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ब्रेन स्ट्रोक के इलाज में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी तकनीक महत्वपूर्ण : पार्क अस्पताल के विशेषज्ञ

समय पर अस्पताल पहुंचने से बचाई जा सकती है मरीज की जान; स्ट्रोक के लक्षणों को नजरअंदाज न करें

चंडीगढ़, 27 अक्टूबर 2026। ब्रेन स्ट्रोक के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इसके आधुनिक उपचार विकल्पों की जानकारी देने के उद्देश्य से पार्क अस्पताल, मोहाली के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने मीडिया से बातचीत की। इस दौरान डॉक्टरों ने स्ट्रोक के लक्षणों की समय पर पहचान, तुरंत चिकित्सा सहायता और आधुनिक उपचार तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला।

मीडिया को संबोधित करने वाले विशेषज्ञों में पार्क अस्पताल के ग्रुप डायरेक्टर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी डॉ. संदीप शर्मा, वरिष्ठ सलाहकार रेडियोलॉजिस्ट डॉ. गौरव धवन, सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. संदीप कौर और सलाहकार न्यूरोसर्जन डॉ. अनिल सोफत शामिल थे।

 

हर मिनट महत्वपूर्ण, उपचार में देरी से बढ़ सकता है नुकसान

डॉ. संदीप शर्मा ने कहा कि ब्रेन स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु और स्थायी दिव्यांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। भारत में हर वर्ष लगभग 15 लाख से 20 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के दौरान मस्तिष्क की कोशिकाओं को तेजी से नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए मरीज को जल्द से जल्द ऐसे अस्पताल में पहुंचाना जरूरी है, जहां स्ट्रोक के निदान और उपचार की उचित सुविधाएं उपलब्ध हों।

 

उन्होंने बताया कि इस्केमिक स्ट्रोक के कुछ मामलों में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी जैसी आधुनिक तकनीक से उपचार किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में विशेष उपकरणों की सहायता से मस्तिष्क की रक्त वाहिका में फंसे रक्त के थक्के को निकाला जाता है, ताकि रक्त प्रवाह बहाल किया जा सके।

 

डॉ. शर्मा के अनुसार, मरीज की स्थिति, स्ट्रोक के प्रकार और मस्तिष्क की इमेजिंग रिपोर्ट के आधार पर उपचार का निर्णय लिया जाता है। कुछ चुनिंदा मरीजों में यह प्रक्रिया स्ट्रोक होने के 24 घंटे तक लाभकारी हो सकती है। हालांकि, इसकी उपयुक्तता का निर्धारण विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा किया जाता है।

स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है

 

डॉ. संदीप कौर ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है—इस्केमिक स्ट्रोक और हेमरेजिक स्ट्रोक।

 

इस्केमिक स्ट्रोक: मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका में थक्का बनने या फंसने के कारण रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है।

 

हेमरेजिक स्ट्रोक: मस्तिष्क की किसी रक्त वाहिका के फटने से रक्तस्राव होने लगता है।

 

उन्होंने बताया कि दोनों प्रकार के स्ट्रोक में तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है। स्ट्रोक के लक्षणों में चेहरे का एक तरफ झुकना, हाथ या पैर में अचानक कमजोरी, बोलने या समझने में परेशानी, अचानक दृष्टि संबंधी समस्या, संतुलन बिगड़ना या तेज सिरदर्द शामिल हो सकते हैं।

 

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता दिलानी चाहिए। उपचार में देरी से मस्तिष्क को स्थायी नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है।

 

आधुनिक उपचार से बढ़ी संभावनाएं

 

डॉ. संदीप शर्मा ने बताया कि पहले स्ट्रोक के कई मरीजों के पास सीमित उपचार विकल्प उपलब्ध होते थे। अब आधुनिक तकनीकों के माध्यम से चुनिंदा मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

 

इस्केमिक स्ट्रोक के कुछ मरीजों को रक्त का थक्का घोलने वाली दवा दी जा सकती है। इसके लिए निर्धारित समय-सीमा, मरीज की चिकित्सकीय स्थिति और अन्य पात्रता मानदंडों का ध्यान रखना आवश्यक है। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी भी उपयुक्त मरीजों में एक प्रभावी उपचार विकल्प हो सकती है।

 

उन्होंने कहा कि स्ट्रोक के मरीजों के बेहतर उपचार के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों, न्यूरोइमेजिंग, कैथ लैब और जरूरत पड़ने पर न्यूरो-इंटेंसिव केयर जैसी सुविधाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

 

स्ट्रोक के जोखिम कारकों पर नियंत्रण जरूरी

 

डॉ. अनिल सोफत ने बताया कि उच्च रक्तचाप, मधुमेह, धूम्रपान, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, शारीरिक निष्क्रियता, मोटापा और कुछ हृदय संबंधी बीमारियां स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकती हैं। नियमित स्वास्थ्य जांच और जीवनशैली में सुधार से इसके जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

 

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि वे रक्तचाप और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें, संतुलित आहार लें, नियमित व्यायाम करें और धूम्रपान से बचें। यदि किसी व्यक्ति को एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी हृदय संबंधी समस्या है, तो उसका उचित चिकित्सकीय उपचार भी जरूरी है।

 

डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि एस्पिरिन जैसी दवाएं स्ट्रोक के सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होतीं। विशेष रूप से स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों के दौरान डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन या कोई अन्य दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि मस्तिष्क में रक्तस्राव होने की स्थिति में इससे नुकसान हो सकता है।

 

स्ट्रोक के लक्षण पहचानने के लिए BE FAST का संदेश

 

डॉक्टरों ने लोगों को स्ट्रोक के लक्षण याद रखने के लिए BE FAST का संदेश अपनाने की सलाह दी:

 

– B – Balance: अचानक संतुलन बिगड़ना।

– E – Eyes: अचानक देखने में परेशानी होना।

– F – Face: चेहरे का एक तरफ झुक जाना।

– A – Arms: हाथ में अचानक कमजोरी आना।

– S – Speech: बोलने या बात समझने में परेशानी होना।

– T – Time: समय बर्बाद किए बिना आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना।

 

डॉक्टरों ने कहा कि यदि ये लक्षण अचानक दिखाई दें, तो स्वयं ठीक होने का इंतजार नहीं करना चाहिए। लक्षण कुछ समय बाद समाप्त हो जाएं, तब भी तत्काल चिकित्सकीय जांच जरूरी है, क्योंकि यह ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA) का संकेत हो सकता है।

 

पार्क अस्पताल में उपलब्ध उपचार सुविधाएं

 

अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, पार्क अस्पताल उत्तर भारत में अपने मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल नेटवर्क का संचालन करता है। अस्पताल समूह ने अपनी सुविधाओं में कैथ लैब, मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का उल्लेख किया।

 

विशेषज्ञों ने कहा कि स्ट्रोक के प्रभावी उपचार में समय पर अस्पताल पहुंचना, सही निदान, उचित उपचार और उसके बाद पुनर्वास की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने आम जनता से अपील की कि स्ट्रोक के लक्षणों को गंभीरता से लें और जागरूकता फैलाने में सहयोग करें।

 

निष्कर्ष: ब्रेन स्ट्रोक एक गंभीर लेकिन कई मामलों में समय पर उपचार और जोखिम कारकों पर नियंत्रण के माध्यम से इसके प्रभाव को कम किया जा सकने वाला रोग है। लक्षणों की पहचान, तत्काल चिकित्सा सहायता और आधुनिक उपचार सुविधाओं तक पहुंच मरीज की जान बचाने तथा दिव्यांगता का खतरा कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

Ravinder Popli

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