पेड़ों की कटाई, खनन गतिविधियों और लगभग 125 करोड़ रुपये से अधिक की प्रस्तावित आवासीय टाउनशिप के अंतर्गत प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया का भी उल्लेख किया गया है।

ये सभी संबंधित पक्ष द्वारा लगाए गए आरोप एवं दावे हैं। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी निष्पक्ष रूप से प्रकाशित किया जाना चाहिए।

राजस्व रिकॉर्ड और न्यायिक कार्यवाही की जांच की मांग

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, 24 जुलाई 2017 को पंजीकृत समझौते से संबंधित दस्तावेजों में तबादला रजिस्ट्री संख्या 1240 का उल्लेख है। प्रबंधन ने इंतकाल संख्या 1413 को 16 अप्रैल 2018 को निरस्त किए जाने का दावा भी किया है।

प्रेस नोट में स्वामित्व घोषणा से संबंधित मुकदमा संख्या 60/2018, 26 अक्टूबर 2024 के निचली अदालत के निर्णय और 28 अप्रैल 2025 के इंतकाल संख्या 1843 का उल्लेख करते हुए संबंधित दस्तावेजों एवं प्रक्रियाओं की न्यायिक जांच की आवश्यकता जताई गई है।

इन अभिलेखों की कानूनी स्थिति और किसी भी कथित अनियमितता का निर्धारण संबंधित न्यायालय के आदेशों तथा प्रमाणित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है।

हाईकोर्ट की कार्यवाही पर निगाहें

मंदिर प्रबंधन की ओर से दावा किया गया है कि हाईकोर्ट ने मामले में संबंधित गतिविधियों पर अंतरिम रोक लगाई है तथा राजस्व एवं न्यायिक रिकॉर्ड तलब किए हैं। इन आदेशों की सटीक प्रकृति, दायरे और वर्तमान स्थिति की पुष्टि प्रमाणित न्यायिक आदेशों से किया जाना आवश्यक है।

मामले में आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अंतिम निर्णय आने तक सभी संबंधित पक्षों के कानूनी अधिकारों और दावों को ध्यान में रखते हुए निष्पक्षता बनाए रखना आवश्यक है।

मंदिर प्रबंधन ने बीबीएन क्षेत्र के उद्योग जगत, व्यापारियों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर के संरक्षण के लिए सहयोग की अपील की है। प्रबंधन का कहना है कि मंदिर की भूमि से जुड़े विवाद का समाधान पारदर्शी प्रक्रिया, अभिलेखों की निष्पक्ष जांच और कानून के अनुरूप होना चाहिए।


कानूनी अस्वीकरण (Legal Disclaimer)

यह प्रेस विज्ञप्ति मंदिर प्रबंधन की ओर से उपलब्ध कराई गई जानकारी एवं उसके दावों पर आधारित है। इसमें वर्णित आरोपों, भूमि संबंधी दावों, राजस्व अभिलेखों और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र पुष्टि इस विज्ञप्ति के माध्यम से नहीं की जा रही है।

किसी भी व्यक्ति, संस्था, सरकारी विभाग या अन्य पक्ष को दोषी घोषित करने का उद्देश्य नहीं है। संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं का पक्ष प्राप्त होने पर उसे उचित स्थान दिया जाना चाहिए। सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अधिकार है।

इस विज्ञप्ति को किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध अंतिम निष्कर्ष, मानहानिकारक आरोप अथवा न्यायालय के निर्णय के विकल्प के रूप में न पढ़ा जाए। विवादित तथ्यों और कानूनी अधिकारों का निर्धारण सक्षम न्यायालय या संबंधित प्राधिकारी द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों एवं लागू कानून के आधार पर किया जाएगा।

 

Ravinder Popli

House No. 3592, Sector 35 D, Chandigarh 9988293592/9780863592

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *