चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से राम वनवास से चित्रकूट की धर्मसभा तक के प्रसंगों का मंचन
संवाद थिएटर ग्रुप की रामलीला में राम-भरत संवाद ने किया भावुक


राकेश शर्मा (tricitinews.com)
चंडीगढ़ 16.10.26

चंडीगढ़: चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी (सीएसएनए) के सहयोग से संस्कार भारती, पंजाब प्रांत और संवाद थिएटर ग्रुप की ओर से गढ़वाल रामलीला एवं दशहरा मंडल, सेक्टर-28बी, चंडीगढ़ में श्रीरामलीला का मंचन किया गया। करीब ढाई घंटे की इस प्रस्तुति में श्रीराम के वनवास से लेकर चित्रकूट की धर्मसभा तक के प्रसंगों को मंचित किया गया। कलाकारों ने अभिनय और संवादों के माध्यम से रामायण के प्रमुख घटनाक्रमों को प्रस्तुत किया।

मंचन में कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से दो वरदान मांगने, श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास मिलने, माता सीता और लक्ष्मण के उनके साथ वन जाने तथा पुत्र-वियोग में राजा दशरथ की पीड़ा जैसे प्रसंग शामिल रहे। इसके बाद भरत के अयोध्या लौटने और श्रीराम को वापस लाकर राजकाज संभालने के आग्रह को दर्शाया गया।

प्रस्तुति का प्रमुख आकर्षण चित्रकूट की धर्मसभा रही, जिसमें श्रीराम और भरत के बीच राजधर्म, कर्तव्य और मर्यादा को लेकर संवाद हुआ। श्रीराम ने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए वनवास पूरा करने की बात कही, जबकि भरत ने उनसे अयोध्या लौटने का आग्रह किया। इस प्रसंग के माध्यम से दोनों भाइयों के त्याग, पारिवारिक संबंधों और कर्तव्यनिष्ठा को दर्शाया गया।
रामलीला में श्रीराम की भूमिका कृष्ण भट्ट, लक्ष्मण की भूमिका नीरज, माता सीता की भूमिका हिमांशी राजपूत, राजा दशरथ की भूमिका वीरेंद्र पराशर, ऋषिराज जनक की भूमिका हंसराज पराशर, कैकेयी की भूमिका सोनाक्षी शर्मा, मंथरा की भूमिका सिमरन, उर्मिला की भूमिका अंकित पराशर, महर्षि वशिष्ठ की भूमिका कमल गुप्ता, विश्वामित्र की भूमिका सुनील सिंह और केवट की भूमिका अभिषेक ने निभाई।

मंचन के दौरान प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि और एलईडी वॉल का इस्तेमाल किया गया। प्रकाश व्यवस्था की डिजाइनिंग और संचालन राजेश कुमार ने किया। तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से विभिन्न दृश्यों को मंच पर प्रस्तुत किया गया।

आयोजकों के अनुसार, प्रस्तुति का उद्देश्य रामायण के प्रसंगों के माध्यम से कर्तव्य, त्याग, पारिवारिक एकता और नैतिक मूल्यों को रेखांकित करना था। राम-भरत संवाद के जरिए यह संदेश दिया गया कि अधिकारों के साथ कर्तव्यों का निर्वहन और दूसरों के प्रति सम्मान भी महत्वपूर्ण है।



