मोहाली में बिल्डरों की मनमानी पर सरकारी कार्रवाई सवालों के घेरे में
GMADA और RERA की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, घर खरीदारों ने पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की


मोहाली, 25 अक्टूबर।
मोहाली में तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट कारोबार के बीच बिल्डरों की कार्यप्रणाली और सरकारी विभागों की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अनधिकृत कॉलोनियों, विवादित रियल एस्टेट परियोजनाओं, निर्माण संबंधी नियमों के उल्लंघन और खरीदारों को समय पर राहत न मिलने जैसे मुद्दों ने प्रशासनिक जवाबदेही पर बहस तेज कर दी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी परियोजना में नियमों का उल्लंघन होता है या घर खरीदारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, तो संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं करते? क्या परियोजनाओं को मंजूरी देने से लेकर निर्माण कार्य पूरा होने तक उनकी नियमित निगरानी की व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू की जा रही है?

घर खरीदारों की मेहनत की कमाई पर संकट
मोहाली में घर या प्लॉट खरीदना अनेक परिवारों के लिए जीवनभर की बचत का निवेश होता है। कई खरीदार बैंक से ऋण लेकर अपनी आवास संबंधी जरूरतें पूरी करते हैं। ऐसे में यदि किसी परियोजना में निर्माण में देरी, मंजूरियों को लेकर विवाद अथवा नियमों के उल्लंघन जैसी स्थिति सामने आती है, तो खरीदारों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ जाता है।
ऐसी परिस्थितियों में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि खरीदारों को परियोजना की वास्तविक स्थिति, आवश्यक मंजूरियों और निर्माण की प्रगति के संबंध में सही जानकारी मिले। यदि किसी परियोजना में अनियमितता पाई जाती है, तो संबंधित प्राधिकरणों को नियमानुसार समयबद्ध कार्रवाई करनी चाहिए।
GMADA और RERA की भूमिका महत्वपूर्ण
ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMADA) तथा पंजाब रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (RERA) की भूमिका इस मामले में महत्वपूर्ण है। GMADA के अधिकार क्षेत्र में आने वाले नियोजन, विकास और भूमि उपयोग संबंधी विषयों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है। वहीं, RERA के दायरे में आने वाली रियल एस्टेट परियोजनाओं में पंजीकरण, निर्धारित प्रकटीकरण और खरीदारों के अधिकारों से जुड़े प्रावधानों का अनुपालन भी महत्वपूर्ण है।
प्रशासनिक व्यवस्था की प्रभावशीलता का आकलन इस बात से होना चाहिए कि अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर जांच कितनी तेजी से होती है, संबंधित पक्षों को कितना समय लगता है और कार्रवाई के परिणाम जनता के सामने कितनी पारदर्शिता से रखे जाते हैं।
मंजूरियां देने वाले विभागों की जवाबदेही भी जरूरी
किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में आवश्यक मंजूरियां, भूमि उपयोग की स्थिति और निर्माण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। यदि किसी परियोजना में अनियमितता सामने आती है, तो यह जांचना भी जरूरी है कि संबंधित मंजूरियां किन परिस्थितियों में दी गईं और निरीक्षण की प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
इसी तरह, शिकायतों पर कार्रवाई में अनावश्यक देरी होने की स्थिति में उसकी वजह स्पष्ट होनी चाहिए। पारदर्शी व्यवस्था के लिए शिकायतों की स्थिति, जांच के निष्कर्ष और नियमानुसार की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करना उपयोगी कदम हो सकता है।
अवैध कॉलोनियों पर निगरानी की जरूरत
मोहाली और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत कॉलोनियों तथा विवादित परियोजनाओं को लेकर समय-समय पर चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में आम नागरिकों को निवेश से पहले जमीन के कानूनी दस्तावेजों, स्वीकृत लेआउट, आवश्यक अनुमतियों और परियोजना के पंजीकरण की स्थिति की जांच करनी चाहिए।
प्रशासन को भी जागरूकता अभियान चलाकर संभावित खरीदारों को सही जानकारी उपलब्ध करवानी चाहिए, ताकि वे किसी भ्रामक दावे या अधूरी जानकारी के आधार पर अपनी जीवनभर की बचत जोखिम में न डालें।
पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई की मांग
मामले में प्रमुख रूप से कुछ सवालों पर स्पष्टता आवश्यक है:
1. पिछले तीन वर्षों में अनधिकृत कॉलोनियों और विवादित परियोजनाओं के खिलाफ कितने नोटिस जारी किए गए?
2. कितने मामलों में निरीक्षण के बाद कार्रवाई की गई और कितने मामले अभी लंबित हैं?
3. शिकायत मिलने से लेकर जांच पूरी होने तक औसतन कितना समय लगता है?
4. नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई?
5. घर खरीदारों की शिकायतों के निपटारे के लिए क्या प्रभावी व्यवस्था उपलब्ध है?
6. यदि किसी मामले में विभागीय स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी निर्धारित करने की प्रक्रिया क्या है?
इन सवालों के उत्तर संबंधित विभागों के आधिकारिक रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर सामने आने चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
निष्कर्ष
मोहाली का रियल एस्टेट क्षेत्र क्षेत्रीय विकास और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका विकास कानूनों के पालन, पारदर्शिता और उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के साथ ही टिकाऊ हो सकता है। GMADA, पंजाब RERA और अन्य संबंधित विभागों को अपने अधिकार क्षेत्र में प्रभावी निगरानी, शिकायतों का समयबद्ध निपटारा और नियमों के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
घर खरीदारों की मेहनत की कमाई की सुरक्षा केवल बिल्डरों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रभावी नियामक व्यवस्था और जवाबदेह प्रशासन की भी कसौटी है।
संपादकीय टिप्पणी: इस विषय पर संबंधित विभागों की आधिकारिक प्रतिक्रिया, कार्रवाई के आंकड़े और शिकायतों की स्थिति सामने आने के बाद ही किसी विशेष अधिकारी या बिल्डर की जिम्मेदारी के संबंध में निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।
